आरटीई को लेकर छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट सख्त, स्कूलों को रिकॉर्ड पेश करने का दिया आखिरी मौका
बिलासपुर हाई कोर्ट
CG High Court RTE: Bilaspur: छत्तीसगढ़ से बड़ी खबर सामने आ रही है. जहां, बच्चों को शिक्षा के अधिकार अधिनियम यानी कि आरटीई के तहत प्राइवेट स्कूलों में आरक्षित सीटों और उनमें एंट्रेंस से संबंधित सही रिकॉर्ड प्रस्तुत नहीं किए जाने पर बिलासपुर स्थित छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई है.
बता दें कि, चीफ जस्टिस के. आर. महापात्रा और जस्टिस रविंद्र अग्रवाल की स्पेशल डिवीजन बेंच ने राज्य शासन को सभी स्कूलों में आरटीई के तहत आरक्षित सीटों और बच्चों से संबंधित सही एवं पूर्ण रिकॉर्ड प्रस्तुत करने का आखरी मौका दिया है.
क्या है पूरा मामला ?
दरअसल, यह पूरा मामला भगवंत की ओर से दायर जनहित याचिका से जुड़ा हुआ है. याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता देवर्षि ठाकुर ने कोर्ट को बताया कि शासन द्वारा प्रस्तुत रिकॉर्ड में कई बड़े स्कूलों में आरटीई के तहत आरक्षित सीटों की संख्या शून्य या बेहद कम बताई गई है. रिकॉर्ड की वास्तविक स्थिति से मेल नहीं खाने के कारण शासन द्वारा प्रस्तुत जानकारी पर भी सवाल उठाए गए.
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हाईकोर्ट ने जताई नाराजगी
पूरे मामले में सुनवाई के दौरानचीफ जस्टिस के. आर. महापात्रा और जस्टिस रविंद्र अग्रवाल की स्पेशल डिवीजन बेंच ने शासन द्वारा प्रस्तुत रिकॉर्ड पर नाराजगी जताते हुए कहा कि कोर्ट के साथ इस तरह मजाक नहीं किया जाना चाहिए. कोर्ट ने यह भी कहा कि पहले वर्ष 2016 में दिए गए आदेशों के बावजूद उनका उचित अनुपालन नहीं हुआ है.
बता दें, हाई कोर्ट ने राज्य शासन को निर्देश दिया कि सभी स्कूलों का सही और सत्यापित रिकॉर्ड अगली सुनवाई में प्रस्तुत किया जाए. बेंच ने स्पष्ट किया कि यदि 18 नवंबर तक सभी स्कूलों का सही डेटा प्रस्तुत नहीं किया गया, तो शिक्षा सचिव कमलप्रीत सिंह के खिलाफ धारा 311 के तहत कार्रवाई की जाएगी.