CG News: गर्भपात की अनुमति, भ्रूण का सैंपल सुरक्षित रखें, रेप पीड़िताओं के हित में CG हाईकोर्ट का बड़ा फैसला
छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट
CG News: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने दुष्कर्म के बाद गर्भवती हुई एक युवती को गर्भपात कराने की अनुमति दे दी है. अदालत ने यह भी निर्देश दिया है कि भ्रूण का DNA सैंपल सुरक्षित रखा जाए, ताकि आगे चलकर मामले की जांच और ट्रायल में उसका उपयोग किया जा सके. कोर्ट ने साफ कहा कि किसी भी रेप पीड़िता को यह अधिकार है कि वह अपनी गर्भावस्था को जारी रखना चाहती है या नहीं, इसका फैसला स्वयं ले सके.
शादी का झांसा देकर संबंध बनाने का आरोप
मामला बिलासपुर की 21 वर्षीय युवती से जुड़ा है. युवती ने अपने प्रेमी के खिलाफ दुष्कर्म का केस दर्ज कराया था. शिकायत में कहा गया कि आरोपी युवक ने शादी का भरोसा देकर उसके साथ संबंध बनाए, लेकिन बाद में शादी से इनकार कर दिया. युवती फिलहाल करीब 4 से 5 महीने की गर्भवती है और उसने कानूनी तौर पर गर्भपात की अनुमति के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था.
मानसिक और शारीरिक परेशानी का हवाला
याचिका में युवती ने बताया कि आरोपी ने उसकी इच्छा के विरुद्ध शारीरिक संबंध बनाए और शादी का वादा करके उसे धोखे में रखा. गर्भवती होने के बाद जब उसने युवक से विवाह की बात की तो उसने साफ मना कर दिया. युवती ने अदालत को बताया कि वह इस गर्भ को आगे नहीं बढ़ाना चाहती, क्योंकि इससे उसे मानसिक तनाव और शारीरिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. उसने यह भी कहा that जिस व्यक्ति पर दुष्कर्म का आरोप है, उसके बच्चे को जन्म देना उसके लिए असहनीय है और इस घटना के बाद वह सामाजिक अपमान और शर्मिंदगी महसूस कर रही है.
मेडिकल रिपोर्ट में 16 से 20 सप्ताह की प्रेग्नेंसी
मामले की शुरुआती सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने 19 मई को बिलासपुर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को निर्देश दिए थे कि विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम गठित कर युवती की मेडिकल जांच कराई जाए. मेडिकल रिपोर्ट में सामने आया कि युवती लगभग 16 से 20 सप्ताह की गर्भवती है.
कोर्ट ने पीड़िता के अधिकार को माना अहम
जस्टिस एनके व्यास की सिंगल बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि ऐसे मामलों में पीड़िता की इच्छा और उसके अधिकारों का सम्मान किया जाना जरूरी है. अदालत ने माना कि न्यायिक आदेश के बिना डॉक्टर गर्भपात की प्रक्रिया नहीं कर सकते थे, इसलिए परिस्थितियों को देखते हुए याचिका स्वीकार की जाती है.
अस्पताल में भर्ती कराने के निर्देश
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि युवती को तत्काल सिम्स या जिला अस्पताल बिलासपुर में भर्ती कराया जाए. वहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम युवती और उसके परिवार की सहमति से मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी (MTP) की प्रक्रिया पूरी करेगी. साथ ही अदालत ने यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि भ्रूण का DNA सैंपल सुरक्षित रखा जाए, ताकि भविष्य में जांच और न्यायिक प्रक्रिया में उसे साक्ष्य के रूप में इस्तेमाल किया जा सके.
आरोपी गिरफ्तार, मामला लंबित
इस मामले में युवती की शिकायत के आधार पर बिलासपुर के सिविल लाइन थाना क्षेत्र में आरोपी युवक के खिलाफ केस दर्ज किया गया था. पुलिस आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है और उसके खिलाफ आपराधिक मामला फिलहाल लंबित है.
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