युवाओं को ‘जॉब सीकर’ नहीं, ‘जॉब क्रिएटर’ बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा छत्तीसगढ़ : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

रायपुर. मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने नई दिल्ली में आयोजित दो दिवसीय वर्ल्ड लीडर्स फोरम में छत्तीसगढ़ की बदलती अर्थव्यवस्था और निवेश की संभावनाओं का रोडमैप वैश्विक निवेशकों के सामने रखा. उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ अब केवल खनिज और पारंपरिक उद्योगों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि युवा शक्ति, नवाचार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, स्टार्टअप, हरित ऊर्जा और आधुनिक […]
CM विष्णुदेव साय

CM विष्णुदेव साय

रायपुर. मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने नई दिल्ली में आयोजित दो दिवसीय वर्ल्ड लीडर्स फोरम में छत्तीसगढ़ की बदलती अर्थव्यवस्था और निवेश की संभावनाओं का रोडमैप वैश्विक निवेशकों के सामने रखा. उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ अब केवल खनिज और पारंपरिक उद्योगों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि युवा शक्ति, नवाचार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, स्टार्टअप, हरित ऊर्जा और आधुनिक विनिर्माण को नई अर्थव्यवस्था का आधार बनाया जा रहा है.

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल निवेश आकर्षित करना नहीं, बल्कि उससे रोजगार, उद्यमिता और युवाओं की आय बढ़ाने के अवसर पैदा करना है. प्रदेश के युवा केवल नौकरी तलाशने वाले न रहें, बल्कि नए रोजगार पैदा करने वाले उद्यमी बनें, इसी दिशा में नीतियां तैयार की जा रही हैं.

6.31 लाख करोड़ की अर्थव्यवस्था

मुख्यमंत्री के अनुसार वर्ष 2025-26 में छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था का आकार करीब 6.31 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया है, जबकि आर्थिक वृद्धि दर 11.57 प्रतिशत रही. प्रति व्यक्ति आय बढ़कर 1,79,244 रुपये हो गई है. वर्ष 2026-27 के 1.72 लाख करोड़ रुपये के बजट में अधोसंरचना, पूंजीगत व्यय और सामाजिक कल्याण को प्राथमिकता दी गई है.

8 लाख करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्ताव

मुख्यमंत्री ने बताया कि नई औद्योगिक विकास नीति 2024-30, सिंगल विंडो सिस्टम और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस सुधारों के बाद प्रदेश में निवेश का माहौल बेहतर हुआ है. पिछले दो वर्षों में 450 से अधिक प्रक्रियाओं का सरलीकरण किया गया है. नई औद्योगिक नीति लागू होने के बाद राज्य को 8 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव मिल चुके हैं. सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डेटा सेंटर, फार्मा, कपड़ा, लॉजिस्टिक्स, हरित ऊर्जा और खाद्य प्रसंस्करण जैसे क्षेत्रों को भविष्य की अर्थव्यवस्था के प्रमुख आधार के रूप में विकसित किया जा रहा है.

2030 तक 5 हजार स्टार्टअप का लक्ष्य

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने वर्ष 2030 तक 5 हजार स्टार्टअप विकसित करने का लक्ष्य रखा है. नए उद्यमियों को उनके विचारों को व्यवसाय में बदलने के लिए 10 लाख रुपये तक की सीड फंड सहायता उपलब्ध कराई जा रही है. सरकार का जोर युवाओं को तकनीक, कौशल, नवाचार और बाजार से जोड़ने पर है.

6 लाख विद्यार्थियों को एआई प्रशिक्षण

छत्तीसगढ़ में 6 लाख विद्यार्थियों और 1.5 लाख सरकारी कर्मचारियों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता का प्रशिक्षण देने की योजना है. इसके अलावा नागरिकों को बेहतर सरकारी सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए 50 से अधिक कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित सेवाएं विकसित की जाएंगी.

राज्य में 500 करोड़ रुपये के एआई मिशन पर काम किया जा रहा है. इसके तहत 100 एआई डेटा लैब, 5 उत्कृष्टता केंद्र और 300 से अधिक एआई स्टार्टअप को सहयोग देने का लक्ष्य है. नवा रायपुर में करीब 1,000 करोड़ रुपये की लागत से एआई डेटा सेंटर पार्क विकसित किया जा रहा है.

बस्तर में खुलेंगे विकास और रोजगार के नए रास्ते

मुख्यमंत्री ने बस्तर को प्रदेश की नई अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार बताया. उन्होंने कहा कि सुरक्षा व्यवस्था में सुधार के बाद बस्तर में विकास, पर्यटन, निवेश और रोजगार के नए अवसर तैयार हो रहे हैं.

बस्तर समेत प्रदेश के करीब 10 लाख परिवारों की आय बढ़ाने के लिए 4,824 करोड़ रुपये की आजीविका उन्नयन योजना तैयार की जा रही है. बस्तर में 421 बंद स्कूलों को दोबारा शुरू किया गया है. वहीं, 3,513 करोड़ रुपये की जगदलपुर-रावघाट रेल परियोजना को क्षेत्र के आर्थिक विकास के लिए महत्वपूर्ण बताया गया.

चित्रकोट, तीरथगढ़, कांगेर घाटी और सिरपुर जैसे पर्यटन स्थलों के विकास के साथ स्थानीय हस्तशिल्प, लघु वनोपज, औषधीय पौधों, मिलेट और कृषि उत्पादों की स्थानीय स्तर पर प्रसंस्करण और मूल्यवर्धन को बढ़ावा देने की बात भी मुख्यमंत्री ने कही.

हरित ऊर्जा पर भी जोर

छत्तीसगढ़ में आगामी वर्षों में करीब 4 हजार मेगावाट अतिरिक्त सौर ऊर्जा क्षमता विकसित करने का लक्ष्य है. राज्य के 90 हजार से अधिक घर सौर ऊर्जा से जुड़ चुके हैं. भिलाई में प्रदेश का पहला फ्लोटिंग सोलर प्लांट भी स्थापित किया गया है. मुख्यमंत्री ने कहा कि हरित ऊर्जा से निवेश के साथ-साथ नए रोजगार भी पैदा होंगे.

कच्चे माल के बजाय तैयार उत्पाद पर जोर

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध है, लेकिन अब लक्ष्य केवल कच्चे माल के उत्पादन तक सीमित रहना नहीं है. प्रदेश में ही संसाधनों का प्रसंस्करण और मूल्यवर्धन कर स्थानीय लोगों को अधिक आर्थिक लाभ दिलाने पर जोर दिया जा रहा है.

नवा रायपुर और राजनांदगांव में इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण से जुड़ी अधोसंरचना, राजनांदगांव में प्रस्तावित अंतरिक्ष विनिर्माण क्लस्टर, 142 एकड़ का फार्मा पार्क और टेक्सटाइल एवं रेडीमेड गारमेंट पार्क को भविष्य के औद्योगिक विकास से जोड़ा जा रहा है. कोरबा में लिथियम की खोज से बैटरी निर्माण और ऊर्जा भंडारण क्षेत्र में भी नई संभावनाएं बनने की उम्मीद है.

मुख्यमंत्री ने कहा कि ईज ऑफ डूइंग बिजनेस अधिनियम-2026 के जरिए निवेश प्रक्रियाओं को और सरल किया गया है. आठ विभागों की 43 सेवाओं को इसमें शामिल किया गया है और करीब 15 लाख एमएसएमई को इसका लाभ मिलने की संभावना है.

मुख्यमंत्री ने वैश्विक निवेशकों से छत्तीसगढ़ में निवेश का आह्वान करते हुए कहा कि राज्य में प्राकृतिक संसाधनों के साथ ऊर्जा, भूमि, युवा मानव संसाधन, बेहतर कनेक्टिविटी, आधुनिक अधोसंरचना और निवेश-अनुकूल नीतियां उपलब्ध हैं. उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ अब संसाधन आधारित अर्थव्यवस्था से आगे बढ़कर ज्ञान, तकनीक, नवाचार और उद्यमिता आधारित अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रहा है.

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