छत्तीसगढ़ को जल्द मिल सकता है नया भाजपा प्रदेश प्रभारी, राजनीतिक गलियारों में इन नामों को लेकर चर्चा

रायपुर. भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में नई नियुक्तियों के बाद अब छत्तीसगढ़ के प्रदेश प्रभारी को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है.
Nitin Nabin

BJP अध्यक्ष नितिन नवीन

रायपुर. भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में नई नियुक्तियों के बाद अब छत्तीसगढ़ के प्रदेश प्रभारी को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है. फिलहाल प्रदेश प्रभारी की औपचारिक घोषणा नहीं हुई है और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ही छत्तीसगढ़ के प्रभारी की भूमिका संभाल रहे हैं. माना जा रहा है कि जल्द ही राज्य को नया प्रदेश प्रभारी मिल सकता है.

भाजपा सूत्रों के मुताबिक, राज्यों के प्रभारी के तौर पर मुख्य रूप से राष्ट्रीय महामंत्रियों में से ही नेताओं को जिम्मेदारी देने की तैयारी है. इसी क्रम में मंगलवार को राष्ट्रीय महामंत्री विनोद तावड़े और डॉ. सतीश पूनिया को क्रमशः उत्तर प्रदेश और पंजाब जैसे महत्वपूर्ण राज्यों का प्रभारी बनाया गया है. इसके बाद छत्तीसगढ़ के लिए भी राष्ट्रीय स्तर के किसी अनुभवी नेता की तलाश को लेकर चर्चा शुरू हो गई है.

चुनावी राज्य होने से बढ़ी अहमियत

छत्तीसगढ़ में वर्ष 2028 में विधानसभा चुनाव होने हैं. ऐसे में प्रदेश प्रभारी की भूमिका को महत्वपूर्ण माना जा रहा है. पार्टी के भीतर यह चर्चा है कि राज्य में सत्ता और संगठन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने के लिए किसी सक्रिय और तेजतर्रार नेता को जिम्मेदारी दी जा सकती है. हालांकि राष्ट्रीय महामंत्रियों के अलावा किसी राष्ट्रीय उपाध्यक्ष या राष्ट्रीय मंत्री को भी प्रदेश प्रभारी बनाए जाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा है. अंतिम फैसला भाजपा का केंद्रीय संगठन ही करेगा.

इन नामों की चर्चा

प्रदेश प्रभारी पद को लेकर राष्ट्रीय महामंत्री सुनील बंसल, गजेंद्र पटेल और हरीश द्विवेदी के नामों की चर्चा राजनीतिक गलियारों में चल रही है. हालांकि अभी तक इनमें से किसी नाम पर आधिकारिक निर्णय नहीं हुआ है. पार्टी संगठन में अंतिम सहमति के बाद ही नियुक्ति की घोषणा की जाएगी.

सौदान सिंह की हो सकती है वापसी ?

नए प्रदेश प्रभारी की चर्चा के साथ भाजपा के राष्ट्रीय सहसंगठन मंत्री के रूप में सौदान सिंह की भूमिका को लेकर भी छत्तीसगढ़ में राजनीतिक चर्चाएं तेज हैं. सौदान सिंह लंबे समय तक छत्तीसगढ़ में संगठन का काम देख चुके हैं. करीब 15 वर्षों तक राज्य में संगठन के साथ जुड़े रहने के कारण प्रदेश भाजपा के नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है. पार्टी में उन्हें पहले राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और बाद में राष्ट्रीय सहसंगठन मंत्री की जिम्मेदारी दी गई. अब राष्ट्रीय स्तर पर संगठनात्मक जिम्मेदारी में उनकी वापसी के बाद यह चर्चा है कि राज्यों के कामकाज के बंटवारे में उन्हें छत्तीसगढ़ की जिम्मेदारी मिल सकती है. यदि ऐसा होता है तो लंबे समय से उनके साथ काम कर चुके पार्टी नेताओं में उत्साह बढ़ सकता है.

डॉ. संदीप पाठक का नाम भी चर्चा में

इसी तरह राष्ट्रीय मंत्री बनाए गए डॉ. संदीप पाठक के नाम को लेकर भी छत्तीसगढ़ में राजनीतिक चर्चा है. हालांकि उन्होंने पंजाब को अपनी राजनीतिक कर्मभूमि बनाया है, लेकिन उनका मूल संबंध छत्तीसगढ़ के मुंगेली से बताया जाता है. आम आदमी पार्टी में रहते हुए वे छत्तीसगढ़ के प्रभारी की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं.

राजनीतिक रणनीति और चुनावी समीकरणों की समझ के कारण डॉ. पाठक का नाम भी भाजपा के संगठनात्मक हलकों में चर्चा में है. हालांकि प्रदेश प्रभारी की नियुक्ति को लेकर अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है और सभी संभावनाएं केंद्रीय नेतृत्व के निर्णय पर निर्भर हैं. छत्तीसगढ़ में 2028 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए भाजपा के सामने संगठन को लगातार सक्रिय रखने और सत्ता-संगठन के बीच बेहतर तालमेल बनाए रखने की चुनौती होगी. ऐसे में नए प्रदेश प्रभारी की नियुक्ति को केवल संगठनात्मक बदलाव के तौर पर नहीं, बल्कि आगामी चुनावी रणनीति की महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में भी देखा जा रहा है.

ये खबर भी जरूर पढ़ेंः Bilaspur High Court News: 78 वर्षीय विधवा को पेंशन नहीं मिली, सरगुजा कलेक्टर को हाईकोर्ट का अवमानना नोटिस

ज़रूर पढ़ें