क्या है छत्तीसगढ़ का फेमस फेस्टिवल ‘पोरा तिहार’? जानिए क्यों बेहद खास है यह पारंपरिक पर्व

Chhattisgarh Pora Tihar Festival: आज पूरे छत्तीसगढ़ में बड़े ही धूमधाम से 'पोला तिहार' पर्व मनाया जा रहा है. लेकिन क्या आप इस पर्व से जुड़ी कुछ खास परंपराएं जानते हैं.
pora tihar

पोला तिहार, फेस्टिवल

Chhattisgarh Pora Tihar Festival: आज पूरे छत्तीसगढ़ में बड़े ही धूमधाम से ‘पोरा तिहार’ पर्व मनाया जा रहा है. गांव से लेकर शहरों तक इस लोक आस्था से जुड़े पर्व की धूम है. ये त्योहार हर साल भाद्रपद मास की आमावस्या तिथि पर पूरे प्रदेश में धूम धाम से मानया जाता है. इस दिन घरों में तरह-तरह के पकवान बनाएं जाते हैं और बच्चों के साथ-साथ पूरे परिवार में इस पर्व को लेकर उत्साह रहता है. आइए इस लेख में ‘पोरा तिहार’ पर्व से जुड़ी हुई मान्याएं और इसकी खासियत के बारे में जानते हैं.

इस त्योहार की खासियत

खास तौर पर ये त्योहार एक प्रमुख कृषि आधारित लोक पर्व है, जो मुख्य रूप से हमारी माटी, खेती-किसानी और पशुधन के प्रति समर्पित व कृतज्ञता प्रकट करने के लिए मनाया जाता है. इस त्योहार पर किसान साल भर खेतों में अपने साथ मेहनत करने वाले बैल और गौवंश की पूजा-अर्चना करते है. किसान अपने बैलों को पहले नहलाते हैं फिर उनके खुरों और सींगों को रंग से रंगते हैं. गले में घुंघरू, घंटी और कौड़ी से बने आभूषण पहनाते हैं.

किसानी का काम पूरा होने खुशी

इसके बाद उनकी पूजा कर सुख-शांति तथा अच्छी फसल की कामना करते हैं. किसान आज के दिन अपने खेतों की माटी की भी पूजा करते हैं. खरीफ फसल के दूसरे चरण यानी निंदाई-गुड़ाई का काम पूरा होने की खुशी में ये पर्व मनाजा जाता है. आज के दिन लड़की और मिट्टी से बने गाड़ी और बैल को भी चलाने की परंपरा है. इसलिए पोला तिहार से 3-4 दिन पहले बजारों में मिट्टी और लकड़ी से बने गाड़ी और बैल बिकना शुरू हो जाते हैं.

कई तरह के पकवान

इस त्योहार के दिन छत्तीसगढ़ की रसोई में अलग-अलग तरह के व्यंजन बनाए जाते हैं. ठेठरी, खुरमी और चीला लगभग हर किचन में आपको मिल जाएगा. इस त्योहार पर किसान खेतों में नहीं जाते और घर पर त्योहार मनाकर धरती माता और अन्नदाता का आभार व्यक्त करते हैं. छत्तीसगढ़ में यह पर्व माताओं-बहनों के त्योहार ‘तीजा’ से भी जुड़ा है, जिसमें शादीशुदा बेटियां अपने मायके आकर इस उत्सव का आनंद लेती हैं

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