छत्तीसगढ़ के ‘कोसा’ को मिला अपना प्रीमियम ब्रांड, पारंपरिक करघों की खनक पहुंचेगी वैश्विक बाजारों तक
छत्तीसगढ़ का हैंडलूम ब्रांड 'कोशल फैब'
छत्तीसगढ़ के पारंपरिक करघों पर पीढ़ियों से बुना जा रहा कोसा अब एक नई पहचान के साथ आगे बढ़ने के लिए तैयार है. राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने ‘कोशल फैब’ का शुभारंभ कर छत्तीसगढ़ के कोसा और हथकरघा उत्पादों को एक सशक्त ब्रांड पहचान दी. यह पहल प्रदेश के बुनकरों, विशेषकर आदिवासी अंचलों के कारीगरों के हुनर को आधुनिक डिजाइन, बेहतर पैकेजिंग और संगठित विपणन से जोड़ते हुए नए बाजारों तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है.
छत्तीसगढ़ की समृद्ध बुनाई परंपरा
‘कोशल फैब’ केवल एक नया ब्रांड नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की समृद्ध बुनाई परंपरा, बुनकरों की मेहनत और स्थानीय शिल्प को नई पहचान दिलाने का माध्यम है. इसके जरिए करघों पर बुना हर धागा अब छत्तीसगढ़ की संस्कृति, कौशल और सृजनशीलता की कहानी कहेगा. यह पहल बुनकर परिवारों की आय बढ़ाने, युवाओं को इस परंपरा से जोड़ने और छत्तीसगढ़ के कोसा को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विशिष्ट पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण शुरुआत मानी जा रही है.
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लोगो एवं कैटलॉग का विमोचन
इस दौरान सीएम साय ने छत्तीसगढ़ राज्य हथकरघा संघ के नए प्रीमियम हैंडलूम ब्रांड ‘कोशल फैब’ का शुभारंभ करते हुए उसके लोगो एवं कैटलॉग का विमोचन किया. उन्होंने हथकरघा इन्वेंट्री मैनेजमेंट सॉफ्टवेयर का भी शुभारंभ किया. इस अवसर पर सीएम ने रेशम, हथकरघा, हस्तशिल्प, खादी एवं माटीकला बोर्ड के कई हितग्राहियों और मेधावी छात्र-छात्राओं को 10 करोड़ 90 लाख रुपये से अधिक की अनुदान और पुरस्कार राशि बांटी.