महतारी वंदन योजना का पोर्टल फिर खोलने की तैयारी, नए पात्र हितग्राहियों को मिलेगा मौका

रायपुर. प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी महतारी वंदन योजना का लाभ अधिक से अधिक पात्र हितग्राहियों तक पहुंचाने की तैयारी शुरू हो गई है. योजना से अब तक वंचित रह गई पात्र महिलाओं को जोड़ने के लिए सरकार एक बार फिर पोर्टल खोलने पर विचार कर रही है. इसके साथ ही योजना का दायरा बढ़ाने की […]
Mahtari Vandan Yojana

महतारी वंदन योजना

रायपुर. प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी महतारी वंदन योजना का लाभ अधिक से अधिक पात्र हितग्राहियों तक पहुंचाने की तैयारी शुरू हो गई है. योजना से अब तक वंचित रह गई पात्र महिलाओं को जोड़ने के लिए सरकार एक बार फिर पोर्टल खोलने पर विचार कर रही है. इसके साथ ही योजना का दायरा बढ़ाने की दिशा में भी मंथन चल रहा है.

जानकारी के अनुसार, दिव्यांग महिलाओं, कुछ श्रेणी की अविवाहित युवतियों और ट्रांसजेंडर महिलाओं को महतारी वंदन योजना के दायरे में लाने की प्रक्रिया पर विचार किया जा रहा है. हालांकि, नए वर्गों को शामिल करने से पहले उनकी पात्रता, आयु सीमा और अन्य आवश्यक शर्तें निर्धारित की जाएंगी.

नए वर्गों के आंकड़े जुटाए जा रहे

योजना का विस्तार करने के लिए संबंधित विभागों से आंकड़े जुटाए जा रहे हैं. इनमें दिव्यांग महिलाओं और ट्रांसजेंडर महिलाओं की संख्या, आयु वर्ग सहित अन्य जरूरी जानकारियां शामिल हैं. इन आंकड़ों के आधार पर संभावित नए हितग्राहियों की संख्या और सरकार पर पड़ने वाले अतिरिक्त वित्तीय भार का आकलन किया जाएगा.

पोर्टल खुला तो दोबारा आवेदन का मौका

सरकार यदि पोर्टल दोबारा खोलने का निर्णय लेती है तो ऐसे पात्र हितग्राहियों को नए सिरे से आवेदन करने का अवसर मिलेगा, जो किसी कारणवश पहले योजना का लाभ नहीं ले पाए थे. इसके लिए ऑनलाइन आवेदन के साथ दस्तावेजों का सत्यापन और पात्रता जांच की प्रक्रिया भी निर्धारित की जाएगी.

अविवाहित युवतियों के लिए तय होंगे नियम

योजना का दायरा बढ़ाने से पहले सरकार यह स्पष्ट करेगी कि किन श्रेणी की अविवाहित युवतियों को पात्र माना जाएगा. उनके लिए न्यूनतम और अधिकतम आयु सीमा भी तय की जा सकती है. इसी तरह दिव्यांग और ट्रांसजेंडर महिलाओं के लिए भी पात्रता के स्पष्ट मापदंड बनाए जाएंगे.

हर माह करीब 700 करोड़ रुपये का खर्च

महतारी वंदन योजना के तहत वर्तमान में लाखों पात्र महिलाओं को हर माह 1000 रुपये की आर्थिक सहायता सीधे उनके बैंक खातों में भेजी जाती है. सरकार इस योजना पर हर महीने करीब 700 करोड़ रुपये खर्च कर रही है. नए वर्गों को शामिल करने से पहले वित्तीय भार का भी आकलन किया जाएगा. विभागीय स्तर पर आंकड़े और प्रस्ताव तैयार होने के बाद योजना के विस्तार को लेकर अंतिम निर्णय लिया जाएगा. फिलहाल सरकार का जोर योजना का लाभ वास्तविक रूप से पात्र और अब तक छूटे हुए हितग्राहियों तक पहुंचाने पर है.

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