Raipur News: ठगों के झांसे में फंसे डॉ राकेश, लगी 25.66 लाख की चपत

रायपुर. क्रिप्टो करेंसी और यूएसडीटी ट्रेडिंग में निवेश कर अच्छा मुनाफा दिलाने का झांसा देकर एक चिकित्सा अधिकारी से 25 लाख 66 हजार 900 रुपये की धोखाधड़ी किए जाने का मामला सामने आया है.
CG News

Doctor(File Image)

Raipur News: रायपुर. क्रिप्टो करेंसी और यूएसडीटी ट्रेडिंग में निवेश कर अच्छा मुनाफा दिलाने का झांसा देकर एक चिकित्सा अधिकारी से 25 लाख 66 हजार 900 रुपये की धोखाधड़ी किए जाने का मामला सामने आया है. पीड़ित की शिकायत पर आजाद चौक पुलिस ने रेशमी गुप्ता और सुरेश चौहान के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4), 3(5) के तहत अपराध दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है.

 पुलिस के मुताबिक समता कॉलोनी निवासी डॉ राकेश कुमार, कामधेनु विश्वविद्यालय, दुर्ग में चिकित्सा अधिकारी के पद पर पदस्थ हैं और वर्तमान में नेहरू नगर भिलाई में किराये के मकान में रह रहे हैं. उन्होंने शिकायत में बताया कि अगस्त 2026 के दौरान फेसबुक के माध्यम से उनकी पहचान रेशमी गुप्ता नाम की महिला से हुई थी. महिला ने उन्हें क्रिप्टो करेंसी में निवेश करने पर अच्छा मुनाफा मिलने की जानकारी दी और निवेश के लिए भरोसा दिलाया.

शिकायत के अनुसार रेशमी गुप्ता ने राकेश की पहचान अपने कथित वरिष्ठ सुरेश चौहान से कराई. इसके बाद सुरेश चौहान ने उन्हें ‘सिनचेन’ नामक प्लेटफार्म पर पंजीकृत कराया. शुरुआती ट्रेडिंग के दौरान पीड़ित को खाते में मुनाफा होता हुआ दिखाया गया. इसके बाद उन्हें बाइनेंस ट्रेडिंग एप के माध्यम से भी लेनदेन के लिए तैयार किया गया. खाते में मुनाफे की रकम दिखाए जाने के बाद पीड़ित को और अधिक राशि निवेश करने के लिए प्रेरित किया गया.

पीड़ित ने शिकायत में बताया कि भरोसा होने के बाद उसने अलग-अलग बैंक खातों और यूपीआई के माध्यम से आरोपियों द्वारा बताए गए खातों में रकम ट्रांसफर की. इसमें बैंक ऑफ इंडिया के सहरसा, बिहार स्थित खाते में 2 लाख रुपये, बैंक ऑफ इंडिया के चेलाकारा, केरल स्थित खाते में 10 लाख और 8 लाख रुपये तथा मुंबई के अंधेरी क्षेत्र के एक बैंक खाते में 3.50 लाख रुपये भेजे गए. इसके अलावा विभिन्न यूपीआई खातों में भी रकम ट्रांसफर की गई.

निकासी की कोशिश पर मांगी वेरिफिकेशन फीस

शिकायत के मुताबिक 22 सितंबर को जब डॉ राकेश कुमार मिश्रा ने अपने ट्रेडिंग खाते से रकम निकालने का प्रयास किया तो निकासी रोक दी गई. इसके बाद उन्हें बताया गया कि रकम निकालने के लिए वेरिफिकेशन चैनल फीस जमा करनी होगी और यह प्रक्रिया भारतीय रिजर्व बैंक के दिशा-निर्देशों के तहत जरूरी है. पीड़ित ने जब इसके संबंध में आरबीआई की गाइडलाइन अथवा पत्र मांगा तो उसे कथित तौर पर एक पत्र भेजा गया. जांच कराने पर वह पत्र फर्जी पाया गया.

इसके बाद पीड़ित ने साइबर हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क कर घटना की जानकारी दी. शिकायतकर्ता के अनुसार सितंबर माह में अलग-अलग तारीखों पर किए गए बैंक और यूपीआई लेनदेन को मिलाकर उसने कुल 25 लाख 66 हजार 900 रुपये आरोपियों द्वारा बताए गए खातों में जमा किए.

पुलिस ने आवेदन के अवलोकन के बाद प्रथम दृष्टया धोखाधड़ी का अपराध पाए जाने पर रेशमी गुप्ता और सुरेश चौहान के खिलाफ अपराध दर्ज कर लिया है. मामले में आरोपियों के साथ-साथ जिन बैंक खातों और यूपीआई माध्यमों में रकम ट्रांसफर की गई है, उनके धारकों की भूमिका की भी जांच की जा रही है.

ये खबर भी जरूर पढ़ेंः ‘जो जटिल थे, उन्हें भी कांग्रेस में वापस लाने पर विचार करेगी अनुशासन समिति…’, पूर्व मंत्री अमरजीत भगत का बड़ा बयान

ज़रूर पढ़ें