‘अनफिनिश्ड’ कहानी: …रीढ़ की हड्डी के ट्यूमर से लेकर स्टूडियो की लाइटों तक, रसिका पांडे ने हर चुनौती को बनाया अपनी जीत की सीढ़ी
रायपुर. क्रिएटिविटी सिर्फ किसी तैयार मास्टरपीस का नाम नहीं है, बल्कि उन सवालों, ठोकरों, नाकामियों और बदलावों का सफर है जो किसी इंसान को तराशते हैं. रायपुर के सत्यसाईं ऑडिटोरियम में आयोजित TEDxAAFT के मंच पर जब विस्तार न्यूज की सीनियर एंकर और जानी-मानी ब्रॉडकास्ट जर्नलिस्ट रसिका पांडे ने माइक संभाला, तो हॉल में बैठे हर शख्स को लगा कि यह सिर्फ एक स्पीच नहीं, बल्कि संघर्ष और जिद की ऐसी कहानी है जो हर युवा को सोचने पर मजबूर कर दे. (Rasika Pandey TEDx Unfinished story)
“Unfinished -The Beauty of Becoming” थीम पर आधारित इस कार्यक्रम में रसिका ने अपनी जिंदगी के उन तीन पड़ावों और फेज का जिक्र किया, जिन्होंने उन्हें एक साधारण लड़की से आज छत्तीसगढ़ और देश के मीडिया जगत की एक जानी-पहचानी आवाज बना दिया.
फेज 1: ग्लैमसर और टीवी के शौक से लेकर, ‘कॉन्टेंट एडिटर’ से ‘एंकर’ तक का सफर
शहडोल (मध्य प्रदेश) की गलियों से निकलकर टीवी स्क्रीन तक पहुंचने का सपना देखने वाली रसिका के लिए रास्ता कभी सीधा नहीं था. बचपन में डिबेट कॉम्पिटिशन का शौक और कैमरे के प्रति एक अलग सा आकर्षण था. शुरुआत में हर आम लड़की की तरह एक्टिंग और ग्लैमर का चस्का था, लेकिन धीरे-धीरे समझ आ गया कि जर्नलिज्म ही उनका असली रास्ता है. (Rasika Pandey TEDx Unfinished story)
लेकिन घर वालों की अपनी चिंताएं थीं. माता-पिता चाहते थे कि मध्य प्रदेश के मुकाबले छत्तीसगढ़ ज्यादा से सुरक्षित और बेहतर ठिकाना है. परिवार की रजामंदी के लिए उन्होंने बीए (इंग्लिश ऑनर्स विद जर्नलिज्म) का कोर्स सिर्फ इसलिए चुना ताकि माता-पिता की नजर में एक ‘सेफ करियर बैकअप’ तैयार रहे. किस्मत ने पलटी खाई और साल 2018 की जुलाई में उनका चयन ईटीवी भारत (रायपुर) में बतौर इंग्लिश कॉन्टेंट एडिटर के रूप में हुआ. लेकिन जब उन्होंने ऑफिस जॉइन किया, तो उन्हें हिंदी डेस्क पर काम करने को कह दिया गया. अंग्रेजी जर्नलिज्म की सीट न मिलने से निराशा जरूर हुई, लेकिन रसिका ने इसे अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया. इसके बाद 2019 में छत्तीसगढ़ के एक अन्य निजी न्यूज चैनल और फिर 2022 में नोएडा (दिल्ली) के बड़े मीडिया घरानों का रुख किया. नोएडा के उस ‘कंफर्ट जोन’ को छोड़कर वापस रायपुर लौटना और एक नए चैनल से जुड़ना एक बड़ा रिस्क था, लेकिन इसी रिस्क ने उन्हें आज TEDx के इस मंच तक पहुंचा दिया.

फेज 2: 60-40 का वह गणित, जब जिंदगी ने दिया सबसे बड़ा इम्तिहान
रसिका की जिंदगी का सबसे खौफनाक और टर्निंग पॉइंट साल 2017 में आया, जब वह अपनी कॉलेज की पढ़ाई के सिलसिले में रायपुर आई थीं. सब कुछ ठीक चल रहा था, तभी अचानक उन्हें स्पाइन ट्यूमर (Spine Tumor) होने का पता चला. डॉक्टरों ने जो रिपोर्ट दी, वह किसी भी नौजवान के पैरों तले जमीन खिसकाने के लिए काफी थी. मेडिकल आंकड़ों के मुताबिक 60 प्रतिशत चांस था कि वह ठीक नहीं होंगी, और सिर्फ 40 प्रतिशत उम्मीद बची थी.
लेकिन रसिका ने हिम्मत नहीं हारी. उन्होंने कहा, चूंकि मेरे पास कोई दूसरा ऑप्शन नहीं था, इसलिए मैंने डरने के बजाय उस 40% उम्मीद (Hope) को चुना. कुदरत का करिश्मा देखिए कि जिस हैदराबाद शहर में साल 2017 में उनकी सर्जरी हुई थी, उसी शहर ने साल 2018 में ईटीवी के जरिए उन्हें उनकी जिंदगी की पहली नौकरी दी. जिस पल को वह अपनी जिंदगी का ‘फुल स्टॉप’ मान बैठी थीं, असल में वह एक बिल्कुल नई और खूबसूरत शुरुआत थी.
फेज 3: ‘फेस देखकर एंकर बनी है’ कहने वालों को दिया अपने काम से जवाब
आज टीवी स्क्रीन पर बेबाकी से राजनीति और मुद्दों पर डिबेट करने वाली रसिका के लिए यह मुकाम ताने सुनकर हासिल हुआ है. जब उन्होंने टीवी की दुनिया में कदम रखा, तो आलोचकों ने तीखे तीर चलाए. (Rasika Pandey TEDx Unfinished story)
लोगों ने यहां तक कहा- “ये तो ढंग से बोल भी नहीं पाती, बच्ची जैसी दिखती है, भला यह पॉलिटिकल एंकरिंग कैसे कर पाएगी?” “इसे तो सिर्फ चेहरा देखकर एंकर बना दिया गया है.” लेकिन इन तानों ने रसिका को तोड़ने के बजाय अंदर से और मजबूत कर दिया. उनका मानना है कि “जिंदगी में आलोचक होना बहुत जरूरी है, वे कहती है कि हीरा भी तभी चमकता है जब उसे तराशा जाए.”
जब कोई बार-बार कहता है कि “तुम यह नहीं कर पाओगी”, तो अंदर से एक आवाज गूंजती है-“नहीं, मैं यह करके दिखाऊंगी”
सेफ जोन से बाहर निकलने का साहस
जी-न्यूज और नोएडा के बड़े प्लेटफॉर्म्स को छोड़कर वापस रायपुर लौटना और विस्तार न्यूज के साथ जुड़ना उनके करियर का एक और बड़ा रिस्क था. चैनल लॉंच होने में शुरुआती दो महीने की देरी ने उन्हें अंदर से डरा दिया था-कहीं रायपुर आकर उन्होंने कोई गलत फैसला तो नहीं ले लिया? लेकिन जब चैनल ऑन-एयर हुआ, तो पहले ही दिन से उन पर बड़ी जिम्मेदारी थी. और उन्होंने साबित कर दिया कि रसिका पांडे कौन हैं.
अपने संबोधन के अंत में TEDx के इस ग्लोबल थॉट-शेयरिंग प्लेटफॉर्म पर रसिका ने बहुत ही मार्मिक बात कही… “मैं रसिका पांडे हूं, और मैं आज भी ‘अनफिनिश्ड’ हूं… क्योंकि मेरी ज़िंदगी और मेरी जर्नी का असली सफर अभी बाकी है…”
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