अंबिकापुर के DHT केयर हॉस्पिटल में नर्सिंग होम एक्ट की टीम की कार्रवाई, कई गंभीर खामियां मिलीं, डॉक्टर नदारद

Ambikapur News: DHT केयर हॉस्पिटल में नर्सिंग होम एक्ट के तहत प्रशासनिक टीम ने जांच कार्रवाई की. कलेक्टर के निर्देश पर गठित पांच सदस्यीय टीम ने अस्पताल का निरीक्षण किया, जहां कई गंभीर अनियमितताएं सामने आईं.
dht care hospital

डीएचटी केयर हॉस्पिटल

Ambikapur News: शहर में स्थित DHT केयर हॉस्पिटल में नर्सिंग होम एक्ट के तहत प्रशासनिक टीम ने जांच कार्रवाई की. कलेक्टर के निर्देश पर गठित पांच सदस्यीय टीम ने अस्पताल का निरीक्षण किया, जहां कई गंभीर अनियमितताएं सामने आईं.

अस्पताल में डॉक्टर नहीं मिले

जांच के दौरान टीम को अस्पताल में एक भी ड्यूटी डॉक्टर मौजूद नहीं मिला. वहीं, मरीजों का उपचार अनट्रेंड नर्सिंग कर्मचारियों द्वारा किए जाने की बात सामने आई. अस्पताल के रजिस्टरों की जांच में पाया गया कि अधिकांश अभिलेख अपडेट नहीं थे, अटेंडेंस रजिस्टर भी कई दिनों से अपडेट नहीं थी. अस्पताल में व्यवस्थाओं में भारी लापरवाही बरती जा रही थी.

अस्पताल के खिलाफ शिकायत मिली थी

निरीक्षण के दौरान नर्सिंग होम एक्ट की टीम के पहुंचने के बाद डॉ. मनोज सिंह अस्पताल पहुंचे, लेकिन कर्मचारियों के अटेंडेंस रजिस्टर में उनका नाम दर्ज नहीं मिला. अस्पताल के संबंध में झोलाछाप चिकित्सकों एवं सरकारी अस्पताल के डॉक्टरों द्वारा इलाज किए जाने की शिकायत भी प्राप्त हुई थी, जिसके आधार पर यह जांच की गई.

जांच के दौरान अस्पताल परिसर में लगाए गए सरकारी अस्पताल के चिकित्सक डॉ. अशोक तिर्की के होर्डिंग को भी हटवाया गया. टीम ने अस्पताल प्रबंधन को व्यवस्थाएं सुधारने और नियमों का पालन करने की सख्त चेतावनी दी.

ये भी पढ़ें: अंबिकापुर में खिड़की तोड़ी और दीवार फांदकर भागे 11 बाल कैदी, हत्या और दुष्कर्म के आरोपी

नोडल अधिकारी ने क्या कहा?

नर्सिंग होम एक्ट के नोडल अधिकारी पी.के. सिन्हा ने बताया कि निरीक्षण में कई कमियां सामने आई हैं. संबंधित दस्तावेजों और तथ्यों की जांच के बाद नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी. उन्होंने बताया कि अस्पताल में सरकारी डॉक्टर अशोक टोप्पो का बोर्ड लगा हुआ था जिस टीम के द्वारा हटवाया गया क्योंकि सरकारी अस्पताल के डॉक्टर निजी अस्पतालों में ड्यूटी नहीं कर सकते हैं.

इसके अलावा उन्होंने यह भी जानकारी दी की अस्पताल में बड़े स्तर पर गड़बड़ी पाई गई है. एक सप्ताह के भीतर गड़बड़ी पर जवाब देने के लिए अस्पताल को नोटिस जारी किया जा रहा है और संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर अस्पताल का पंजीयन रद्द किया जाएगा.

ज़रूर पढ़ें