Surguja: कांग्रेस के ट्रेनिंग कैंप में CM चेहरे का खुलासा! भूपेश-बाबा की दूरी मिटाने की कोशिश या 2028 की तैयारी?
भूपेश बघेल और टी.एस. बाबा
Chhattisgarh Congress: छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव भले ही अभी करीब दो साल दूर हों, लेकिन कांग्रेस ने 2028 की तैयारी का बिगुल फूंक दिया है. अंबिकापुर में आयोजित तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम ने कांग्रेस की संगठनात्मक तैयारियों के साथ-साथ पार्टी के भीतर चल रही सियासी हलचल को भी सामने ला दिया. खासकर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और टीएस सिंहदेव की मुलाकात ने राजनीतिक चर्चाओं को तेज कर दिया है.
सरगुजा में कांग्रेस के लिए चुनौती इसलिए भी बड़ी है क्योंकि 2023 के विधानसभा चुनाव में संभाग की सभी 14 सीटों पर पार्टी को हार का सामना करना पड़ा था. ऐसे में कांग्रेस अब संगठन को मजबूत करने के साथ अपने प्रमुख नेताओं के बीच बेहतर तालमेल बनाने की कोशिश करती नजर आ रही है.
चाय-कॉफी पर हुई सियासी मुलाकात
अंबिकापुर के प्रशिक्षण कार्यक्रम में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज और विधानसभा नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत समेत कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे. लेकिन पूरे कार्यक्रम में सबसे ज्यादा चर्चा भूपेश बघेल के टीएस सिंहदेव के आवास पहुंचने की रही.
भूपेश बघेल और टीएस सिंहदेव के बीच राजनीतिक मतभेदों की चर्चाएं छत्तीसगढ़ की सियासत में लंबे समय से होती रही हैं. ऐसे में भूपेश बघेल का सिंहदेव के आवास पहुंचना और दोनों नेताओं का आमना-सामना होना अपने आप में राजनीतिक संदेश माना गया. मुलाकात को लेकर सामने आई जानकारी के अनुसार, भूपेश बघेल ने खुद सिंहदेव से चाय-कॉफी के लिए मिलने की बात कही और पूछा कि वे तपस्या जाएं या कोठीघर. सिंहदेव ने उन्हें कोठीघर आने के लिए कहा.
भूपेश बघेल आवास पहुंचे
इसके बाद बघेल उनके आवास पहुंचे और सिंहदेव ने उनका स्वागत किया. इतना ही नहीं, भूपेश बघेल ने सरगुजा प्रवास के दौरान सिंहदेव समर्थक माने जाने वाले नेताओं और उनके परिवारों से भी मुलाकात की. यानी अंबिकापुर का यह दौरा सिर्फ कांग्रेस के प्रशिक्षण कार्यक्रम तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पार्टी के दो प्रमुख नेताओं के बीच रिश्तों को लेकर भी कई राजनीतिक संकेत छोड़ गया.
सिंहदेव बोले- हमारे पारिवारिक रिश्ते हैं
जब टीएस सिंहदेव से भूपेश बघेल के साथ उनके रिश्तों और कथित राजनीतिक दूरी को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने मतभेद की चर्चाओं को खारिज कर दिया. सिंहदेव ने कहा कि वे भी भूपेश बघेल के घर जाते हैं और उनके परिवार के साथ उनके पारिवारिक संबंध हैं. सिंहदेव के इस बयान के बाद अब सवाल यह है कि क्या कांग्रेस के दोनों बड़े नेताओं के बीच राजनीतिक समीकरणों को लेकर जो चर्चाएं होती रही हैं, उन्हें पीछे छोड़कर पार्टी 2028 के चुनाव की तैयारी में एकजुटता का संदेश देना चाहती है?
CM चेहरे पर सवाल…दीपक बैज ने गिना दिए चार नाम
प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस की भविष्य की राजनीति का एक और पहलू सामने आया. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज से सवाल किया गया कि यदि कांग्रेस अगली बार सरकार बनाती है तो मुख्यमंत्री कौन बनेगा? इस सवाल के जवाब में दीपक बैज ने अपने आसपास बैठे नेताओं की ओर इशारा करते हुए चरणदास महंत, टीएस सिंहदेव, भूपेश बघेल और ताम्रध्वज साहू के नाम गिनाए. बैज के इस बयान के बाद टीएस सिंहदेव ने भी मजाकिया अंदाज में कहा कि चार नाम तो गिना दिए गए, लेकिन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने अपना नाम नहीं गिनाया. उन्होंने कहा कि वे खुद प्रदेश अध्यक्ष हैं और प्रोटोकॉल के हिसाब से मुख्यमंत्री तो उन्हें बनना चाहिए.
मुख्यमंत्री पद को लेकर नेताओं के इन बयानों ने छत्तीसगढ़ कांग्रेस के भीतर 2028 के संभावित नेतृत्व को लेकर चर्चा जरूर तेज कर दी है. हालांकि, इनमें से किसी भी नाम को कांग्रेस की ओर से मुख्यमंत्री पद का आधिकारिक उम्मीदवार घोषित नहीं किया गया है.
सरगुजा की 14 सीटों पर कांग्रेस का बड़ा दावा
प्रशिक्षण कार्यक्रम के बाद दीपक बैज ने सरगुजा की सभी 14 विधानसभा सीटों पर कांग्रेस की जीत का दावा किया. उन्होंने कहा कि आगामी चुनाव में कांग्रेस सभी सीटों पर जीत दर्ज करेगी और बीजेपी को एक भी सीट नहीं मिलेगी. यह दावा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि 2023 में कांग्रेस सरगुजा संभाग की सभी 14 सीटें हार गई थी. ऐसे में कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपनी खोई हुई राजनीतिक जमीन वापस हासिल करने की है.
बीजेपी ने साधा निशाना
कांग्रेस के प्रशिक्षण कार्यक्रम को लेकर बीजेपी ने भी हमला बोला. अंबिकापुर विधायक और कैबिनेट मंत्री राजेश अग्रवाल ने कांग्रेस के प्रशिक्षण कार्यक्रम को बीजेपी के प्रशिक्षण कार्यक्रम की नकल बताया. वहीं स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कांग्रेस के सत्ता में वापसी के दावे और मुख्यमंत्री पद को लेकर शुरू हुई चर्चा पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस भले ही सरकार बनाने का सपना देख रही हो, लेकिन 2047 तक छत्तीसगढ़ में बीजेपी का कब्जा रहेगा.
तस्वीरें बदलीं तो क्या सियासी समीकरण भी बदलेंगे?
अंबिकापुर में कांग्रेस का प्रशिक्षण कार्यक्रम अब सिर्फ संगठनात्मक कार्यक्रम नहीं रह गया है. इस कार्यक्रम से दो बड़े राजनीतिक संदेश निकलते दिखाई दिए, पहला कांग्रेस सरगुजा में अपनी खोई जमीन वापस हासिल करने की तैयारी में जुट गई है और दूसरा पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के बीच बेहतर तालमेल बनाने की कोशिशें भी दिखाई दे रही हैं. भूपेश बघेल का टीएस सिंहदेव के घर पहुंचना, दोनों नेताओं की मुलाकात और इसके बाद मुख्यमंत्री पद को लेकर सामने आए बयान ने 2028 की राजनीति की शुरुआती तस्वीर पर चर्चा जरूर शुरू कर दी है.