19 साल के अथर्व ने बिना वकील सुप्रीम कोर्ट में केस लड़कर जीत दर्ज की, NEET पास होने के बाद भी नहीं मिला था एडमिश

अथर्व चतुर्वेदी की पारिवारिक वित्तीय स्थिति बहुत अच्छी नहीं है. इस कारण वो आर्थिक रूप से कमजोर(EWS) की कैटगरी में आता है. अथर्व ने दो बार एग्जाम पास किया. नीट एग्जाम में अथर्व के 530 नंबर थे. लेकिन जब एडमिशन शुरू हुए तो किसी भी प्राइवेट कॉलेज में अथर्व को ईडब्लयूएस के तहत एडमिशन नहीं मिला.
A 19 year old boy won the case in the Supreme Court without a lawyer.

19 साल के लड़के ने बिना वकील के ही सुप्रीम कोर्ट में केस जीत लिया.

Atharva Chaturvedi in the Supreme Court: मध्य प्रदेश में जबलपुर के रहने वाले एक युवक ने जबरदस्त आत्मविश्वास और संघर्ष की मिसाल पेश की है. 12वीं पास छात्र अथर्व चतुर्वेदी ने बिना वकील के ही सुप्रीम कोर्ट में केस लड़ा और युवक ये केस जीत भी गया. रअसल अथर्व ने दो बार नीट (NEET) परीक्षा पास की थी. लेकिन दो बार एग्जाम पास करने के बावजूद अथर्व को मेडिकल कॉलेज में एडमिशन नहीं मिला. जिसके खिलाफ उसने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और आखिरकार अथर्व के आत्मविश्वास ने उसे जीत दिलवाई.

EWS कोटे के बावजूद नहीं मिली सीट

अथर्व चतुर्वेदी की पारिवारिक वित्तीय स्थिति बहुत अच्छी नहीं है. इस कारण वो आर्थिक रूप से कमजोर(EWS) की कैटगरी में आता है. अथर्व ने दो बार एग्जाम पास किया. नीट एग्जाम में अथर्व के 530 नंबर थे. लेकिन जब एडमिशन शुरू हुए तो किसी भी प्राइवेट कॉलेज में अथर्व को ईडब्लयूएस के तहत एडमिशन नहीं मिला. राज्यों में प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में ईडब्ल्यूएस स्टूडेंट्स के लिए कोई भी स्पष्ट नीति नहीं है. इसके कारण काफी कोशिशें करने के बावजूद अथर्व चतुर्वेदी को कहीं भी एडमिशन नहीं मिला.

पुराने केस देखकर सुप्रीम कोर्ट में की बहस

रात-दिन दौड़ने और काफी कोशिशों के बावजूद जब अथर्व को कहीं भी मेडिकल सीट नहीं मिली तो उसने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया. लेकिन हाई कोर्ट में जब उसने अर्जी लगाई तो वहां उसकी बात नहीं सुनी गई. इसके बाद उसने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया. अथर्व के पिता भी वकील हैं. अथर्व के पिता मनोज चतुर्वेदी ने बताया कि अथर्व ने ऑनलाइन हियरिंग सुनकर ही खुद से तैयारी की. अथर्व ने सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट से एसएलपी का प्रारूप डाउनलोड किया और खुद ही एसएलपी ड्राफ्ट किया.

ऑनलाइन सुनवाई के दौरान अथर्व जुड़ा और उसने सुप्रीम कोर्ट के जजों से कहा कि 10 मिनट दे दीजिए. इसके बाद अथर्व ने अपनी पूरी बात रखते हुए बताया कि वो 12वीं का छात्र था और डॉक्टर बनना चाहता था. वहीं अथर्व की दलीलें सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत (Article 142 of the Constitution of India) अपनी असाधारण शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए अथर्व को एडमिशन देने का निर्देश दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने एनएमसी और मध्य प्रदेश सरकार को निर्देश दिया कि EWS वर्ग के पात्र छात्रों को 2025-26 सत्र के लिए प्रोविजनल MBBS एडमिशन दिया जाए.

साधारण लड़के ने कर दिया असाधारण काम!

अथर्व चतुर्वेदी एक साधारण परिवार से ताल्लुक रखते हैं. अथर्व की दुनिया किताबों, क्रिकेट और सपनों के बीच घूमती है. बस एक ख्वाब डॉक्टर बनने का है. लेकिन काफी मेहनत करने के बाद नियमों के दांवपेंच में उसका एडमिशन नहीं हो पा रहा था. लेकिन अपनी सूझबूझ और आत्मविश्वास से उसने बिना वकील के ही सुप्रीम कोर्ट में केस जीत लिया.

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