रियल एस्टेट कारोबार की आड़ में जुटाए 2000 करोड़, ED ने की बड़ी कार्रवाई 182 बैंक खाते फ्रीज
विशाखापट्टनम/हैदराबाद। करोड़ों रुपए के चिटफंड घोटाले की जांच के सिलसिले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) के भुवनेश्वर जोनल कार्यालय ने बड़ी कार्रवाई की है। ईडी की टीम ने 5 अगस्त 2026 को धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 की धारा 17 के तहत विशाखापट्टनम और हैदराबाद में पांच आवासीय एवं व्यावसायिक परिसरों पर तलाशी अभियान चलाया। ये ठिकाने वेलफेयर बिल्डिंग्स एंड एस्टेट्स प्राइवेट लिमिटेड (डब्ल्यूबीईपीएल) तथा उसके निदेशकों मल्ला विजय प्रसाद, वराह रामकृष्ण सत्य श्रीनिवास राव अल्ला और अन्य से जुड़े बताए गए हैं।
तलाशी के दौरान ईडी ने 1.01 करोड़ रुपए की नकदी जब्त की। इसके अलावा कंपनी, उसके निदेशकों और संबंधित संस्थाओं से जुड़े विभिन्न चल-अचल संपत्तियों के दस्तावेज, डिजिटल उपकरण और अन्य आपत्तिजनक सामग्री भी बरामद की गई। जांच एजेंसी ने डब्ल्यूबीईपीएल और उसके निदेशकों से संबंधित 182 बैंक खातों को फ्रीज करने के आदेश जारी किए हैं। इसके साथ ही छह महंगी लग्जरी गाड़ियों पर भी कार्रवाई की गई है।
रियल एस्टेट कारोबार की आड़ में जुटाए 2000 करोड़ रुपए
ED के अनुसार, कंपनी के निदेशकों और प्रबंध निदेशक ने रियल एस्टेट कारोबार की आड़ में बड़े पैमाने पर लोगों से धन जमा कराया। जांच में सामने आया है कि कंपनी ने वैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन करते हुए 2000 करोड़ रुपए से अधिक की राशि जुटाई। जांच एजेंसी का आरोप है कि कंपनी ने नए निवेशकों से जुटाई गई रकम का इस्तेमाल पुराने निवेशकों को भुगतान करने में किया। इसके अलावा निवेशकों की रकम को अन्य उद्देश्यों और व्यक्तिगत लाभ के लिए भी डायवर्ट किया गया। कंपनी के वित्तीय विवरणों में कथित तौर पर हेरफेर कर जमा की गई रकम को छिपाने की कोशिश की गई। जमीन के लेन-देन में भी वास्तविक कीमत को कम दर्शाकर वैधानिक दायित्वों से बचने की कोशिश किए जाने की बात जांच में सामने आई है।
कई राज्यों के हजारों निवेशक हुए प्रभावित
ED की अब तक की जांच में पता चला है कि कंपनी ने ओडिशा, पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड और आंध्र प्रदेश सहित कई राज्यों के हजारों निवेशकों से कथित तौर पर अनधिकृत तरीके से रकम जुटाई। निवेशकों को विशाखापट्टनम में जमीन उपलब्ध कराने का भरोसा देकर विभिन्न योजनाओं के माध्यम से पैसा लिया गया। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि कंपनी ने देश के अलग-अलग राज्यों में संचालित अपनी शाखाओं को बंद कर दिया, जिसके बाद बड़ी संख्या में निवेशकों को कथित तौर पर आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा।
कई एजेंसियों की FIR और चार्जशीट के आधार पर जांच
ईडी ने इस मामले में आर्थिक अपराध शाखा, भुवनेश्वर, केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई), एसीबी, धनबाद, ओडिशा पुलिस तथा गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय (एसएफआईओ) की ओर से दर्ज FIR, दाखिल आरोपपत्रों और शिकायत के आधार पर धनशोधन मामले की जांच शुरू की थी। ईडी ने कहा है कि मामले में जांच अभी जारी है और आगे भी संपत्तियों तथा वित्तीय लेन-देन से जुड़े तथ्यों की पड़ताल की जा रही है।
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