‘अब भरोसा बचाने का एक ही उपाय,पूरे मैंनेजमेंट में बदलाव…’, राम मंदिर चंदा विवाद पर बोले नृपेंद्र मिश्र

Ram Mandir Chanda Chori: राम मंदिर में चढ़ावे और दान प्रबंधन को लेकर उठे विवाद के बीच नृपेंद्र मिश्र ने व्यवस्था में गंभीर खामियों की ओर इशारा किया. उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं के विश्वास को बनाए रखने के लिए पूरे प्रबंधन ढांचे को नए सिरे से व्यवस्थित करना जरूरी है.
Ram Mandir Chanda Chori

चंदा चोरी पर क्‍या बोले नृपेंद्र मिश्र

Ayodhya Ram Mandir Nripendra Mishra: राम मंदिर में चढ़ावे और दान से जुड़े विवाद के बाद राम जन्मभूमि निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रने मीड‍िया से बातचीत की है. इसमें उन्‍होंने मंदिर की मौजूदा व्यवस्थाओं पर और चल रहे पूरे विवाद पर अपनी बात रखी है.

बातचीत में उन्होंने कहा कि मंदिर परिसर के प्रबंधन को ज्यादा प्रोफेशनल और जवाबदेह बनाने की जरूरत है. उनके अनुसार मौजूदा व्यवस्था काफी हद तक अनौपचारिक तरीके से काम कर रही है. जिससे निगरानी और जवाबदेही दोनों बुरी तरह से प्रभावित हुई हैं.

नृपेंद्र मिश्र ने कहा कि राम मंदिर में इस समय बड़ी संख्या में कर्मचारी और स्वयंसेवक काम कर रहे हैं, लेकिन उनके काम और जिम्मेदारियों को लेकर स्पष्ट लिखित व्यवस्था नहीं बनाई गई. वह सभी अपनी मर्जी से ही काम कर रहे हैं. ऐसे में किसी भी लेवल पर गड़बड़ी होने पर जवाबदेही तय करना मुश्किल हो जाता है.

नियमों का नहीं किया गया पालन- मिश्रा

नृपेंद्र मिश्र ने यह भी बताया कि दान और चढ़ावे के प्रबंधन के लिए पहले से डिटेल दिशा-निर्देश और मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) बनाई गई थी. इन नियमों में यह तक तय था कि गिनती करने वाले कर्मचारी किस प्रकार की वर्दी पहनेंगे, उनकी जांच कैसे होगी और पूरी प्रक्रिया किस निगरानी में चलेगी. लेकिन, उपलब्ध जानकारियों के आधार पर उन्हें लगता है कि इन नियमों का पूरी तरह पालन नहीं किया गया.

देखरेख में हुई सबसे बड़ी चूक- मिश्रा

नृपेंद्र मिश्र की मानें तो मंदिर में सबसे बड़ी चूक निगरानी व्यवस्था में हुई है. श्रद्धालु मंदिर में पूरी आस्था के साथ नकदी, गहने और अन्य बहुमूल्य वस्तुएं दान करते हैं. ऐसे में उनकी सुरक्षा और सही लेखा-जोखा सुनिश्चित करना प्रबंधन की जिम्मेदारी है.

 उन्होंने कहा कि दान पेटियों से निकलने वाली नकदी, सिक्कों और कीमती धातुओं के अलग-अलग हिसाब-किताब में कमियां नजर आती हैं. इसके साथ ही बैंक और ट्रस्ट की तरफ से मौजूद निगरानी तंत्र भी पर्याप्त प्रभावी नहीं दिखा है. यही वजह है कि इस तरह की घटना सामने आई है.

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