मंत्री के सामने ही ₹50 हजार की रिश्वत मांगने का आरोप, बिहार में मचा हड़कंप! सरकारी तंत्र पर फिर लगा दाग
फरयादी और बिहार सरकार के मंत्री
Bihar corruption: देश में भ्रष्टाचार के हर रोज हजारों मामले सामने आते हैं. बड़ी संख्या में लोग रिश्वतखोर अधिकारी-कर्मचारियों को ट्रैप भी कराते हैं. इसके बाद भी भ्रष्टचार और रिश्वतखोरी का खेल खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है. बिहार में भी कुछ इसी तरह का मामला सामने आया है, जिसने पूरे भ्रष्ट सिस्टम की पोल खोल कर रख दी है.
सरकारी योजनाओं का लाभ पाने के लिए आम लोगों को आज भी रिश्वत जैसी समस्या का सामना करना पड़ रहा है. सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि रिश्वत मांगने का आरोप उस समय सामने आया, जब शिकायत की सच्चाई की जांच स्वयं विभागीय मंत्री की मौजूदगी में की जा रही थी.
मंत्री ने दिए सस्पेंड करने के आदेश
बताया गया कि अनुदान की राशि जारी करने के बदले कर्मचारी ने 50 हजार रुपये की मांग की, जिसके बाद तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए गए. जब कर्मचारी युवक से रिश्वत के पैसे मांग रहा था, उसी समय यह पूरी बातचीत राज्य के मंत्री लखेंद्र पासवान भी सुन रहे थे.फोन पर ही डाटा ऑपरेटर रिश्वत मांगने लगा. यह सुनते ही मंत्री नाराज हो गए। उन्होंने तुरंत सीतामढ़ी के जिला कल्याण पदाधिकारी को फोन कर पूछा, चंदन कुमार कौन है? मंत्री ने निर्देश देते हुए कहा, “संबंधित ऑपरेटर को तत्काल प्रभाव से एक घंटे के भीतर सस्पेंड करें.
घटना ने खड़े किए कई सवाल
यह घटना केवल एक कर्मचारी की कथित करतूत नहीं, बल्कि सरकारी व्यवस्था में व्याप्त उस मानसिकता की ओर इशारा करती है, जिसमें कई जरूरतमंद लोगों को अपने अधिकार के लिए भी पैसे देने का दबाव झेलना पड़ता है. सरकार की योजनाएं गरीब और वंचित वर्ग तक बिना किसी बाधा के पहुंचनी चाहिए, लेकिन यदि बीच के स्तर पर भ्रष्टाचार हावी हो जाए तो पूरी व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो जाते हैं.
हालांकि इस मामले में त्वरित कार्रवाई की गई और संबंधित कर्मचारी के खिलाफ सख्त कदम उठाने के निर्देश दिए गए. साथ ही वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका की जांच की बात भी कही गई। इससे यह संदेश जाता है कि शिकायतों को गंभीरता से लिया जाए तो भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाया जा सकता है।
कई मामले आ चुके सामने
बिहार में पिछले कुछ महीनों के दौरान भी रिश्वतखोरी के कई मामले सामने आए हैं, जिनमें सतर्कता एजेंसियों ने अधिकारियों और कर्मचारियों को रंगे हाथ गिरफ्तार किया है. इससे स्पष्ट होता है कि भ्रष्टाचार की चुनौती अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है.
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