महिलाओं के बाद अब युवाओं को भी नकदी के सहारे साधेगी BJP!
नई दिल्ली. एक दशक से कल्याणकारी और नकदी योजनाओं के केंद्र में मुख्य रूप से महिलाओं के रहने के बाद, अब राजनीतिक दलों ने देश के युवाओं पर फोकस करना शुरू कर दिया है. ‘जेन जी’ आंदोलन के वैश्विक और स्थानीय प्रभावों से चौकन्ने सियासी दल अब करीब एक चौथाई आबादी को लुभाने के लिए नकदी (cash schemes) और आर्थिक लाभ की योजनाओं का दायरा बढ़ाने पर विचार कर रहे हैं. इसी कड़ी में भारतीय जनता पार्टी (BJP)ने आगामी चुनावी राज्यों के संगठनात्मक और प्रशासनिक ढांचे को महिलाओं के साथ-साथ युवाओं को भी योजनाओं के केंद्र में रखने के निर्देश दिए हैं. पार्टी ने इसके लिए रोजगार, कौशल विकास और उद्यमिता का एक वैकल्पिक मॉडल तैयार करने को कहा है.
चुनावी राज्यों में युवा मतदाताओं का गणित
- विभिन्न चुनावी राज्यों में 18 से 29 साल के आयुवर्ग के युवा मतदाताओं की हिस्सेदारी औसतन 20 फीसदी से अधिक दर्ज की गई है, जो किसी भी चुनाव के समीकरण को पलटने की ताकत रखते हैं:
- मणिपुर: 22%
- पंजाब: 21%
- उत्तर प्रदेश: 20%
- उत्तराखंड: 17.5%
- गोवा: 17%
- इस मजबूत हिस्सेदारी को देखते हुए सभी प्रमुख दल इस अहम वर्ग को अपने पाले में करने के लिए पूरी ताकत झोंक रहे हैं.
क्या योजना बना रही भाजपा
भाजपा शासित और चुनावी राज्यों में पहले से जारी बेरोजगारी भत्ते व अन्य सहायता राशि को बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है.उच्च शिक्षा के लिए शिक्षा ऋण (एजुकेशन लोन) की प्रक्रिया को बेहद आसान बनाने और प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए मुफ्त कोचिंग की सुविधा शुरू करने की तैयारी है.चुनावी राज्यों को इस साल के अंत तक सभी रिक्त सरकारी पदों को भरने के लिए युद्धस्तर पर अभियान चलाने और रिक्रूटमेंट प्रक्रिया को अंतिम रूप देने के निर्देश दिए गए हैं.
हालांकि केवल भाजपा ही नहीं, बल्कि अन्य दल भी इस प्रतिस्पर्धा में पीछे नहीं हैं. उदाहरण के तौर पर, पंजाब की आम आदमी पार्टी (आप) सरकार युवाओं के लिए स्टार्टअप्स पर कम ब्याज दरों पर ऋण उपलब्ध कराने और ओबीसी वर्ग के छात्रों की छात्रवृत्ति में वृद्धि करने जैसे लोकलुभावन कदमों पर तेजी से काम कर रही है.
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