अंदर की बात: मंत्री परिषद की बैठक के बाद कैबिनेट में फेरबदल की हलचल तेज, परफॉर्मेंस में सबसे निचले पायदान वाले 5 मंत्रियों की छुट्टी तय!

Big Cabinet Reshuffle Coming Soon: दिल्ली के राजनीतिक गलियारों में एक और चर्चा तेज है कि इस बार ख़ास तौर पर संगठन के फेरबदल में सिर्फ चेहरों की अदला-बदली नहीं होगी, बल्कि ‘जनरेशन शिफ्ट’ भी दिखाई दे सकता है.
PM Modi

मंत्री परिषद की बैठक के बाद कैबिनेट में फेरबदल की हलचल तेज

Five Ministers Likely To Exit: पीएम मोदी के तीसरे कार्यकाल का दो साल 9 जून को पूरा होने जा रहा है, लेकिन इस जश्न के बीच में केंद्रीय मंत्रिमंडल के भीतर कई मंत्रियों की धुकधुकी बढ़ गई है। गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई मंत्रिपरिषद की बैठक ने तो परिस्थिति और ज़्यादा साफ़ कर दिया है। लंबे अंतराल के बाद दिल्ली में हुई इस बैठक ने राजनीति में एक नई हलचल पैदा कर दी है. वैसे तो सरकारी स्तर पर इसे सामान्य समीक्षा बैठक बताया जा रहा है, लेकिन सत्ता के गलियारों से छनकर आ रही खबरें कुछ और ही कहानी बयान कर रही हैं. संकेत साफ हैं कि मोदी सरकार अब “मिड-टर्म करेक्शन मोड” में प्रवेश कर चुकी है और आने वाले महीनों में बड़ा राजनीतिक तथा संगठनात्मक फेरबदल देखने को मिलने वाला है.

सूत्रों के मुताबिक इस बार समीक्षा सिर्फ मंत्रालयों के कामकाज तक सीमित नहीं रही है। बल्कि, कई मंत्रालयों का ‘परफॉर्मेंस ऑडिट’ तैयार किया गया, जिसमें फाइल क्लियरेंस, पब्लिक ग्रिवांस, योजनाओं की मॉनिटरिंग और जमीनी मौजूदगी जैसे मानकों को आधार बनाया गया. चर्चा यहां तक है कि कुछ मंत्रालयों की ‘बॉटम-5’ सूची भी बनाई गई, जिसे लेकर सत्ता प्रतिष्ठान में बेचैनी बढ़ गई है.

नप सकते हैं 5 मंत्री

चर्चा यह भी है कि प्रधानमंत्री मोदी अब सिर्फ प्रशासनिक रिपोर्ट नहीं देख रहे, बल्कि राजनीतिक उपयोगिता और चुनावी प्रभाव को भी बराबरी से तौल रहे हैं. खासकर वे मंत्री जो अपने राज्यों में संगठनात्मक प्रभाव नहीं छोड़ पा रहे या जिनकी राजनीतिक पकड़ कमजोर मानी जा रही है, वे रडार पर बताए जा रहे हैं. सूत्रों का दावा है कि कैबिनेट रीशफल में 5 मौजूदा मंत्री नपने वाले हैं.

सत्ता से जुड़े सूत्र बताते हैं कि सरकार और संगठन दोनों स्तरों पर ‘सिंक मॉडल’ तैयार किया जा रहा है. यही वजह है कि कैबिनेट फेरबदल की चर्चाएं अब बीजेपी संगठन में संभावित बदलावों से जोड़कर देखी जा रही हैं. नीतीश नबीन के पार्टी अध्यक्ष बनने की संभावनाओं और संगठन में नई टीम की तैयारी को भी इसी बड़े रीसेट का हिस्सा माना जा रहा है.

2029 के चुनाव को देखते हुए किया जाएगा फेरबदल

दरअसल, बीजेपी अब अगले चुनावी चक्र की तैयारी में जुट चुकी है. बिहार, उत्तर प्रदेश, बंगाल और दक्षिण भारत में पार्टी की रणनीति को नए सिरे से धार देने की कोशिश चल रही है. ऐसे में यह माना जा रहा है कि सरकार में भी वही चेहरे मजबूत होंगे, जिनकी राजनीतिक उपयोगिता 2027 और 2029 की लड़ाइयों में सीधे काम आएगी.

सूत्रों का दावा है कि मंत्री परिषद की बैठक में कई मंत्रियों से उनके विभागीय काम के अलावा यह भी पूछा गया कि उन्होंने अपने संसदीय क्षेत्रों में कितना समय बिताया, संगठन के साथ उनका तालमेल कैसा है और योजनाओं की जमीनी मॉनिटरिंग कितनी हुई. ऐसे में यह संकेत देता है कि मोदी-शाह नेतृत्व अब केवल ‘दिल्ली आधारित प्रशासन’ नहीं, बल्कि ‘राजनीतिक डिलीवरी मॉडल’ चाहता है.

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दिल्ली के राजनीतिक गलियारों में एक और चर्चा तेज है कि इस बार ख़ास तौर पर संगठन के फेरबदल में सिर्फ चेहरों की अदला-बदली नहीं होगी, बल्कि ‘जनरेशन शिफ्ट’ भी दिखाई दे सकता है. पार्टी के भीतर अपेक्षाकृत युवा नेताओं को आगे लाने और कुछ पुराने चेहरों को संगठनात्मक भूमिकाओं में शिफ्ट करने की रणनीति पर काम शुरू हो चुका है.

हालांकि, सरकार की ओर से आधिकारिक तौर पर किसी फेरबदल की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन जिस तरह लगातार समीक्षा बैठकें, रिपोर्ट कार्ड और संगठनात्मक बदलावों की खबरें सामने आ रही हैं, उससे इतना तय माना जा रहा है कि मोदी सरकार 3.0 का अगला चरण ‘परफॉर्मेंस आधारित राजनीति’ का होगा और इस बार संदेश साफ है कि सिर्फ मंत्री होना काफी नहीं, असरदार मंत्री होना जरूरी है.

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