अब नहीं बना पाएंगे रील, केदारनाथ में कैमरा-मोबाइल ले जाने पर रोक, चार धाम यात्रा को लेकर सरकार का आदेश

Kedarnath Mandir Mobile Ban: अब श्रद्धालु बद्रीनाथ और केदारनाथ धाम में मोबाइल नहीं ले जा सकेंगे. सरकार ने मोबाइल ले जाने पर पूरी तरह से रोक लगा दी है.
Kedarnath Temple mobile ban

केदारनाथ मंदिर में अब मोबाइल नहीं ले जा सकेंगे श्रद्धालु

Kedarnath Temple: चारधाम यात्रा को लेकर उत्तराखंड सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. अब श्रद्धालु बद्रीनाथ और केदारनाथ धाम में मोबाइल नहीं ले जा सकेंगे. सरकार ने मोबाइल ले जाने पर पूरी तरह से रोक लगा दी है. प्रदेश सरकार ने मंदिरों की पवित्रता और मर्यादा बनाए रखने के लिए यह कदम उठाया है.

अक्सर देखा जाता है कि धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं का ध्यान दर्शन से ज्यादा रील बनाने और फोटो बाजी पर रहता है. जिसकी वजह से श्रद्धालु पूरी श्रद्धा और एकाग्रता के साथ दर्शन नहीं कर पाते और आए दिन विवाद की स्थिति बन जाती है. धार्मिक स्थलों पर शांति बनी रही, किसी भी प्रकार की विवाद की स्थिति न बने. इसके लिए सरकार ने गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के भीतर मोबाइल फोन ले जाने पर रोक लगा दी है.

बैठक में लिया गया फैसला

  • बता दें, चारधाम यात्रा शुरू होने वाली है, जिसको लेकर तैयारियां शुरू हो गई हैं. शनिवार को चारधाम यात्रा ट्रांजिट कैंप में गढ़वाल आयुक्त विनय शंकर पांडेय की अध्यक्षता में बैठक आयोजित की गई, जिसमें कई जिलाधिकारी और विभागीय अधिकारी भी मौजूद रहे. इस दौरान व्यवस्थाओं से लेकर हर पहलू पर बात की गई. इसी दौरान निर्णय लिया गया कि मोबाइल प्रतिबंधित रहेगा.
  • बैठक में निर्णय लिया गया कि बद्रीनाथ में सिंहद्वार से आगे मोबाइल नहीं ले जा सकेंगे. केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री धाम परिसरों में भी श्रद्धालु अपने साथ मोबाइल फोन नहीं रख पाएंगे. जिला प्रशासन श्रद्धालुओं के मोबाइल सुरक्षित रखने के लिए उचित व्यवस्था करेगा. इस बैठक में मोबाइल को लेकर आस्था और व्यवस्था दोनों का भरपूर ध्यान रखा गया है.

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चाक-चौबंध व्यवस्था के निर्देश

चारधाम यात्रा प्रबंधन को तैयारी शुरू करने के निर्देश दे दिए गए हैं. जिसके अनुसार सड़क, संचार और स्वास्थ्य सेवाओं को एक्टिव रहने लिए कहा गया है. सड़क मार्ग को दुरुस्त करने के लिए एनएच, एनएचआईडीसीएल, लोनिवि और बीआरओ को 31 मार्च तक का समय दिया गया है. श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी हो और उन्हें तुरंत ही स्वास्थ्य सेवा मिले. इसके लिए स्वास्थ्य विभाग को एक्टिव किया गया है. बैठक में निर्णय लिया गया कि डॉक्टरों की 15-15 दिन की रोटेशन ड्यूटी, विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती और एयर एंबुलेंस की व्यवस्था की जाए.

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