कांग्रेस को तगड़ा झटका, सबसे बड़ी पार्टी होने के बाद भी BJP का बना मेयर, चंद्रपुर नगर निगम में उद्धव गुट का ‘खेला’

Maharashtra Politics: महाराष्ट्र के चंद्रपुर नगर निगम में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, लेकिन इसके बावजूद मेयर नहीं बना सकी. जानिए वजह.
Chandrapur Nagar Nigam BJP Mayor

चंद्रपुर नगर निगम में कांग्रेस को बड़ा झटका, भाजपा ने बनाया अपना मेयर

Chandrapur Nagar Nigam: महाराष्ट्र के चंद्रपुर नगर निगम में चुनाव में सबसे ज्यादा कांग्रेस के उम्मीदवारों की जीत हुई. कांग्रेस का साथ देने के लिए शिवसेना (उद्धव गुट) सामने आई. जिसके बाद कांग्रेस बहुमत के आंकड़े के पार चली गई, लेकिन इसके बावजूद महापौर नहीं बना पाई. गुटबाजी से जूझ रही कांग्रेस को एक बार फिर बड़ा झटका लगा है. जानिए क्या है मामला?

महाराष्ट्र के चंद्रपुर नगर निगम में हाल ही में चुनाव हुए, जिसमें कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी और महापौर पद हासिल करने के काफी नजदीक थी. लेकिन यहां पर कांग्रेस की गुटबाजी एक बार फिर हावी हो गई. विजय वडेट्टीवार और प्रतिभा धनोरकर गुटों के बीच जमकर खींचतान हुई. जिसका भरपूर फायदा भाजपा ने उठाया. महापौर में दावा करने वाली कांग्रेस 1 वोट से पीछे रह गई.

कौन बना महापौर?

इस चुनाव में भले की कांग्रेस के सबसे ज्यादा पार्षद चुनाव जीते लेकिन महापौर बनाने में कांग्रेस कामयाब नहीं हो पाई. अंतिम समय में शिवसेना (उद्धव गुट) ने भाजपा को समर्थन कर दिया. भाजपा की संगीता खंडेकर को महापौर बनाया गया है, जबकि उपमहापौर शिवसेना (उद्धव गुट) के प्रशांत दानव को बनाया गया है. इस घटना ने एक बार फिर इंडिया गठबंधन और महा विकास अघाड़ी के गठबंधन पर सवाल खड़े कर दिए हैं.

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BJP का मेयर बनने के बाद क्या बोली कांग्रेस?

चंद्रपुर में भाजपा का मेयर बनने के बाद महाराष्ट्र कांग्रेस के अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने कहा कि इस चुनाव में खरीद-फरोख्त हुई है. इतना ही नहीं, उन्होंने इसके लिए शिवसेना (उद्धव गुट), ओवैसी की पार्टी AIMIM और वंचित बहुजन अघाड़ी को जिम्मेदार बताया है. सपकाल ने कहा कि कांग्रेस को शिवसेना (उद्धव गुट) के समर्थन मिलने की उम्मीद थी लेकिन उन्होंने अंतिम समय में भाजपा का साथ दिया. बता दें, इस नगर निगम चुनाव में 66 सीटें थीं. जिसमें कांग्रेस को 27 सीट, भाजपा को 23, शिंदे गुट को 6 और दो-तीन पार्टियों को 1-2 सीटें मिली थीं. लेकिन भाजपा ने कम पार्षदों के बावजूद अपना मेयर बना लिया. महापौर के चुनाव में कांग्रेस को 31 और भाजपा को 32 वोट मिले हैं.

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