‘युवाओं को गुमराह करने की कोशिश…’, बोले CJI सूर्यकांत- मेरी टिप्पणी को गलत तरीके से पेश किया गया
CJI सूर्यकांत
CJI Surya Kant: मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के दौरान की गई अपनी मौखिक टिप्पणियों को लेकर सफाई दी है. उन्होंने कहा कि उनकी बात को संदर्भ से हटाकर गलत तरीके से पेश किया गया और बाद में उसका इस्तेमाल देश के युवाओं को गुमराह करने के लिए किया गया. CJI ने सोशल मीडिया पर अदालती कार्यवाही के छोटे-छोटे वीडियो क्लिप बिना पूरे संदर्भ के वायरल किए जाने पर भी चिंता जताई.
टिप्पणी को लेकर CJI ने क्या कहा
डीडी न्यूज को दिए इंटरव्यू में CJI सूर्यकांत ने कहा कि उनकी टिप्पणी को जिस तरह पेश किया गया, वह वास्तविकता से अलग था. उन्होंने कहा कि जो बात उन्होंने कही ही नहीं, उसे इस तरह दिखाया गया जैसे वह उनकी कही हुई बात हो. CJI ने इसे बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि इसके पीछे युवाओं को गुमराह करने की कोशिश नजर आती है.
अधिकारों के साथ कर्तव्यों की भी याद दिलाई
CJI ने कहा कि सोशल मीडिया, प्रिंट मीडिया या किसी अन्य माध्यम से जुड़े लोगों के साथ-साथ आम नागरिकों के भी कुछ अधिकार हैं, लेकिन इन अधिकारों के साथ संवैधानिक कर्तव्य और जिम्मेदारियां भी जुड़ी हैं. उन्होंने कहा कि अधिकारों की बात करते समय हर व्यक्ति को अपने कर्तव्यों के निर्वहन की क्षमता और जिम्मेदारी को भी समझना चाहिए.
सद्भाव बनाए रखने की अपील
उन्होंने लोगों से समाज में सद्भाव बनाए रखने के लिए अपनी जिम्मेदारियों का ध्यान रखने और लगातार प्रयास करने की अपील की. CJI ने विशेष रूप से अदालती कार्यवाही के अंशों को बिना संदर्भ के सोशल मीडिया पर साझा किए जाने के असर को लेकर चिंता जाहिर की.
15 मई की सुनवाई के बाद शुरू हुआ विवाद
दरअसल, 15 मई 2026 को सुप्रीम कोर्ट में एक मामले की सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत की कथित टिप्पणी को लेकर विवाद खड़ा हुआ था. आरोप था कि उन्होंने फर्जी डिग्री रखने वाले कुछ लोगों की तुलना ‘कॉकरोच’ से की और कहा कि ऐसे लोग सोशल मीडिया या सोशल एक्टिविस्ट का रूप लेकर व्यवस्था को निशाना बनाते हैं.
सोशल मीडिया से जंतर-मंतर तक पहुंचा मामला
इस टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आईं और इसी घटनाक्रम से व्यंग्यात्मक ऑनलाइन समूह ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ यानी CJP चर्चा में आया. बाद में यह गतिविधि NEET-UG पेपर लीक के विरोध में दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शनों तक पहुंच गई.
प्रदर्शन करीब एक महीने से अधिक समय तक चला. 20 जुलाई को प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प भी हुई, जिसमें दोनों पक्षों के कई लोग घायल हुए. इन घटनाक्रमों के बाद तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था.
ये भी पढे़ं- ‘हमें कमजोर न समझें, घर में घुसकर करारा प्रहार…’, अजीत डोभाल का भारत के दुश्मनों को सीधा संदेश