‘चुनाव आयोग की छव‍ि हो रही खराब…’, पूर्व चुनाव आयुक्त ने क्‍यों कहा- SIR का कुछ मतलब नहीं

Election Commission SIR Controversy: स्पेशल इंटेंसिव डिवीजन को लेकर चुनाव आयोग में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है. इस तरह की मीड‍िया र‍िपोर्ट आने के बाद अब पूर्व चुनाव आयुक्‍त ने भी एसआईआर प्रक्र‍िया को लेकर सवाल खड़े किए हैं.
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अशोक लवासा

Election Commission SIR Controversy: स्पेशल इंटेंसिव डिवीजन (SIR) में गड़बड़ियों को लेकर चुनाव आयोग पर कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं. इंडियन एक्‍सप्रेस की रिपोर्ट के बाद से ही कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं. अब आलम यह है कि पूर्व चुनाव आयुक्त अशोक लवासा ने पूरी एसआईआर प्रक्रिया पर ही सवाल खड़े कर द‍िए हैं. उन्‍होंने कहा कि इस समय चुनाव आयोग की छवि सबसे खबरा हो रही है. उन्‍होंने तो यहां तक कह दिया कि एसआईआर प्रक्रिया का ही कोई मतलब नहीं है.

पूर्व चुनाव आयुक्त अशोक लवासा ने कहा कि सबसे ज्यादा दुखद यही है कि चुनाव आयोग पर इस तरह के आरोप लग रहे हैं. इलेक्शन कमीशन बहुत अच्छी संस्था है. जहां मैंने भी काम किया है. वहां जो भी हो रहा है वह बहुत गलत है. पहले और आज के मुकाबले आज सबसे ज्यादा इलेक्शन कमीशन की छवि खराब हुई है.

एसआईआर को लेकर क्या कहा?

एसआईआर को लेकर पूर्व चुनाव आयुक्त अशोक लवासा ने कहा कि इस प्रक्रिया को लेकर सभी पहले ही चिंतित थे. जो आज हो रहा है वह सब एसआईआर की वजह से ही हो रहा है. जिस तरह से ये किया जा रहा है, उसमें सारी चीजें जायज तरीके से नहीं हो रही हैं.

उन्होंने कहा कि‍ हर कोई टेक्नोलॉजी को मदद के लिए यूज करता है. वह अपनी जगह है और कानून अपनी जगह है. टेक्नोलॉजी कानूनी प्रक्रिया को सपोर्ट करने के लिए बनाई जाती है. उसमें अड़चन डालने के लिए नहीं बनाई जाती है. लेकिन आज जो रहा रहा है वह कई तरह के सवाल खड़े कर रहा है.

लवासा ने कहा, ‘अगर यह वास्तव में असहमति थी, तो चुनाव आयोग को तारीखों और पूरे विवरण के साथ सार्वजनिक रूप से स्पष्टीकरण देना चाहिए. उन्होंने सवाल उठाया कि अगर दो चुनाव आयुक्तों की राय अलग थी, तो फिर किसी फैसले को लागू कैसे किया गया. उन्‍होंने कहा क‍ि सभी बातों को सामने सटीक तरीके से रखना चाहिए. लवासा ने नए वोटर्स के रजिस्ट्रेशन के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म-6 में कथित बदलावों पर भी चिंता जताई है.

क्या है विवाद की वजह?

इंडियन एक्‍सप्रेस ने बुधवार 23 सितंबर को अपनी एक रिपोर्ट में दावा किया था कि चुनाव आयोग के अंदर सब ठीक नहीं है. SIR को लेकर दो आयुक्तों ने फैसलों पर 14 बार शिकायत कराई थी. इसके बाद भी कुछ नहीं हुआ और उनकी शिकायतों पर कोई ध्यान नहीं दिया गया. जिसने पूरे स‍िस्‍टम और प्रक्रिया को ही सवालों के घेरे में डाल द‍िया है. दोनों आयुक्तों का कहना था कि कुछ फैसले उनकी जानकारी या सहमति के बिना लिए गए.

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