हरिद्वार के मनसा देवी मंदिर में नया ड्रेस कोड, चोरी रोकने के लिए सख्ती! क्या हैं नए नियम
Mansa Devi Temple: अयोध्या के राम मंदिर में हुई कथित चंदा चोरी का मामला देशभर में गरमाया हुआ है. इस मामले में अब तक कई लोगों की गिरफ्तारियां हो चुकी है. तो वहीं दूसरी तरफ कई अन्य मंदिर अब सख्त नियम अपना रहा है. इसी तर्ज पर हरिद्वार के प्रसिद्ध मनसा देवी मंदिर में बदलाव हुआ है. मंदिर प्रशासन ने पुजारियों और कर्मचारियों के लिए नए नियम लागू किए हैं.
नियमों का मकसद मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं के चढ़ावे और दान की व्यवस्था को पूरी तरह पारदर्शी बनाना और किसी भी तरह की गड़बड़ी की आशंका को खत्म करना है. हाल के वर्षों में देश के कई मंदिरों में चढ़ावे को लेकर उठे विवादों के बाद यह फैसला काफी अहम माना जा रहा है.
क्या हैं नए नियम?
नए निर्देशों के तहत मंदिर में ड्यूटी के दौरान पुजारियों और कर्मचारियों के ऐसे पजामे पहनने पर रोक लगा दी गई है जिनमें जेब हो. इसके अलावा किसी भी कर्मचारी को अपने साथ बैग, थैला या अन्य निजी सामान लेकर गर्भगृह या चढ़ावे वाले क्षेत्र में जाने की अनुमति नहीं होगी. मंदिर प्रशासन का मानना है कि इससे चढ़ावे की सुरक्षा और निगरानी बेहतर होगी. सभी कर्मचारियों को तय ड्रेस कोड का पालन करना होगा और नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई भी की जा सकती है.
मंदिर समिति का कहना है कि श्रद्धालु भगवान के प्रति आस्था के साथ दान करते हैं, इसलिए उस धन और अन्य चढ़ावे की सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है. इसी वजह से निगरानी व्यवस्था को भी मजबूत किया जा रहा है ताकि किसी तरह का संदेह पैदा न हो.
प्रबंधन क्यों कर दी सख्ती?
यह फैसला ऐसे समय आया है जब कुछ समय पहले अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की रकम को लेकर कथित गड़बड़ी का मामला चर्चा में आया था. उस मामले में मंदिर के एक कर्मचारी पर दानपात्र से पैसे निकालने का आरोप लगा था. घटना सामने आने के बाद संबंधित कर्मचारी को हटाने और जांच शुरू करने जैसी कार्रवाई की गई थी. हालांकि वह मामला अलग था, लेकिन उसके बाद देशभर के कई बड़े धार्मिक स्थलों ने अपनी सुरक्षा व्यवस्था और चढ़ावे के प्रबंधन की समीक्षा शुरू कर दी.
तो इस वजह से उठाया ये कदम
हरिद्वार के मनसा देवी मंदिर प्रशासन का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी पर अविश्वास जताना नहीं, बल्कि ऐसी व्यवस्था बनाना है जिसमें भविष्य में किसी तरह के विवाद की गुंजाइश ही न रहे. पारदर्शी व्यवस्था से श्रद्धालुओं का भरोसा भी मजबूत होगा और मंदिर की साख भी बनी रहेगी.
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