पति-पत्नी की जोड़ी ने कर दिया कमाल! 3 साल पहले बनाई थी पार्टी, अब लोकसभा में धमक, जानें कैसे बदला मामला

NCPI Lok Sabha Surge: नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी ऑफ इंडिया ने अपने चुनावी सफर की शुरुआत त्रिपुरा से की थी. साल 2023 में हुए विधानसभा चुनाव में अपने 7 उम्मीदवारों को उतारा था. इनमें से चार प्रत्याशियों के नामांकन रद्द हो गए थे.
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उत्तिया कुंडू और शेवाली कुंडू ने की NCPI की स्थापना

Rural Party To Parliament: इन दिनों राष्ट्रीय राजनीति में नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) चर्चा के केंद्र में बनी हुई है. पश्चिम बंगाल के हावड़ा जिले के संकरील क्षेत्र में एक छोटे से ऑफिस से शुरू हुई पार्टी उगते सूरज की तरह उभरी है. NCPI मात्र तीन सालों में देश की पांचवीं सबसे बड़ी पार्टी बन गई है. भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) में शक्तिशाली और मजबूत सहयोगी के तौर पर अपने आप को साबित किया है.

पति-पत्नी की जोड़ी ने किया कमाल

इलेक्शन कमीशन ने साल 2023 में NCPI को अनरेकग्नाइज्ड पॉलिटिकल पार्टी के तौर पर पंजीकृत किया था. इसका पंजीकृत ऑफिस हावड़ा जिले के बनिपुर में है. उत्तिया कुंडू पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और शेवली कुंडू कोषाध्यक्ष हैं. दोनों पति-पत्नी हैं और लंबे वक्त से सामाजिक कार्यकर्ता के तौर पर एक्टिव हैं. पार्टी की नींव स्थानीय समस्याओं, बेराजगारी और महिला सशक्तिकरण के मुद्दों पर रखी गई थी.

त्रिपुरा से हुई थी चुनावी सफर की शुरुआत

नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी ऑफ इंडिया ने अपने चुनावी सफर की शुरुआत त्रिपुरा से की थी. साल 2023 में हुए विधानसभा चुनाव में अपने 7 उम्मीदवारों को उतारा था. इनमें से चार प्रत्याशियों के नामांकन रद्द हो गए थे. इनमें से दो सीटों पर पार्टी ने ‘सात किरणों वाला पेन निब’ पर वोटिंग हुई.

इस चुनाव में NCPI को 822 वोट मिले थे. चवमानु सीट पर 536 वोट और कैलाशहर सीट पर 286 वोट प्राप्त हुए थे. उस समय पार्टी का नारा था, ‘अपने अधिकारों की रक्षा के लिए दलबदलुओं को नकारें और समाजसेवियों का समर्थन करें.’

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TMC के 20 सांसद पार्टी में हुए शामिल

जिस पार्टी ने दलबदलुओं को नकारने की बात की थी. आज वहीं पार्टी उनकी पसंदीदा बनी हुई है. NCPI का गोल्डन पीरियड उस समय शुरू हुआ जब तृणमूल कांग्रेस के दो-तिहाई लोकसभा सांसदों ने पार्टी में विलय की घोषणा कर दी. बागी सांसदों ने स्पीकर ओम बिरला से मिलकर निम्न सदन में अलग बैठने की बात कही. काकोली घोष दस्तीदार, शताब्दी रॉय, सायोनी घोष, युसूफ पठान, सुदीप बंदोपाध्याय समेत 20 सांसद ने शामिल हुए हैं.

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