ईरान-इजरायल जंग से क्रूड ऑयल पर असर? आसमान छूएंगे पेट्रोल-डीजल के दाम! क्या है India का बैकअप प्लान?
ईरान-इजरायल जंग से क्रूड ऑयल पर असर?
Crude Oil Price: अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जंग रुकने का नाम ही नहीं ले रहा है. दोनों ओर से कोई भी देश पीछे हटने के लिए तैयार नहीं है. इस दौरान जिस रास्ते से क्रूड ऑयल आता है, उस खाड़ी को ही बंद कर दिया गया है. जिसकी वजह से संभावना है कि कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त उछाल देखने को मिल सकता है. हालांकि, अभी मॉर्केट बंद है लेकिन शुक्रवार को यह 73 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ. अगर यह युद्ध ऐसे ही कुछ दिनों तक चलता रहा, तो 100 पार होने में कोई ज्यादा समय नहीं लगेगा. सबसे बड़ा सवाल है कि आखिर इस दौरान सभी देश क्या करेंगे. भारत के पास कितना स्टॉक बचा है या आगे की रणनीति क्या है?
क्रूड ऑयल के कीमत की अगर एक महीने की बात की जाए, तो करीब 6 डॉलर प्रति बैरल की कीमत का इजाफा हुआ है. जिसके बाद 73 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया है, लेकिन यह कीमत युद्ध शुरू होने से पहले का है. युद्ध होते ही क्रूड ऑयल की कीमत काफी तेजी से बढ़ने की संभावना है. इजरायल ने हमला कर ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई को मार दिया, जिसके बाद ईरान ने भी कई हमले किए और बदला लेने की धमकी दी है. ऐसे में माना जा रहा है कि यह युद्ध अभी और लंबा चलने की संभावना है.
अगर जंग लंबी खिंची, तो बढ़ सकती है कीमत
इकोनॉमिक्स टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय रिफाइनरी कंपनियों ने इस स्थिति से निपटने के लिए कमर कस ली हैं. क्योंकि अधिकारियों का मानना है कि यह जंग लंबी खिच सकती है, जिसका असर क्रूड ऑयल संबंधित चीजों में व्यापक देखने को मिल सकता है. हालांकि, अधिकारियों ने यह भी कहा कि अभी कुछ दिनों तक पेट्रोल-डीजल की कीमत बढ़ने की आशंका नहीं है. भारत के हाल-फिलहाल के कुछ दिनों के लिए स्टॉक भी पर्याप्त मात्रा में है.
ये भी पढ़ेंः कराची में अमेरिकी दूतावास पर भीड़ का हमला, जमकर तोड़फोड़, 9 लोगों की मौत
भारत के पास क्या है प्लान?
ईरान-इजरायल युद्ध होने की वजह से होर्मुज की खाड़ी बंद कर दी गई है, जिसका असर तेल पर दिखाई देगा. क्योंकि भारत का करीब 40% कच्चा तेल और 55% एलएनजी इसी रास्ते से आता है. इसलिए अधिकारियों ने इससे निपटने के लिए अपना प्लान तैयार कर लिया है. अधिकारियों के अनुसार, विकल्प के तौर पर सऊदी और यूएई के बंदरगाहों से लोडिंग कराई जा सकती है. इसके अलावा खाड़ी के बाहर देशों से ऑर्डर की संभावना है. यानी कि अगर युद्ध नहीं थमता, तो ऐसी दशा में भारत ने अपना प्लान तैयार कर लिया है.