NDA के करीब आ रहे शरद पवार? जयंत पाटिल-विनोद तावड़े की मुलाकात से महाराष्ट्र से तेज हुई हलचल

Sharad Pawar: जयंत पाटिल और भाजपा नेता विनोद तावड़े की मुलाकात के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में नए समीकरणों की चर्चा तेज हो गई है. हालांकि भाजपा और शरद पवार गुट दोनों ने एनडीए में शामिल होने की अटकलों को फिलहाल खारिज कर दिया है.
Maharashtra Politics

Maharashtra Politics: महाराष्ट्र की राजनीति में एक मुलाकात ने नई तरह की चर्चाओं को जन्‍म दे द‍िया है. राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के वरिष्ठ नेता जयंत पाटिल और बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े की हालिया बैठक के बाद यह चर्चा शुरू हो गई कि क्या शरद पवार का गुट भविष्य में एनडीए का हिस्सा बन सकता है. हालांकि इस मुद्दे पर अब तक किसी भी दल की ओर से आधिकारिक तौर पर गठबंधन की पुष्टि नहीं की गई है.

बताया जा रहा है कि मुंबई में दोनों नेताओं के बीच हुई मुलाकात के बाद राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह की अटकलें लगने लगीं. विपक्षी दलों के साथ-साथ महायुति और महाविकास अघाड़ी के नेताओं की प्रतिक्रियाओं ने भी इस चर्चा को और हवा दी. माना जा रहा है कि आगामी राजनीतिक समीकरणों और चुनावी रणनीतियों को लेकर कई स्तरों पर बातचीत चल रही है, लेकिन बैठक का वास्तविक उद्देश्य सार्वजनिक नहीं किया गया है.

अटकलों पर क्‍या बोले फडणवीस?

इस बीच महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इन अटकलों को खारिज करते हुए साफ कहा कि फिलहाल महाराष्ट्र से कोई नया दल एनडीए में शामिल नहीं हो रहा है. उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा शरद पवार की पार्टी में किसी तरह की टूट कराने की कोशिश नहीं कर रही और इस मुलाकात को लेकर अनावश्यक राजनीतिक निष्कर्ष नहीं निकाले जाने चाहिए.

हालांकि इस तरह की घटनाएं पहले भी सामने आ चुकी हैं, जब सब कुछ नकारने के बाद भी कोई राजनेता उसी दल में शामिल हुआ. यही वजह है कि इस मुलाकात को सामान्‍य नहीं माना जा रहा है.

शरद पवार गुट का क्‍या है रुख?

शरद पवार गुट के नेताओं ने भी ऐसी चर्चाओं को महत्व नहीं दिया. पार्टी की ओर से संकेत दिया गया कि भाजपा के साथ जाने या सरकार को समर्थन देने जैसी खबरों में कोई सच्चाई नहीं है. पार्टी नेताओं का कहना है कि विपक्ष की भूमिका को लेकर उनका रुख पहले जैसा ही है. अफवाहों के आधार पर राजनीतिक निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा.

क्‍यों सामान्‍य नहीं है यह मुलाकात?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि महाराष्ट्र की राजनीति में पिछले कुछ सालों में कई बड़े घटनाक्रम देखने को मिले हैं. जिनकी वजह है महाराष्‍ट्र की स‍ियासत भी पूरी तरह से बदल गई. ऐसे में किसी भी नेता की बैठक तुरंत चर्चा का विषय बन जाती है.

फिलहाल इतना स्पष्ट है कि जयंत पाटिल और विनोद तावड़े की बैठक ने राज्य की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है. अब सभी की नजर शरद पवार, भाजपा और महाविकास अघाड़ी के अगले राजनीतिक कदमों पर टिकी है.

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