हंगामे की भेंट चढ़ा संसद का मानसून सत्र, लोकसभा में सिर्फ 16% कामकाज-राज्यसभा का कैसा रहा हाल?
संसद
Parliament Monsoon Session Productivity Loss: संसद का मॉनसून सत्र इस बार हंगामें की भेंट चढ़ गया. विपक्ष के विरोध के कारण ज्यादातर समय सदन स्थगित ही रहा है. 10 अगस्त तक उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक लोकसभा अपने निर्धारित समय का केवल 16 प्रतिशत ही काम कर पाई. वहीं अगर राज्यसभा की बात की जाए तो वहां भी स्थिति बहुत बेहतर नहीं रही है. वहां करीब 31 प्रतिशत समय ही कामकाज हुआ.
हालांकि, संसद में कम कामकाज की समस्या नई नहीं है.पिछले कई सालों में भी सरकार और विपक्ष के बीच विवादों के कारण सदन की कार्यवाही बाधित होती रही है.
कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार के दौरान 2010 का शीतकालीन सत्र सबसे खराब उदाहरणों में शामिल रहा है. उस समय 2जी स्पेक्ट्रम मामले को लेकर विपक्ष और सरकार के बीच जोरदार टकराव हुआ था. नतीजा यह रहा कि लोकसभा केवल 5 प्रतिशत और राज्यसभा महज 2 प्रतिशत समय ही चल सकी.
कई बार बनी इस तरह की स्थिति
2013 के शीतकालीन सत्र में तेलंगाना गठन और दूसरे राजनीतिक मुद्दों को लेकर हंगामा हुआ. इसदौरान लोकसभा की उत्पादकता करीब 6 प्रतिशत, जबकि राज्यसभा की 19 प्रतिशत रही.
मोदी सरकार के कार्यकाल में भी कई सत्रों में संसद का कामकाज प्रभावित हुआ.2015 के मानसून सत्र में ललित मोदी और व्यापम जैसे मुद्दों को लेकर विपक्ष के विरोध का असर पड़ा.लोकसभा करीब 46 प्रतिशत और राज्यसभा केवल 9 प्रतिशत समय चली.
2016 के शीतकालीन सत्र में नोटबंदी के विरोध के कारण भी काफी हंगामा हुआ.लोकसभा की उत्पादकता लगभग 15 प्रतिशत और राज्यसभा की 18 प्रतिशत रही.इसी तरह 2021 में पेगासस विवाद और कृषि कानूनों को लेकर विपक्ष के प्रदर्शन के कारण कामकाज प्रभावित हुआ.
मौजूदा सत्र में क्या रही वजह
मौजूदा सत्र में भी विपक्ष ने कई मुद्दों पर सरकार से जवाब मांगा, जिसके चलते कार्यवाही कई बार बाधित हुई.इसका असर विधेयकों पर चर्चा और अन्य संसदीय कामकाज पर भी पड़ा है.
संसद लोकतंत्र का सबसे महत्वपूर्ण मंच है, जहां सरकार से सवाल पूछे जाते हैं और कानूनों पर चर्चा होती है.इसलिए सरकार और विपक्ष दोनों की जिम्मेदारी है कि राजनीतिक मतभेदों के बावजूद सदन को चलने दिया जाए.लगातार हंगामे से सिर्फ संसद का समय ही नहीं
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