‘समय गंवाने के बजाय वह अपनी तैयारी करेंगे…’, पंशुल बंसल ने बताया क्यों नहीं गए जंतर-मंतर
पंशुल बंसल
Neet Ug 2026 Re Exam: देश की राजधानी जंतर-मंतर पर एक तरफ जहां NEET-UG 2026 परीक्षा को लेकर विरोध देखने को मिल रहा है. तो वहीं दूसरी तरफ कई छात्र विरोध और आंदोलन का हिस्सा बन रहे हैं. इन सब के बीच दिल्ली के छात्र पंशुल बंसल ने अपनी ऊर्जा पढ़ाई में लगाने का फैसला किया. उनकी इसी सोच का नतीजा रहा कि उन्होंने री-नीट परीक्षा में 715 अंक हासिल कर ऑल इंडिया रैंक-2 प्राप्त की है.
पंशुल बंसल ने बताया कि परीक्षा रद्द होने की खबर मिलने के बाद शुरुआत में उन्हें निराशा हुई थी. उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि अचानक बदली परिस्थितियों से कैसे निपटा जाए, लेकिन कुछ समय बाद उन्होंने इसे एक नए अवसर के रूप में लिया. उन्होंने तय किया कि शिकायतों और तनाव में समय गंवाने के बजाय वह अपनी तैयारी को और मजबूत करेंगे.
पंशुल ने क्या-क्या बताया?
पंशुल के अनुसार, जब देशभर में परीक्षा को लेकर विरोध प्रदर्शन हो रहे थे, तब उन्होंने घर पर रहकर पढ़ाई जारी रखने का विकल्प चुना. उनका मानना था कि अगर उनके पास दोबारा बेहतर प्रदर्शन करने का मौका है, तो उन्हें उसका पूरा फायदा उठाना चाहिए. उन्होंने अपनी तैयारी में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया और पहले वाली दिनचर्या के साथ लगातार मेहनत करते रहे.
पहली परीक्षा में पंशुल ने करीब 706 अंक हासिल किए थे, लेकिन दोबारा आयोजित परीक्षा में उन्होंने अपना स्कोर बढ़ाकर 715 तक पहुंचा दिया. उन्होंने बताया कि अंतिम डेढ़ महीने में उन्होंने सिर्फ अपनी कमियों को सुधारने और बेहतर प्रदर्शन करने पर ध्यान दिया.
परीक्षा रद्द होने के बाद उठे कई सवाल
परीक्षा रद्द होने के बाद उनके मन में यह सवाल जरूर आया कि ऐसा क्यों हुआ, लेकिन उन्होंने खुद को नकारात्मक विचारों से दूर रखा. उनका कहना था कि लक्ष्य पर ध्यान बनाए रखना ही सबसे जरूरी था. उन्होंने विवादों से दूरी बनाकर अपनी तैयारी को प्राथमिकता दी.
पेपर लीक और परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े विवाद पर पंशुल ने कोई टिप्पणी करने से इनकार किया. उन्होंने कहा कि वह इस मुद्दे पर कुछ नहीं कहना चाहते.
विवादों के बाद हुई थी परीक्षा रद्द
NEET-UG 2026 की पहली परीक्षा के बाद सामने आए विवादों के चलते परीक्षा रद्द की गई थी और बाद में पुनर्परीक्षा कराई गई. परिणाम जारी होने के बाद पंशुल बंसल की कहानी उन छात्रों के लिए प्रेरणा बन गई है, जिन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी अपने लक्ष्य पर ध्यान बनाए रखा.