‘तिरंगा फहराने के लिए अनुमति की जरूरत नहीं’, नेहा बोरा की याचिका पर फैसला कल, HC में सरकार ने क्या दलील दी?
AISA अध्यक्ष नेहा बोरा (File Photo)
Delhi HC Decision Tomorrow: AISA अध्यक्ष नेहा बोरा को दिल्ली प्रदर्शन के जुड़े मामले में स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) ने एक नोटिस जारी किया था. जिसको नेहा बोरा ने दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी है. आज गुरुवार को दिल्ली हाई कोर्ट ने नेहा बोरा की याचिका पर सुनवाई की है. जिसमें कहा कि नोटिस का मतलब बस ये है कि जांच के दौरान आप मजिस्ट्रेट को संतुष्ट करें कि बांड क्यों नहीं लिया जाना चाहिए? पढ़ें हाई कोर्ट और नेहा बोरा के वकील के बीच क्या बहस हुई?
नेहा बोरा की ओर से सीनियर एडवोकेट गोपाल शंकरनारायणन ने हाई कोर्ट को बताया कि वे एक सक्रिय AISA नेता हैं. दिल्ली हाई कोर्ट में दलील देते हुए जंतर-मंतर की जगह दिखाई और कहा कि 15 अक्तूबर को प्रेस क्लब में प्रेसवार्ता हुई. 16 अक्तूबर की शाम 4 बजे जंतर-मंतर से अचानक प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाए जाने के फैसले के विरोध में एक पोस्ट डाली गई थी. इस पोस्ट में बैठक आयोजित करने को लेकर अपील की गई थी. बैठक जंतर-मंतर नहीं, बल्कि मंडी हाउस में करनी थी. वकील ने बताया कि इस पोस्ट में ऐसा कुछ भी नहीं था, जो अपराध की श्रेणी में आए. क्योंकि उन्होंने किसी को न्यौता भी नहीं दिया था.
सरकार ने क्या कहा?
राज्य सरकार की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा और सेंट्रल गवर्नमेंट स्टैंडिंग काउंसिल आशीष दीक्षित अदालत में पेश हुए. जिन्होंने याचिका पर आपत्ति जताते हुए कहा कि मौके पर धारा 163 लागू थी और वहां पर प्रदर्शनकारियों के मुकाबले पुलिसकर्मियों की संख्या काफी कम थी. इस दौरान नेहा बोरा ने पुलिस से बच निकलने की कोशिश की और पुलिस के रोकने पर भी नहीं रुकीं. सीधे कनॉट प्लेस की ओर भाग गईं.
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तिरंगा फहराने के लिए अनुमति की जरूरत नहींः वकील
सीनियर एडवोकेट ने कहा कि मेरी क्लाइंट नेहा बोरा ने कभी हिंसा भड़काने की बात नहीं की, उनका रुख पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा है. वे हमेशा से सुधारों की मांग कर रही थीं और सोशल मीडिया के जरिए लोगों से जुड़ने की अपील करती थीं. इस दौरान वकील ने नोटिस का जिक्र करते हुए कहा कि नोटिस में लिखा है कि ‘बिना अनुमति राष्ट्रीय ध्वज फहराना’, जबकि तिरंगा फहराने के लिए किसी अनुमति की जरूरत नहीं होती.