Nepal Tragedy: नेपाल में मरने वालों की संख्या 579 पहुंची, अब भी 1900 लोग लापता, एक और झील बनी खतरे की घंटी

Nepal Tragedy: भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) के अनुसार 320 भारतीय नागरिक अब लापता हैं जिनसे संपर्क नहीं हो पा रहा है. वहीं, 400 नागरिक चीन में हैं, जो पूरी तरह से सुरक्षित हैं. भारतीय दूतावास इन लोगों के संपर्क में है और वहां से निकालने के प्रयास किए जा रहे हैं.
Nepal tragedy Death toll reaches 579 another lake Tibet border could unleash devastation

नेपाल त्रासदी

Nepal Tragedy: नेपाल में ग्लेशियल लेक टूटने की वजह से आई फ्लैश फ्लड ने भारी तबाही मचायी है. रसुवा, धाड़िंग और नुवाकोट में प्रकृति का कहर देखने को मिल रहा है. इन इलाकों में लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है. मलबे को हटाकर लोग को निकालने का अभियान जारी है. आंकड़ों की बात करें तो मरने वाले लोगों का आंकड़ा बढ़कर 579 पहुंच चुका है. वहीं, करीब 1900 लोग अब लापता हैं.

320 भारतीय अब भी लापता

इस त्रासदी ने बड़ी संख्या में भारतीयों को प्रभावित किया है. भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) के अनुसार 320 भारतीय नागरिक अब लापता हैं जिनसे संपर्क नहीं हो पा रहा है. वहीं, 400 नागरिक चीन में हैं, जो पूरी तरह से सुरक्षित हैं. भारतीय दूतावास इन लोगों के संपर्क में है और वहां से निकालने के प्रयास किए जा रहे हैं. इसके साथ ही MEA ने 149 भारतीय की लिस्ट जारी की है जो चीन से नेपाल पहुंचे हैं. सभी सुरक्षित स्थान पर हैं.

नेपाल में एक अन्य झील बनी आफत

भोटेकोशी नदी में जलस्तर एक बार फिर से बढ़ने लगा है. फिलहाल इसके पीछे की सटीक वजह नहीं बतायी जा रही है. आशंका जताई जा रही है कि नेपाल-तिब्बत बॉर्डर पर एक झील फिर से फट पड़ी है. इसके बारे में कहा जा रहा है कि इसमें करीब 25 लाख क्यूबिक मीटर यानी 2.5 अरब लीटर पानी है. पहले के हादसे से सबक लेते हुए नेपाल सरकार अलर्ट मोड में आ गई है. स्थानीय लोगों को नदी से दूर रहने के लिए कहा है. त्रिशूली नदी के तट के किनारे रहने वालों को भी दूर जाने के लिए कहा गया है.

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अब विदेश की टीम भी कर सकेंगी रेस्क्यू

नेपाल सरकार ने भारत, ऑस्ट्रेलिया, चीन और दक्षिण कोरिया समेत अन्य देशों की टीमों को रेस्क्यू के लिए मंजूरी दे दी है. विशेषज्ञ टनल रेस्क्यू, डीएनए टेस्ट और फॉरेंसिक जांच में मदद करेंगे. पहले नेपाली सरकारी ने विदेशी मदद लेने से इनकार कर दिया था. बड़ी संख्या में लापता विदेशी नागरिकों की संख्या और बढ़ते दबाव के बाद निर्णय लिया गया है.

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