क्या होता है अविश्वास प्रस्ताव? अब तक कितने लोकसभा स्पीकर के खिलाफ लाया गया, जानिए सबकुछ
अविश्वास प्रस्ताव क्या है?
Opposition Motion in Lok Sabha: लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला के खिलाफ विपक्षी सांसद अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रहे हैं. विपक्ष का आरोप है कि उन्हें लोकसभा स्पीकर बोलने का मौका नहीं देते हैं, जिसको लेकर विपक्ष काफी नाराज है और उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रहा है. लोकसभा स्पीकर के खिलाफ प्रस्ताव की क्या प्रक्रिया होती है और यह अब तक कितने स्पीकर के खिलाफ लाया जा चुका है. यहां जानते हैं.
लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाना आम सरकार के अविश्वास प्रस्ताव से काफी अलग होता है. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 94 (C) के तहत लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास नहीं, बल्कि ‘हटाने का प्रस्ताव’ लाया जाता है, जो लोकसभा के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के पद से हटाए जाने से संबंधित है. लोकसभा स्पीकर को तीन तरीकों से हट सकते हैं.
- लोकसभा के सदस्य नहीं रहने पर पद खुद खाली हो जाता है.
- अपनी स्वेच्छा या किसी कारणवश त्यागपत्र दे सकते हैं.
- लोकसभा सदस्यों के बहुमत से पारित संकल्प से भी हटाया जा सकता है.
लोकसभा स्पीकर को हटाने की क्या होती है प्रक्रिया?
प्रस्ताव पास होने पर स्पीकर अपने पद से तुरंत हट जाते हैं. इस दौरान वे संसद सदस्य बने रहेंगे, लेकिन स्पीकर पद से हट जाएंगे. इसके बाद नया स्पीकर चुना जाएगा. हालांकि, अब तक भारत में लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव के लिए कई बार नोटिस जारी किया जा चुका है. इसके लिए बहस भी हुई लेकिन आज तक कभी पास नहीं हुआ. बता दें, लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला के खिलाफ एक बार पहले भी साल 2020 में नोटिस की बात कही जा चुकी है लेकिन औपचारिक रूप से नोटिस स्वीकार होने के लिए विपक्ष के पास सांसदों की संख्या कम रही.
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अब तक कितने लोकसभा स्पीकर के खिलाफ लाया गया प्रस्ताव?
- सबसे पहले 1967 में डॉक्टर संजीव रेड्डी के खिलाफ चौथी लोकसभा के दौरान विपक्ष ने नोटिस दिया था. विपक्ष ने तत्कालीन स्पीकर पर आरोप लगाया था कि वे कांग्रेस के पक्ष में काम कर रहे हैं. इसके बाद विपक्ष ने नोटिस जारी कर अविश्वास प्रस्ताव लाने का प्रयास किया लेकिन बात मतदान तक नहीं पहुंची थी.
- दूसरी बार 1987-88 में भी आठवीं लोकसभा के दौरान विपक्ष ने बोफोर्स घोटाले पर बहस के दौरान आरोप लगाया कि सरकार को बचाने के लिए स्पीकर गलत नियमों का इस्तेमाल कर रहे हैं. जिसके बाद उनके खिलाफ नोटिस जारी की गई. इस बार भी पर्याप्त समर्थन नहीं जुटा पाने की वजह से मामला थम गया. तत्कालीन लोकसभा स्पीकर बलराम जाखड़ लोकसभा के सबसे शक्तिशाली स्पीकरों में गिने जाते हैं.
- तीसरी बार साल 2001 में 13वीं लोकसभा के दौरान स्पीकर जी.एम.सी बालयोगी के खिलाफ नोटिस दी गई थी, इस दौरान देश में एनडीए की सरकार थी. इस बार मामला नोटिस के बाद चर्चा तक पहुंचा लेकिन वोटिंग से पहले ही ठंडा हो गया.
- पंद्रहवीं लोकसभा स्पीकर मीरा कुमार के खिलाफ भी साल 2001 में विपक्ष ने उन्हें हटाने की भरपूर कोशिश की थी. जब संसद में 2G और CWG घोटाले की बहस चल रही थी. इस दौरान विपक्ष ने आरोप लगाया कि स्पीकर सरकार को ‘कवच’ दे रही है. उस समय देश में कांग्रेस की सरकार थी. विपक्ष में भाजपा और कुछ अन्य दलों ने मिलकर स्पीकर को हटाने का नोटिस दिया था लेकिन बहुमत की कमी के कारण प्रस्ताव ठंडे बस्ते में चला गया.
- हाल ही में विपक्षी दल लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाना चाह रहे हैं. इससे पहले भी साल 2020 में कृषि कानून को लेकर विपक्ष ने जब विरोध किया तो ओम बिड़ला ने उन्हें निलंबित कर दिया था. इसके बाद विपक्षी दलों ने नोटिस देने की बात कही थी लेकिन विपक्षी सांसदों की संख्या काफी कम रही, इसलिए यह सिर्फ मौखिक ही रहा.