मानसून सत्र से पहले कांग्रेस की बड़ी रणनीति, 16 जुलाई को सोनिया गांधी के घर जुटेंगे पार्टी के दिग्गज

parliament Monsoon session: मानसून सत्र से पहले कांग्रेस ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं. 16 जुलाई को सोनिया गांधी के आवास पर होने वाली बैठक में पार्टी संसद के भीतर सरकार को घेरने की रणनीति और प्रमुख मुद्दों पर चर्चा करेगी.
सोनिया गांधी

सोनिया गांधी

Parliament Monsoon Session: संसद के आगामी मानसून सत्र से पहले कांग्रेस अपनी रणनीति को अंतिम रूप देने में जुट गई है. इसी कड़ी में 16 जुलाई को कांग्रेस संसदीय दल (CPP) की अहम बैठक बुलाई गई है. यह बैठक पार्टी की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी के नई दिल्ली स्थित आवास पर होगी, जिसमें लोकसभा और राज्यसभा के कांग्रेस सांसदों के साथ शीर्ष नेतृत्व भी शामिल होगा.

बैठक का मुख्य उद्देश्य मानसून सत्र के दौरान सरकार को किन मुद्दों पर घेरना है और विपक्ष की रणनीति क्या होगी, इस पर विस्तार से चर्चा करना है. कांग्रेस चाहती है कि संसद में ऐसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया जाए, जिनका सीधा संबंध आम जनता से है.

पार्टी महंगाई, बेरोजगारी, किसानों की समस्याएं, चुनावी प्रक्रिया से जुड़े विवाद, कानून-व्यवस्था और अन्य राष्ट्रीय विषयों पर सरकार से जवाब मांगने की तैयारी कर रही है.

किन मुद्दों पर होगी चर्चा?

सूत्रों के अनुसार, बैठक में संसद के भीतर विपक्षी दलों के साथ तालमेल को लेकर भी चर्चा होगी. कांग्रेस की कोशिश रहेगी कि विपक्ष एकजुट होकर सरकार को विभिन्न मुद्दों पर घेर सके. इसके अलावा सांसदों को संसद में प्रभावी तरीके से अपनी बात रखने और विभिन्न विषयों पर समन्वित रणनीति अपनाने के निर्देश भी दिए जा सकते हैं.

क्‍यों मानसून सत्र को माना जा रहा खास

मानसून सत्र को राजनीतिक रूप से काफी अहम माना जा रहा है. हाल के महीनों में कई राष्ट्रीय मुद्दों पर सरकार और विपक्ष आमने-सामने रहे हैं. ऐसे में कांग्रेस इस सत्र को जनता से जुड़े सवालों को मजबूती से उठाने का अवसर मान रही है. पार्टी नेतृत्व चाहता है कि संसद के भीतर सरकार से जवाबदेही तय कराई जाए और विपक्ष की आवाज प्रभावी ढंग से सामने आए.

कौन-कौन होगा बैठक में शामिल?

बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी समेत पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं के शामिल होने की संभावना है. माना जा रहा है कि इस बैठक के बाद कांग्रेस मानसून सत्र के लिए अपना स्पष्ट रोडमैप तैयार कर लेगी, जिससे संसद में उसकी भूमिका और अधिक आक्रामक दिखाई दे सकती है.

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