ममता के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती! ऋतब्रत बनर्जी की बगावत से होगा ‘खेला’? तख्तापलट की हो गई तैयारी
बंगाल की सियासत में बड़ा घटनाक्रम
WB Mamata Banerjee Faces Biggest Challenge: पश्चिम बंगाल में इस समय ममता बनर्जी के लिए हर दिन एक नई चुनौती का सामना करना पड़ रहा है. कई नेता पार्टी छोड़ रहे हैं तो दूसरी अंदरूनी कलह भी किसी से छिपी नहीं है. हालांकि इन सब के बीच अब उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती ऋतब्रत बनर्जी बन सकते हैं. पार्टी से बाहर किए जाने के बाद ऋतब्रत ने नया रास्ता अख्तियार करने की पूरी तैयारी कर ली है, यही वजह है कि राजनीतिक गलियारों में ऐसा कहा जा रहा है कि वे भी जल्द एकनाथ शिंदे की भूमिका में नजर आ सकते हैं और टीएमसी में बड़ी टूट कर सकते हैं.
निष्कासित नेता ऋतब्रत बनर्जी अब दीदी की पार्टी में ही तोड़फोड़ करने का प्लान बना चुके हैं. ऐसा कहा जा रहा है कि उनके पीछे पार्टी के कोई एक-दो नहीं, बल्कि 50 से अधिक विधायक, 12 लोकसभा सांसद और 6 राज्यसभा सांसद लामबंद हो चुके हैं. जो उनके साथ खुले तौर पर हैं. ऐसा कहा जा रहा कि यह पूरा धड़ा मिलकर दीदी से अलग एक नया दल बना सकता है.
ऋतब्रत बनर्जी करेंगे खेला?
ऋतब्रत बनर्जी अगर इस प्लान में कामयाब रहे तो ममता बनर्जी के साथ यह अब तक का सबसे बड़ा खेला माना जाएगा. जिससे न सिर्फ बंगाल में विपक्ष के नेता की कुर्सी बदलेगी, बल्कि पूरी की पूरी टीएमसी ही दोफाड़ हो जाएगी और सत्ता का केंद्र बदल जाएगा. कुछ इस तरह का मामला ही महाराष्ट्र की राजनीति में एक रात के भीतर सामने आया था. जब शिवसेना और फिर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) का पूरा का पूरा वजूद ही मूल कप्तानों (उद्धव ठाकरे और शरद पवार) के हाथ से फिसल गया था, ठीक वैसा ही नजारा इस वक्त बंगाल में दिखाई दे रहा है.
कैसे शुरू हुआ पूरा विवाद?
हाल के दिनों में बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता और चीफ व्हिप से जुड़े दस्तावेजों पर कथित फर्जी हस्ताक्षरों का विवाद सामने आया था. आरोप है कि कुछ विधायकों के हस्ताक्षर उनकी जानकारी के बिना इस्तेमाल किए गए. इसी मामले को लेकर रितब्रत बनर्जी और संदीपन साहा ने विधानसभा अध्यक्ष के पास शिकायत की थी. इसके बाद पार्टी नेतृत्व और इन दोनों नेताओं के बीच टकराव बढ़ गया.
TMC ने आरोप लगाया कि दोनों विधायक लगातार पार्टी लाइन के खिलाफ काम कर रहे थे, बैठकों में शामिल नहीं हो रहे थे और संगठन को नुकसान पहुंचाने वाले बयान दे रहे थे. इसके बाद उन्हें तत्काल प्रभाव से पार्टी से निष्कासित कर दिया गया.
निष्कासन के बाद क्या बोले विधायक?
संदीपन साहा ने कार्रवाई पर नाराजगी जताते हुए कहा कि पार्टी में नैतिकता की बात करने वालों को ही एंटी-पार्टी करार दिया जाता है. उनके बयान ने यह संकेत दिया कि पार्टी के भीतर फैसलों को लेकर असहमति बढ़ रही है.
शिवसेना जैसी टूट का डर क्यों?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह केवल दो विधायकों का निष्कासन नहीं है, बल्कि चुनावी हार के बाद TMC में बढ़ रही बेचैनी का संकेत है. महाराष्ट्र में जिस तरह एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में शिवसेना में बड़ी बगावत हुई थी, उसी तरह बंगाल में भी पार्टी नेतृत्व के खिलाफ आवाजें उठने लगी हैं.
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