वक्फ बिल की जंग: माफियाओं से आजादी या मजहबी सियासत? दो धड़ों में बंटे मुस्लिम संगठन!

पिछड़े मुस्लिमों की आवाज उठाने वाला ये संगठन बिल को 85% मुस्लिमों के लिए फायदेमंद मानता है. संगठन का कहना है कि वक्फ संपत्तियों पर 'अशराफ' (अगड़ी जाति) मुस्लिमों का कब्जा है, जो गरीब मुस्लिमों के हक को दबा रहे हैं.
Waqf Amendment Bill

वक्फ संशोधन विधेयक पर बवाल

वक्फ संशोधन बिल (Waqf Amendment Bill) को लेकर देश में सियासी और सामाजिक हलचल तेज हो गई है. जहां एक तरफ कुछ बड़े मुस्लिम संगठन इसे मजहबी आजादी पर हमला बता रहे हैं, वहीं कई छोटे-बड़े मुस्लिम संगठनों ने इस बिल के समर्थन में अपनी आवाज बुलंद की है. आज लोकसभा में इस बिल के पेश होने के साथ ही दिल्ली और भोपाल की सड़कों पर समर्थन में रैलियां निकलीं, जिसने इस बहस को और रोचक बना दिया है. तो आइए, जानते हैं कि कौन से संगठन बिल के साथ हैं और उनके तर्क क्या हैं, जो वक्फ बोर्ड को कठघरे में खड़ा कर रहे हैं.

वक्फ बिल का समर्थन करने वाले संगठन

जमीयत हिमायत उल इस्लाम

इस संगठन के सदर कारी अबरार जमाल ने बिल को लेकर मौलानाओं पर तीखे सवालों की बौछार कर दी. उनका कहना है, “वक्फ बोर्ड ने आज तक मुस्लिम समाज की तरक्की के लिए क्या किया? कितनी गरीब बच्चियों की शादी करवाई? कितने बेघरों को छत दी?” कारी जमाल का दावा है कि वक्फ की संपत्ति पर ‘माफियाओं’ का कब्जा है और ये बिल उसे आजाद करवाएगा. उन्होंने एक सवाल और उठाया, “जब वक्फ की संपत्ति पर अल्लाह का हक है, तो माफियाओं का कैसे हो गया?” उन्होंने ये भी कहा कि वक्फ अपनी कमाई-खर्च का हिसाब तक सार्वजनिक नहीं करता.

ऑल इंडिया सूफी सज्जादानशीन काउंसिल

अजमेर शरीफ दरगाह से जुड़ा ये संगठन बिल के पक्ष में मजबूती से खड़ा है. चेयरमैन सैयद नसरुद्दीन चिश्ती ने कहा, “ये बिल मस्जिदें छीनने के लिए नहीं, बल्कि पारदर्शिता लाने के लिए है.” उन्होंने कहा कि संशोधन से वक्फ की व्यवस्था में सुधार होगा और गुमराह करने वालों को सबक मिलेगा. चिश्ती ने अपील की, “ये वक्त गुमराह करने का नहीं, बल्कि एक अच्छा बिल पास करवाने का है.”

पसमांदा मुस्लिम महाज

पिछड़े मुस्लिमों की आवाज उठाने वाला ये संगठन बिल को 85% मुस्लिमों के लिए फायदेमंद मानता है. संगठन का कहना है कि वक्फ संपत्तियों पर ‘अशराफ’ (अगड़ी जाति) मुस्लिमों का कब्जा है, जो गरीब मुस्लिमों के हक को दबा रहे हैं. राष्ट्रीय अध्यक्ष परवेज हनीफ ने तंज कसते हुए कहा, “मुस्लिमों का ठेका ओवैसी और मदनी को किसने दिया? असली मुस्लिम समाज इस बिल के साथ है.”

मुस्लिम राष्ट्रीय मंच (MRM)

RSS से जुड़ा ये संगठन भी बिल के समर्थन में है. फरवरी 2025 की एक बैठक में MRM ने दावा किया कि ये बिल वक्फ संपत्तियों में पारदर्शिता लाएगा और मुस्लिम समुदाय के हित में काम करेगा.

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मुस्लिम महिला बौद्धिक समूह

शालिनी अली के नेतृत्व में इस समूह ने बिल को महिलाओं, अनाथों और विधवाओं के लिए वरदान बताया. उनका कहना है कि संशोधन से वक्फ बोर्ड कमजोर वर्गों के कल्याण के लिए मजबूर होगा, बशर्ते ये कागजी वादों तक सीमित न रहे.

विरोधियों का राग- मजहबी आजादी पर हमला

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) और जमीयत उलेमा-ए-हिंद जैसे बड़े संगठन बिल के खिलाफ लामबंद हैं. उनका आरोप है कि ये बिल वक्फ की स्वायत्तता को खत्म कर देगा और धार्मिक आजादी पर चोट करेगा. लेकिन समर्थकों का जवाब है कि ये विरोध सिर्फ उन लोगों का है, जो वक्फ की संपत्तियों पर कब्जा जमाए बैठे हैं.

सड़कों पर समर्थन, संसद में हंगामा

आज दिल्ली और भोपाल में बिल के समर्थन में रैलियां निकलीं, जहां लोगों ने ‘वक्फ माफियाओं से आजादी’ के नारे लगाए. दूसरी ओर, लोकसभा में बिल पेश होने के दौरान विपक्षी दलों ने जमकर हंगामा किया. सवाल ये है कि क्या ये बिल वक्फ की संपत्तियों को माफियाओं से मुक्त कर पाएगा या ये सिर्फ एक सियासी दांव है?

वक्फ संशोधन बिल अब संसद के पटल पर है और इसकी हर धारा पर बहस जारी है. समर्थकों का मानना है कि ये बिल मुस्लिम समाज के हाशिए पर पड़े लोगों को उनका हक दिलाएगा, जबकि विरोधी इसे “सांप्रदायिक साजिश” करार दे रहे हैं. सच जो भी हो, ये बिल भारतीय मुस्लिम समुदाय के लिए एक बड़े बदलाव का संकेत तो दे ही रहा है.

Waqf Amendment Bill LIVE: वक्फ पर इन मौलाना का ज्ञान सुनकर माथा पीट लेंगे! | BJP | Congress

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