क्यों समन किया बताने की जरूरत नहीं, बिना वारंट किसी की भी गिरफ्तारी…हाल के सालों में ED कैसे बनी इतनी ताकतवर?

कांग्रेस की सरकार में ईडी का दायरा तो बढ़ा ही, लेकिन मोदी सरकार ने कुछ बदलाव करके इसे और भी ज्यादा ताकतवर बना दिया है. साल 2019 में केंद्र सरकार ने प्रिवेन्शन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) में संशोधन कर दिया.

ED

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हाल के सालों में ED ने ताबड़तोड़ कई कार्रवाई की है. पहले झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन और अब दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल. 50 दिनों में दो राज्यों के सीएम को ईडी ने गिरफ्तार कर लिया. दोनों को ही मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में गिरफ्तार किया गया है. हेमंत सोरेन जहां ईडी की कस्टडी में हैं. वहीं, अरविंद केजरीवाल भी 28 मार्च तक ईडी की रिमांड पर ही रहेंगे. हेमंत सोरेन ने तो गिरफ्तारी से पहले ही इस्तीफा दे दिया था, लेकिन केजरीवाल ने साफ-साफ कहा कि इस्तीफा नहीं देंगे. अब आदमी पार्टी जेल से ही सरकार चला रही है. अरविंद केजरीवाल अब भी दिल्ली के सीएम हैं. वो पद पर रहते हुए गिरफ्तार होने वाले देश के पहले मुख्यमंत्री हैं. अब सवाल उठता है कि क्या ईडी वाकई इतनी ताकतवर है कि बिना किसी वारंट के ही किसी सीएम को गिरफ्तार कर सकती है.

ED की गिरफ्त में कई रसूखदार नेता

पिछले कुछ दिनों में ऐसा कई बार देखने को मिला है. झारखंड में हेमंत सोरेन को कथित जमीन घोटाला मामले में गिरफ्तार किया गया, वहीं दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल को शराब घोटाला मामले में गिरफ्तार किया गया है.  फिलहाल ईडी की कस्टडी में कई रसूखदार नेता हैं. पिछले हफ्ते ईडी ने कथित शराब घोटाले में के. कविता को गिरफ्तार किया था. के. कविता तेलंगाना के पूर्व सीएम केसीआर की बेटी हैं और बीआरएस की एमएलसी भी हैं. इतना ही नहीं, इससे पहले ईडी ने इसी मामले में दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया को भी गिरफ्तार किया था. वहीं संजय सिंह को भी ईडी ने ही गिरफ्तार किया था.  देश में जितनी भी जांच एजेंसी हैं, उनमें ईडी हाल के सालों में खूब ताकतवर बनी है. आइये जानते हैं कैसे-

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ईडी कैसे हुई इतनी ताकतवर?

देश में साल 1947 में फॉरेन एक्सचेंज रेगुलेशन एक्ट (FERA) लागू किया गया था. इसी के तहत 1 मई 1956 को ED बनाया गया. पहले इसका नाम ‘इन्फोर्समेंट यूनिट’ था, जिसे बाद में बदलकर ‘इन्फोर्समेंट डायरेक्टोरेट’ कर दिया गया. शुरुआत में ED का काम विदेशों में चल रहे एक्सचेंज मार्केट में लेनदेन कर रहे लोगों के फर्जीवाड़े की पड़ताल करना था. बाद में PMLA, FEMA, FEOA जैसे कानून आए और ED की ताकत बढ़ती चली गई. साल 2012 तक ईडी मनी लॉन्ड्रिंग की जांच उन्हीं मामलों में कर सकती थी, जिनमें 30 लाख या इससे ज्यादा रकम की गड़बड़ी हुई हो.हालांकि, 2013 में कानून में संशोधन कर 30 लाख की सीमा को खत्म कर दिया गया. इसके बाद से ईडी ने हर छोटे-मोटे धांधली की जांच की और कई रसूखदार नेताओं को अपने गिरफ्त में लिया.

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2019 में मोदी सरकार ने ED को दिया सबसे बड़ा ‘अस्त्र’

गौरतलब है कि कांग्रेस की सरकार में ईडी का दायरा तो बढ़ा ही, लेकिन मोदी सरकार ने कुछ बदलाव करके इसे और भी ज्यादा ताकतवर बना दिया है. साल 2019 में केंद्र सरकार ने प्रिवेन्शन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) में संशोधन कर दिया. मोदी सरकार ने प्रिवेन्शन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट की धारा 17(1)और 18 में संशोधन कर दिया. इसके बाद तो मानों ईडी इतनी ताकतवर हो गई कि कानून के दायरे में रहकर किसी के घर पर छापेमारी, सर्च ऑपरेशन और गिरफ्तारी कर सकती है.

इसी कानून की वजह से अब ईडी को बिना की वारंट को गिरफ्तार करने की ताकत मिल गई है. सबसे खास बात कि ईडी अगर किसी को समन करती भी है तो ये बताने की जरूरत नहीं है कि उसे क्यों बुलाया जा रहा है. अगर ईडी को एक बार लग गया कि कोई गैर कानूनी तरीके से पैसे कमाकर संपत्ति बनाई है तो उस पर भी कार्रवाई कर सकती है. इतना ही नहीं, ईडी के सामने दिए गए बयान को सबूत माना गया है, जबकि बाकी मामलों में बयान कानूनी रूप से तभी वैध होता है जब उसे मजिस्ट्रेट के सामने रिकॉर्ड करवाया जाता है.

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