काली पट्टी बांधकर नमाज अदा करते रहे मौलाना! उधर अजमेर शरीफ वाले चिश्ती ने कर दिया ‘वक्फ बिल’ का समर्थन, गिनाए कई फायदे

ईद की नमाज के बाद चिश्ती ने पत्रकारों से बात की. उन्होंने कहा कि वक्फ बोर्ड को लेकर कुछ लोग गलतफहमियां फैला रहे हैं. उन्होंने कहा कि विरोध करना लोकतंत्र का हिस्सा है. अगर कोई शांतिपूर्ण और संवैधानिक तरीके से अपनी बात रखता है, तो इसमें कोई परेशानी नहीं. लेकिन वक्फ संशोधन जरूरी है.
Syed Nasruddin Chishti ON Waqf Board Amendment Bill

अजमेर दरगाह के आध्यात्मिक उत्तराधिकारी सैयद नसीरुद्दीन चिश्ती

Waqf Board Amendment Bill: ईद-उल-फितर के खास मौके पर आज पूरा देश त्योहार की खुशियों में डूबा हुआ है. लेकिन इस बार ईद की चर्चा सिर्फ मुबारकबाद तक नहीं रही. एक तरफ ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की अपील पर लाखों लोग बाजू पर काली पट्टी बांधकर नमाज अदा करने निकले, तो दूसरी तरफ अजमेर शरीफ दरगाह से एक ऐसी खबर आई, जिसने सबका ध्यान खींच लिया. अखिल भारतीय सूफी सज्जादानशीन परिषद के अध्यक्ष और अजमेर दरगाह के आध्यात्मिक उत्तराधिकारी सैयद नसीरुद्दीन चिश्ती ने मोदी सरकार के वक्फ बोर्ड संशोधन बिल को खुला समर्थन दिया. उन्होंने इसके कई फायदे गिनाए.

वक्फ संशोधन जरूरी है- चिश्ती

ईद की नमाज के बाद चिश्ती ने पत्रकारों से बात की. उन्होंने कहा कि वक्फ बोर्ड को लेकर कुछ लोग गलतफहमियां फैला रहे हैं. उन्होंने कहा कि विरोध करना लोकतंत्र का हिस्सा है. अगर कोई शांतिपूर्ण और संवैधानिक तरीके से अपनी बात रखता है, तो इसमें कोई परेशानी नहीं. लेकिन वक्फ संशोधन जरूरी है. उन्होंने आगे कहा कि ये गलत है कि इससे मस्जिदें, कब्रिस्तान या खानकाह छिन जाएंगे. सरकार ने बिल को जल्दबाजी में नहीं लाया. इसे जॉइंट पार्लियामेंट्री कमेटी (JPC) में भेजा गया, जहां हर पक्ष की बात सुनी गई. अब इसे संसद में पेश करने की तैयारी है.

सैयद नसीरुद्दीन चिश्ती ने क्या-क्या कहा?

सैयद नसीरुद्दीन चिश्ती ने वक्फ संशोधन के फायदों को विस्तार से बताया. पहला, पारदर्शिता आएगी. वक्फ की संपत्तियों का हिसाब-किताब साफ होगा. दूसरा, जो जमीनें अवैध कब्जे में हैं, उन्हें वापस लिया जा सकेगा. तीसरा, किराये से होने वाली आय बढ़ेगी, जो समुदाय के लिए उपयोगी होगी. उन्होंने कहा, “कुछ लोग इसे शरियत में दखल बता रहे हैं, लेकिन ऐसा नहीं है. शरियत अलग है. वक्फ का प्रबंधन 1954 के कानून से चलता है. अब उसमें बदलाव हो रहा है, ताकि सिस्टम बेहतर हो सके.”

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चिश्ती ने की ‘सौगात-ए-मोदी’ पहल की तारीफ

अजमेर शरीफ दरगाह करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है. ऐसे में चिश्ती का ये बयान बेहद अहम माना जा रहा है. उन्होंने ये भी कहा कि भारत की गंगा-जमुनी तहज़ीब हमारी ताकत है. यहां एक दिन पहले चेती चंद मनाया गया, नवरात्रि की शुरुआत हुई और आज ईद है. यही हमारे देश की खूबसूरती है. इतना ही नहीं, चिश्ती ने पीएम मोदी की ‘सौगात-ए मोदी’ पहल की भी तारीफ की है.

वक्फ बिल पर बवाल क्यों?

बता दें कि इन दिनों वक्फ बोर्ड का मुद्दा चर्चा में है. सरकार का कहना है कि पुराने कानून में खामियां थीं. पहले वक्फ बोर्ड किसी भी जमीन पर दावा ठोक सकता था, बिना पुख्ता सबूत के. नए बिल में सत्यापन अनिवार्य होगा. संपत्तियों का डिजिटल रिकॉर्ड रखा जाएगा, ताकि पारदर्शिता बनी रहे. लेकिन कुछ संगठनों को लगता है कि ये उनके अधिकारों पर हमला है. इसलिए ईद के मौके पर काली पट्टी बांधकर विरोध जताया गया. हालांकि, इस बीच अजमेर शरीफ वाले सैयद नसरुद्दीन चिश्ती ने इस बिल का समर्थन करके माहौल बना दिया है.

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