केरल के सूरज को 20 साल बाद मिला न्याय, हत्या मामले में 8 CPM कार्यकर्ताओं को उम्रकैद की सजा

7 अगस्त 2005 को सीपीएम के सदस्य सूरज ने बीजेपी जॉइन कर ली. लेकिन इस राजनीतिक बदलाव ने उसकी जिंदगी की उलझनों को और बढ़ा दिया. आरोपी सीपीएम कार्यकर्ताओं ने सूरज पर बम से हमला किया, फिर कुल्हाड़ी और छूरी से बेरहमी से उसे मार डाला.
Suraj Murder Case

आरोपियों को उम्रकैद की सजा

Suraj Murder Case: केरल के कन्नूर जिले से एक बड़ी खबर सामने आई है, जहां 2005 में बीजेपी कार्यकर्ता एलाम्बिलाय सूरज की हत्या के मामले में कोर्ट ने फैसला सुनाया है. यह मामला 20 साल पुराना है, लेकिन आखिरकार न्याय की प्रक्रिया ने आकार लिया. थलास्सेरी सत्र न्यायालय ने आठ सीपीएम कार्यकर्ताओं को सूरज की हत्या का दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है.

आखिर क्या था इस हत्या के पीछे का सच?

7 अगस्त 2005 को सीपीएम के सदस्य सूरज ने बीजेपी जॉइन कर ली. लेकिन इस राजनीतिक बदलाव ने उसकी जिंदगी की उलझनों को और बढ़ा दिया. आरोपी 8 सीपीएम कार्यकर्ताओं ने सूरज पर बम से हमला किया, फिर कुल्हाड़ी और छूरी से बेरहमी से उसे मार डाला.

इस जघन्य हत्या के बाद सूरज के माता-पिता ने 20 सालों तक न्याय की उम्मीद में संघर्ष किया. लेकिन अब, इस फैसले से उन्हें राहत मिली है. न्यायालय ने जिन आठ आरोपियों को दोषी ठहराया, उनमें टीके राजीश (45), पीएम मनोज के भाई मनोराज नारायणन, ई.वी. योगेश, के. शमजित, नेय्योथ सजीवन, प्रभाकरण, के.वी. पद्मनाभन, राधाकृष्णन और नागठांकोटा प्रकाशन भी शामिल हैं.

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शव के साथ किया गया था बेरहमी से सलूक

विशेष अभियोजक पी. प्रेमराजन ने बताया कि इस हत्या में केवल सूरज की जान नहीं ली गई, बल्कि उसके शव के साथ भी बेरहमी से सलूक किया गया. यह न केवल एक निर्दोष व्यक्ति की हत्या थी, बल्कि राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता ने उसे मौत की नींद सुला दिया.

अब इस मामले में 20 साल बाद न्याय मिलने से यह साबित हुआ कि देर से सही, लेकिन न्याय मिलता है. सूरज के माता-पिता की यात्रा अब शांति के साथ खत्म हो सकेगी, और यह फैसला यह सिखाता है कि राजनीति को कभी भी हिंसा का हथियार नहीं बनाना चाहिए.

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