‘राजा राज करेगा’…नेपाल में बांग्लादेश जैसे हालात क्यों? सड़कों पर बवाल काट रहे हैं लोग!

अब सवाल यह उठता है कि क्या नेपाल में हालात बांग्लादेश जैसे हो सकते हैं, जहां सरकार के खिलाफ जबरदस्त विरोध प्रदर्शन हुए थे और कई लोगों की जान गई थी? नेपाल की स्थिति अब तक तो वैसी नहीं हुई, लेकिन अगर हिंसा और असंतोष बढ़ते गए, तो देश में राजनीतिक हालात खराब हो सकते हैं.
Nepal Protests

नेपाल में तनाव

Nepal Protests: नेपाल में इन दिनों हालात बहुत ही तनावपूर्ण हैं. लोग सड़कों पर उतरकर राजशाही की वापसी की मांग कर रहे हैं. इस संघर्ष की वजह से हालात बहुत हिंसक हो गए हैं, और कुछ तो इसे बांग्लादेश जैसे हालात से जोड़ रहे हैं. आइए जानते हैं कि आखिर नेपाल में हो क्या रहा है और लोग इतने गुस्से में क्यों हैं?

नेपाल में हो क्या रहा है?

नेपाल के लोग मांग कर रहे हैं कि नेपाल में फिर से राजशाही बहाल की जाए. दरअसल, 2008 में नेपाल ने राजशाही को समाप्त कर दिया था और वहां लोकतंत्र की शुरुआत की थी. लेकिन पिछले कुछ सालों में नेपाल की राजनीतिक व्यवस्था में कई समस्याएं सामने आई हैं. 13 अलग-अलग सरकारों ने सत्ता संभाली है, लेकिन हर सरकार ने लोगों की उम्मीदों को पूरा नहीं किया. इस असंतोष के पीछे कई कारण हैं. सरकारी कामकाज में भ्रष्टाचार बढ़ गया है. लोगों की ज़िंदगी में मुश्किलें बढ़ी हैं. लगातार बदलती सरकारों ने देश को अस्थिर बना दिया है. इन सारी समस्याओं के कारण लोग राजशाही की वापसी की मांग कर रहे हैं. वे मानते हैं कि राजशाही के समय में देश ज्यादा स्थिर था.

‘राजा करेगा राज’ – क्या है इस आंदोलन की असली वजह?

नेपाल में हो रहे इस प्रदर्शन को हम राजशाही बहाली आंदोलन के नाम से जान सकते हैं. राजशाही समर्थक लोग, खासकर पूर्व राजा ज्ञानेंद्र शाह के समर्थक, मानते हैं कि अगर नेपाल में राजशाही फिर से बहाल हो, तो देश में शांति और व्यवस्था लौट सकती है. उनका कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था विफल हो चुकी है और राजनीतिक दलों ने सिर्फ सत्ता का खेल खेला है. यही वजह है कि लोग कह रहे हैं, “राजा आओ, देश बचाओ”. हजारों प्रदर्शनकारी राष्ट्रीय ध्वज और राजा की तस्वीरें लेकर नारे लगा रहे हैं.

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काठमांडू में हिंसा

फ्राइडे, यानी 28 मार्च को काठमांडू में राजशाही समर्थकों और सुरक्षा बलों के बीच हिंसक झड़प हो गई. इस झड़प में एक पत्रकार समेत दो लोगों की मौत हो गई और 30 से ज्यादा लोग घायल हो गए. यह हिंसा तब भड़की जब प्रदर्शनकारियों ने पुलिस बैरिकेड्स तोड़ने की कोशिश की और सुरक्षा बलों से भिड़ गए. इसके बाद काठमांडू के कुछ इलाकों में कर्फ्यू लगा दिया गया.

इसी के चलते नेपाल सरकार ने सेना को बुलाया और हालात को काबू में करने की कोशिश की. प्रधानमंत्री केपी ओली ने इमरजेंसी बैठक भी बुलाई, और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात कही.

क्या नेपाल में बन रहे बांग्लादेश जैसे हालात?

अब सवाल यह उठता है कि क्या नेपाल में हालात बांग्लादेश जैसे हो सकते हैं, जहां सरकार के खिलाफ जबरदस्त विरोध प्रदर्शन हुए थे और कई लोगों की जान गई थी? नेपाल की स्थिति अब तक तो वैसी नहीं हुई, लेकिन अगर हिंसा और असंतोष बढ़ते गए, तो देश में राजनीतिक हालात खराब हो सकते हैं. यही कारण है कि सरकार और प्रदर्शनकारी दोनों के लिए यह समय बहुत ही संवेदनशील है.

नेपाल में जो कुछ हो रहा है, वह केवल एक राजनीतिक असंतोष की कहानी नहीं है. यह असंतोष देश के विकास, शांति और राजनीतिक स्थिरता की कमी का परिणाम है. जब तक लोग अपने नेताओं से संतुष्ट नहीं होंगे, तब तक यह आंदोलन और विरोध जारी रहेगा. अब देखना यह होगा कि नेपाल के लोग और सरकार किस दिशा में जाते हैं. क्या राजशाही बहाल होती है, या फिर लोकतंत्र की राह पर बढ़ते हुए एक नई दिशा मिलती है?

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