“भारत की संस्कृति को मिटाने के लिए कई क्रूर प्रयास किए गए, लेकिन…”, नागपुर में बोले PM मोदी, RSS को बताया ‘वट वृक्ष’

मोहन भागवत ने आगे कहा कि ये समाज मेरा है. स्वयंसेवक हमेशा दूसरों के लिए काम करते हैं ना कि अपने लिए. समाज के लिए तन-मन-धन से काम करना है. हमें जीवन में सेवा और परोपकार करने चाहिए.
पीएम मोदी और मोहन भागवत

पीएम मोदी और मोहन भागवत

आज पीएम मोदी (PM Modi) आरएसएस के प्रतिपदा कार्यक्रम में शामिल होने के लिए नागपुर पहुंचे थे. इस दौरान सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि भारत की संस्कृति को मिटाने के लिए कई क्रूर प्रयास किए गए, लेकिन ऐसा कभी संभव नहीं हुआ. पीएम मोदी ने कहा कि आज राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) एक विशाल “वट वृक्ष” बन चुका है, जो भारतीय संस्कृति और राष्ट्र की चेतना को लगातार ऊर्जा प्रदान कर रहा है.

नवरात्रि और गौरवशाली संघ यात्रा का संगम

पीएम मोदी का यह बयान ऐसे वक्त पर आया जब महाराष्ट्र में औरंगजेब की कब्र को हटाने की मांग उठ रही है. पीएम मोदी ने बताया कि आज का दिन खास है, क्योंकि यह न सिर्फ चैत्र शुक्ल प्रतिपदा और नवरात्रि का प्रारंभ है, बल्कि आरएसएस के 100 साल पूरे होने का भी समय है. उन्होंने कहा कि इस पवित्र दिन पर उन्हें डॉ. साहब और पूज्य गुरुजी को श्रद्धांजलि अर्पित करने का अवसर मिला है.

अब गरीब का बच्चा भी बन सकेगा डॉक्टर: पीएम मोदी

प्रधानमंत्री मोदी ने मेडिकल शिक्षा में सुधार की बात करते हुए बताया कि उनकी सरकार ने मेडिकल कॉलेजों और एम्स की संख्या दोगुनी कर दी है. इसके अलावा, गरीबों के लिए बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं की दिशा में आयुष्मान भारत जैसी योजनाएं चल रही हैं. पीएम मोदी ने कहा कि अब किसी गरीब का बच्चा भी डॉक्टर बन सकेगा, क्योंकि उन्हें अपनी मातृभाषा में शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलेगा.

वहीं, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख डॉ. मोहन भागवत ने अपने संबोधन में संघ की यात्रा और उसके कार्यकर्ताओं की तपस्या की सराहना की. उन्होंने बताया कि संघ विचार की प्रेरणा से लाखों स्वयंसेवक समाज सेवा में जुटे हैं, और यह सेवा की साधना ही देश के हर कोने में सकारात्मक परिवर्तन ला रही है.

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क्या बोले मोहन भागवत?

मोहन भागवत ने आगे कहा कि ये समाज मेरा है. स्वयंसेवक हमेशा दूसरों के लिए काम करते हैं ना कि अपने लिए. समाज के लिए तन-मन-धन से काम करना है. हमें जीवन में सेवा और परोपकार करने चाहिए. स्वयंसेवकों के समाज के लिए डेढ़ लाख से ज्यादा काम चलते हैं. यही प्रेरणा है, जिससे स्वयंसेवकों को हमेशा कष्ट सहने की शक्ति मिलती है. इसके बदले में स्वयंसेवक कुछ नहीं चाहते. स्वयंसेवकों के जीवन का ध्येय ही सेवा है. सेवा के कार्य दयाभाव से नहीं बल्कि प्रेम भाव से चलते हैं. संघ का काम समाज के प्रति प्रेम और दूसरे समाज में सबको दृष्टि देना है.

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