खतना करवाकर पाकिस्तान में मेजर बना था भारत का ‘ब्लैक टाइगर’…अब अमेरिका तक हो रही है RAW की चर्चा!
जासूस रवींद्र कौशिक
RAW: पिछले दिनों अमेरिका के यूएस कमीशन ऑन इंटरनेशनल रिलीजियस फ्रीडम (USCIRF) ने अपनी 2025 की रिपोर्ट में भारत की खुफिया एजेंसी रॉ पर बैन लगाने की मांग की, यह कहते हुए कि भारत में धार्मिक अल्पसंख्यकों पर हमले बढ़ रहे हैं और RAW विदेश में सिख अलगाववादियों को निशाना बना रहा है. हालांकि, भारत ने ‘पक्षपाती और राजनीति से भरा’ कहकर रिपोर्ट को सिरे से खारिज कर दिया. लेकिन आज हम अमेरिका और भारत में रॉ को लेकर क्या बातचीत हुई है उस पर बात नहीं करेंगे बल्कि रॉ के एक ऐसे जांबाज की बात करेंगे, जिन्होंने पाकिस्तान और चीन को कई बार धूल चटाई.
थिएटर से सीधे रॉ में भर्ती
ये कहानी शुरू होती है राजस्थान के श्रीगंगानगर से, जहां 1952 में एक पंजाबी लड़का पैदा हुआ—नाम था रवींद्र कौशिक. बचपन से ही इस बंदे को नाटक का कीड़ा था. थिएटर में वो ऐसे रोल करता था कि लोग वाह-वाह कर उठते थे. एक दिन नाटक में वो इंडियन आर्मी अफसर बना, जिसे दुश्मन पकड़ लेता है. वो डायलॉग मारता है, “मुझे मार डालो, पर देश का राज नहीं खोलूंगा!” बस, वहां बैठे एक रॉ अधिकारी सबकुछ देख रहे थे. उन्होंने रवींद्र को ऑफर दी. रॉ में शामिल हो जाओ.
ट्रेनिंग से लेकर पाकिस्तान तक का सफर
23 साल की उम्र में रवींद्र रॉ में शामिल हो गए. दो साल तक उन्हें ट्रेनिंग दी गई. जासूसी के सारे फंडे, उर्दू की क्लास, और यहां तक कि खतना भी करवा दिया ताकि वो ‘पक्का मुसलमान’ लगने लगे. फिर नवंबर 1975 की एक काली रात को उन्हें पाकिस्तान में ड्रॉप कर दिया गया. नाम रखा गया ‘नबी अहमद शाकिर’.
पाकिस्तान पहुंचते ही रवींद्र ने कराची की लॉ यूनिवर्सिटी में एडमिशन लिया. पढ़ाई पूरी की, और फिर सीधे पाकिस्तानी सेना में भर्ती हो गए. अब ये कोई छोटा-मोटा जॉब नहीं था—वो कमीशन अफसर बने, और फिर मेजर रैंक तक पहुंच गए. सोचिए, एक भारतीय जासूस दुश्मन की फौज में मेजर बनकर घूम रहा है.
“ब्लैक टाइगर” का जलवा
1979 से 1983 तक रवींद्र ने ऐसा खेल खेला कि पाकिस्तान के होश उड़ गए. वो वहां की सारी सीक्रेट प्लानिंग भारत को भेजते रहे. इंदिरा गांधी इतनी खुश हुईं कि बोलीं, “इस बंदे का नाम रखो ब्लैक टाइगर. रवींद्र ने वहां शादी भी कर ली, एक बेटी का बाप बने, उर्दू में फर्राटे मारने लगे. यानी पूरी तरह से वहां सेट हो गए.
अपनों ने ही दे दिया धोखा!
लेकिन कहानी में विलेन तो बनता है ना? 1983 में रॉ ने एक और जासूस इनायत मसीहा को भेजा. ये भाई बॉर्डर पर ही पकड़े गए. पाकिस्तानी सेना ने जब मसीहा से पूछताछ की तो उन्होंने बता दिया कि रवींद्र कौशिक हमारा आदमी है. इसके बाद रवींद्र को गिरफ्तार कर लिया गया.
पाकिस्तान ने उनसे भारत के राज पूछे. लेकिन, उन्होंने कुछ नहीं बताया. 1985 में उन्हें फांसी की सजा सुनाई गई, लेकिन बाद में उम्रकैद में बदल दी. 2001 में मियांवाली जेल में दिल का दौरा पड़ा, और हमारा हीरो अलविदा कह गया. लेकिन उन्होंने कभी देश को धोखा नहीं दिया.
रॉ का ‘खेल’
अब थोड़ा रॉ के बारे में भी जान लीजिए. ये एजेंसी 1968 में शुरू हुई थी. पहले चीन को कंट्रोल करना था मकसद, लेकिन बाद में पाकिस्तान बना इसका ‘फेवरेट दुश्मन’. रॉ और ISI एक-दूसरे के पीछे पड़े हैं जैसे टॉम एंड जेरी. कश्मीर में तो इनका रोज का ड्रामा है, और अब अफगानिस्तान में भी मस्ती शुरू हो गई है.
पाकिस्तान चिल्लाता ऱहा है, “रॉ हमारे बलूचिस्तान में गड़बड़ कर रहा है!” रॉ जवाब देता है, “और तुमने काबुल में हमारे दूतावास पर बम फोड़ा था.” अब अमेरिका ने कहा है कि रॉ को बैन किया जाए. लेकिन भारत ने भी माकूल जवाब दे दिया है.