वक्फ बिल पर माने गए TDP और JDU के सुझाव! लोकसभा में विधेयक पास होने की राह आसान
नीतीश कुमार और चंद्रबाबू नायडू
Waqf Amendment Bill: वक्फ (संशोधन) विधेयक में तेलुगु देशम पार्टी (TDP) के तीनों सुझावों को स्वीकार कर लिया गया है. इसके साथ ही टीडीपी ने इस विधेयक को अपना पूरा समर्थन देने का ऐलान किया है. पार्टी ने फैसला लिया है कि वह कल लोकसभा में इस बिल के पक्ष में मतदान करेगी. दूसरी ओर, जनता दल यूनाइटेड के प्रस्तावों को भी विधेयक में शामिल कर लिया गया है. ऐसे में माना जा रहा है कि नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू भी लोकसभा में इस बिल का समर्थन कर सकती है.
टीडीपी के प्रमुख संशोधन
टीडीपी ने विधेयक में कई अहम बदलावों का प्रस्ताव रखा था, जिन्हें सरकार ने स्वीकार कर लिया है. पहला संशोधन ‘वक्फ बाय यूजर’ से संबंधित है. इसके तहत यह प्रावधान जोड़ा गया है कि जो भी ‘वक्फ बाय यूजर’ संपत्तियां वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 के लागू होने से पहले पंजीकृत हो चुकी हैं, वे वक्फ संपत्तियां बनी रहेंगी. हालांकि, यह नियम तभी लागू होगा जब संपत्ति किसी विवाद में शामिल न हो या सरकारी संपत्ति न हो. इस संशोधन को विधेयक में शामिल कर लिया गया है.
दूसरा संशोधन वक्फ मामलों में कलेक्टर की भूमिका से जुड़ा है. टीडीपी ने सुझाव दिया था कि कलेक्टर को वक्फ मामलों का अंतिम प्राधिकारी न माना जाए. इसके बजाय, राज्य सरकार एक अधिसूचना जारी कर कलेक्टर से ऊंचे पद के अधिकारी को नामित कर सकती है, जो कानून के अनुसार जांच करेगा. यह प्रस्ताव भी विधेयक का हिस्सा बन गया है. तीसरा संशोधन डिजिटल दस्तावेजों की समय-सीमा बढ़ाने से संबंधित था. अब यदि ट्रिब्यूनल को देरी का कारण उचित लगता है, तो वक्फ को डिजिटल दस्तावेज जमा करने के लिए अतिरिक्त 6 महीने का समय दिया जा सकेगा. यह प्रावधान भी विधेयक में जोड़ा गया है.
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टीडीपी और जेडीयू का रुख
टीडीपी के इन संशोधनों को स्वीकार किए जाने के बाद पार्टी ने विधेयक के समर्थन में मतदान करने का फैसला किया है. पार्टी का मानना है कि ये बदलाव वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन और पारदर्शिता को बेहतर बनाएंगे. उधर, जेडीयू के सुझावों को भी विधेयक में जगह मिलने से संकेत मिल रहे हैं कि नीतीश कुमार की पार्टी भी इस बिल के पक्ष में खड़ी हो सकती है. हालांकि, जेडीयू की ओर से अभी आधिकारिक घोषणा का इंतजार है.
विधेयक में क्या है खास?
वक्फ (संशोधन) विधेयक का उद्देश्य वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में सुधार लाना और उनके दुरुपयोग को रोकना है. इस विधेयक में डिजिटलीकरण को बढ़ावा देने, विवादों के निपटारे के लिए बेहतर तंत्र स्थापित करने और पारदर्शिता सुनिश्चित करने जैसे कदम शामिल हैं. टीडीपी और जेडीयू जैसे क्षेत्रीय दलों का समर्थन मिलने से इस विधेयक के लोकसभा में पारित होने की संभावना और मजबूत हो गई है.