जिस मंदिर में सभा करने पहुंचे थे कन्हैया कुमार, उसका गंगाजल से हुआ शुद्धिकरण! बीजेपी-कांग्रेस आमने सामने
कांग्रेस नेता नीतीश कुमार
Bihar Politics: कांग्रेस नेता इन दिनों बिहार में ‘पलायन रोको-नौकरी दो’ पदयात्रा कर रहे हैं. उनकी यात्रा कई गावों से होकर निकल रही है. इसी कड़ी में मंगलवार की रात कांग्रेस नेता कन्हैया कुमार सहरसा के बनगांव के एक दुर्गा मंदिर पहुंचे थे. यहां उन्होंने स्थानीय लोगों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ एक सभा को संबोधित किया.
लेकिन इसके बाद बुधवार को एक चौंकाने वाली घटना सामने आई. दरअसल, कुछ स्थानीय युवकों ने कन्हैया कुमार के भाषण वाले स्थान को गंगाजल से धो दिया. अब इस पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही है.
गंगाजल से मंदिर की सफाई
बनगांव के दुर्गा मंदिर प्रांगण को गंगाजल से धोने का यह कदम स्थानीय युवाओं ने उठाया. इस काम को नगर पंचायत के वार्ड पार्षद प्रतिनिधि अमित चौधरी और उनके साथी विष्णु, माखन, आनंद, सूरज, सरोज और बादल ने मिलकर अंजाम दिया. इन युवकों का कहना था कि कन्हैया कुमार पर देशद्रोह का आरोप लग चुका है. उन्होंने विवादित बयान दिया था.
दूसरी ओर, कन्हैया कुमार इस पर कुछ कहने से बचते नजर आए हैं. हालांकि, यह घटनाक्रम अब पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया है. कन्हैया कुमार ने इस मामले पर टिप्पणी करने से साफ तौर पर इनकार कर दिया है. हालांकि, कांग्रेस की ओर से बयान आया है.
भगवान परशुराम का अपमान- कांग्रेस
कांग्रेस प्रवक्ता ज्ञान रंजन गुप्ता ने कहा, “क्या केवल बीजेपी और आरएसएस समर्थक ही धार्मिक हो सकते हैं और बाकी सभी लोग अछूत माने जाएंगे?” उन्होंने इस कृत्य को भगवान परशुराम के वंशजों का अपमान बताया और सवाल उठाया कि क्या भारत अब अति-संस्कृतिकरण के एक नए दौर में प्रवेश कर चुका है, जहां गैर-बीजेपी दलों और समर्थकों को अछूत माना जाएगा?
वहीं, बीजेपी प्रवक्ता असित नाथ तिवारी ने कहा, “हमें सबसे पहले यह सत्यापित करना चाहिए कि कन्हैया कुमार के दौरे के बाद मंदिर को धोने वालों की पहचान क्या है. अगर ऐसा सचमुच हुआ है, तो यह इस बात का संकेत है कि लोग कन्हैया कुमार की राजनीति को खारिज कर रहे हैं.”
स्थानीय लोगों का क्या कहना है?
बनगांव के स्थानीय लोग इस घटना से हैरान हैं. उनका कहना है कि यह मंदिर सभी समुदायों और वर्गों के लोगों के लिए एक धार्मिक स्थल है और इस तरह की घटनाएं सामाजिक सौहार्द को बिगाड़ सकती हैं.
कन्हैया कुमार की यात्रा जो 16 मार्च को पश्चिमी चंपारण से शुरू हुई थी, अब बिहार के विभिन्न हिस्सों में चर्चा का विषय बन गई है. उनका यह अभियान 31 मार्च को किशनगंज में समाप्त होगा, लेकिन इस विवाद ने इस यात्रा को और भी सुर्खियों में ला दिया है. इस घटना ने बिहार की राजनीति में एक नई बहस को जन्म दे दिया है. क्या धार्मिक स्थलों को राजनीति से जोड़ना उचित है?