महिलाओं को अधिकार से वंचित रखना चाहते हैं मौलाना! ऐसे ही नहीं हो रहा है ‘वक्फ बिल’ का विरोध, समझिए पूरी ABCD
वक्फ बिल का विरोध
Waqf Amendment Bill: वक्फ एक इस्लामी परंपरा है जिसमें कोई मुस्लिम अपनी संपत्ति (जमीन, मकान, दुकान आदि) को अल्लाह के नाम पर दान कर देता है. यह दान आमतौर पर धार्मिक, सामाजिक या गरीबों की मदद के लिए होता है, जैसे मस्जिद, मदरसा, कब्रिस्तान या अनाथालय चलाने के लिए. एक बार संपत्ति वक्फ में दे दी जाए, तो वह हमेशा के लिए वक्फ की रहती है, न बेची जा सकती है, न ही किसी और के नाम की जा सकती है. इसकी देखभाल और प्रबंधन का जिम्मा वक्फ बोर्ड के पास होता है. भारत में 30 राज्य वक्फ बोर्ड और एक केंद्रीय वक्फ परिषद है जो इसे संभालते हैं.
वक्फ बिल क्या है?
वक्फ बिल यानी ‘वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2024’ भारत सरकार का एक नया कानून है, जो पुराने वक्फ कानून (1995) में बदलाव लाने के लिए बनाया गया है. यह बिल आज 2 अप्रैल को लोकसभा में पेश होने वाला है. सरकार का कहना है कि यह बदलाव वक्फ संपत्तियों को बेहतर तरीके से चलाने, पारदर्शिता लाने और मुस्लिम महिलाओं व गरीबों को फायदा पहुंचाने के लिए हैं. लेकिन विपक्ष और कई मुस्लिम संगठन इसे मुस्लिम समुदाय के अधिकारों पर हमला मानते हैं, जिसके चलते विवाद हो रहा है.
वक्फ बिल में क्या बदलाव होने जा रहे हैं?
इस बिल के कानून बन जाने से संपत्ति पर दावा करने का तरीका बदलेगा. इतना ही नहीं, इसमें मुस्लिम महिलाओं की भागीदारी भी बढ़ जाएगी. इसे आसान भाषा में समझते हैं.
पहले: वक्फ बोर्ड अगर किसी जमीन को अपनी संपत्ति मान लेता था, तो वह उस पर दावा कर सकता था. मालिक को कोर्ट में साबित करना पड़ता था कि यह उसकी निजी जमीन है.
अब: बिना दान के सबूत (वक्फनामा) के वक्फ बोर्ड दावा नहीं कर सकेगा. साथ ही, जिला कलेक्टर यह जांचेगा कि जमीन वक्फ की है या नहीं.
असर: सरकार का कहना है कि इससे फर्जी दावे रुकेंगे, लेकिन विरोध करने वाले कहते हैं कि पुरानी मस्जिदों-कब्रिस्तानों के दस्तावेज न होने से वे खतरे में पड़ सकते हैं.
वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिम और महिलाएं शामिल होंगी
पहले: वक्फ बोर्ड में सिर्फ मुस्लिम पुरुष ही होते थे.
अब: बोर्ड में दो गैर-मुस्लिम सदस्य और कम से कम दो महिलाएं शामिल होंगी.
असर: सरकार कहती है कि इससे बोर्ड में सबकी हिस्सेदारी बढ़ेगी और महिलाओं को अधिकार मिलेगा. लेकिन विरोधी कहते हैं कि गैर-मुस्लिमों को शामिल करना धार्मिक स्वायत्तता के खिलाफ है. क्योंकि दक्षिण में कई ऐसे संस्थान हैं जिसमें सिर्फ खास वर्ग के लोगों को ही शामिल किया गया है.
संपत्ति का रजिस्ट्रेशन जरूरी
पहले: वक्फ संपत्तियों का रिकॉर्ड ठीक से नहीं रखा जाता था.
अब: सभी वक्फ संपत्तियों को 6 महीने में ऑनलाइन पोर्टल पर रजिस्टर करना होगा. नई संपत्ति को 15 दिन में अपलोड करना होगा.
पहले: वक्फ ट्रिब्यूनल ही संपत्ति विवादों का आखिरी फैसला करता था.
अब: ट्रिब्यूनल के फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी जा सकेगी.
कौन वक्फ को दान कर सकता है?
पहले: कोई भी वक्फ बना सकता था, चाहे वह मुस्लिम हो या नहीं.
अब: सिर्फ वही शख्स वक्फ बना सकता है जो कम से कम 5 साल से इस्लाम का पालन कर रहा हो और संपत्ति का मालिक हो.
वक्फ बाय यूज
यह वक्फ का एक प्रकार है जिसमें कोई मुस्लिम अपनी संपत्ति को आम लोगों के फायदे के लिए दान करता है. इसका मतलब है कि यह संपत्ति धार्मिक या सामाजिक कामों के लिए इस्तेमाल होती है, जैसे मस्जिद बनाना, कब्रिस्तान तैयार करना, गरीबों को खाना देना या स्कूल चलाना. इसे ‘वक्फ-ए-खैर’ भी कहते हैं. इसमें संपत्ति सबके लिए खुली होती है और इसका मकसद समाज की भलाई होता है. एक बार दान देने के बाद, यह हमेशा वक्फ की रहती है और निजी इस्तेमाल नहीं हो सकता. यहां एक बात और है कि नए बिल के मुताबिक, अब वक्फ संपत्ति को स्टांप पर डिक्लेयर करना होगा, देश भर में ऐसी कई संपत्तियां है, जिसे वक्फ अपना मानता है, लेकिन उसका कोई दस्तावेज नहीं है.
वक्फ अल औलाद
यह वक्फ का दूसरा प्रकार है, जिसमें संपत्ति को अपने परिवार या बच्चों के लिए दान किया जाता है. इसका मतलब है कि दान देने वाला अपनी जमीन या मकान को इस तरह वक्फ करता है कि उसका फायदा पहले उसके बच्चों, नाती-पोतियों को मिले. अगर परिवार की जरूरत खत्म हो जाए, तभी यह संपत्ति आम लोगों या धार्मिक कामों के लिए इस्तेमाल होती है. इसे ‘वक्फ-ए-औलाद’ कहते हैं. यह परिवार की आर्थिक मदद के लिए बनाया जाता है, लेकिन आखिर में यह भी अल्लाह के नाम पर ही रहता है. कई बार ऐसा देखा गया है कि जब परिवार में कोई पुरुष नहीं बचता है तो महिलाओं की संपत्ति वक्फ को दे दी जाती है, इससे महिला अपने अधिकार से वंचित रह जाती है. सरकार इस बिल के जरिए महिलाओं को अधिकार देने की बात कर रही है.
विवाद क्यों हो रहा है?
वक्फ बिल को लेकर दो पक्ष हैं—सरकार और समर्थक इसे जरूरी सुधार मानते हैं, जबकि विपक्ष और मुस्लिम संगठन इसे खतरा बता रहे हैं. दोनों की बातें ऐसे समझिए. सरकार का कहना है कि वक्फ बोर्ड के पास 9.4 लाख एकड़ जमीन है, जिसकी कीमत 1.2 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा है. सरकार कहती है कि इसका गलत इस्तेमाल रोकने के लिए नियम सख्त करना जरूरी है. दूसरी बात ये कि बोर्ड में महिलाओं को जगह देकर उनके हक की बात हो रही है. पुराने नियमों से कई जगहों (जैसे गांव, मंदिर, होटल) पर वक्फ के दावे हुए, जो गलत थे. नए नियम इसे रोकेंगे.
विपक्ष और मुस्लिम संगठनों का पक्ष
विपक्ष का कहना है कि वक्फ धार्मिक दान है, इसमें सरकार का दखल और गैर-मुस्लिमों की नियुक्ति गलत है. वहीं, बिना दस्तावेज वाली पुरानी वक्फ संपत्तियां (मस्जिद, कब्रिस्तान) खो सकती हैं. विरोधी कहते हैं कि यह संविधान के तहत धार्मिक आजादी और समानता के खिलाफ है. इसे उदाहरण से समझिए. दरअसल, तमिलनाडु में एक हिंदू गांव को वक्फ ने अपनी संपत्ति बताया था. बेंगलुरु का ईदगाह मैदान और सूरत का नगर निगम भवन भी वक्फ के दावे में आ चुके हैं. ऐसे मामलों से लोग डरते हैं कि वक्फ की शक्ति का दुरुपयोग हो रहा है, और नए नियम इसे और जटिल बना सकते हैं.
बिल का भविष्य क्या?
वक्फ बिल को लेकर संसद में तीखी बहस होने की उम्मीद है. सरकार के पास बहुमत है, इसलिए इसे पास कराने में दिक्कत नहीं होगी. लेकिन विपक्ष और मुस्लिम संगठन सड़कों पर उतर आए हैं. ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने बड़े आंदोलन की घोषणा की है. यह बिल अगर कानून बना, तो वक्फ बोर्ड की शक्तियां कम होंगी और उसका ढांचा बदल जाएगा. लेकिन सवाल यह है—क्या यह वाकई मुस्लिम समुदाय के लिए फायदेमंद होगा, या इससे नए विवाद पैदा होंगे? यह समय बताएगा.