10 बेटियों के बाद पूरा हुआ सपना, महिला ने दिया बेटे को जन्म, पिता को याद नहीं किसी बेटी का नाम!
10 बेटियों के बाद मां ने बेटे को जन्म दिया
Haryana News: आज से दशकों पहले जब घर में बेटियों का जन्म होता था, तब लोग बेटे की चाह रखते थे. लेकिन हैरानी की बात यह है कि आधुनिक दौर में भी यह सोच पूरी तरह खत्म नहीं हुई है. आज भी कई परिवार यही चाहते हैं कि उनके घर बेटा जन्म ले, जिसे भविष्य में जीवन का सहारा माना जाता है. इसी सोच को दर्शाता हरियाणा के फतेहाबाद से एक अजब-गजब मामला सामने आया है, जहां एक दंपत्ति ने बेटे की उम्मीद में शादी के पूरे 19 साल तक इंतजार किया. आखिरकार उनके घर बेटे का जन्म हुआ, लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि इससे पहले दंपत्ति की 10 बेटियां हैं और यह बेटा उनकी 11वीं संतान है.
लंबे इंतजार के बाद मिली इस खुशी ने न सिर्फ माता-पिता बल्कि पूरे परिवार को खुशियों से भर दिया है और इसकी चर्चा दूर-दूर के गांवों-शहरों तक हो रही है.
19 सालों में 10 बेटियों का जन्म
दरअसल, यह मामला हरियाणा के फतेहाबाद के भूना ब्लॉक स्थित ढाणी भोजराज गांव का है. यहां के निवासी संजय और उनकी पत्नी सुनीता की शादी को 19 साल हो चुके हैं और पिछले 19 वर्षों में एक के बाद एक 10 बेटियों ने जन्म लिया. आमतौर पर जहां समाज में बेटियों के साथ भेदभाव किया जाता है, वहीं ये दंपति अपनी सभी बेटियों को बिना किसी भेदभाव के बेटों की तरह प्यार और सम्मान के साथ पाल-पोस रहे हैं.
पिता भूले बेटियों का नाम
आज के समय में नॉर्मल डिलीवरी होना चुनौतीपूर्ण माना जाता है, लेकिन हाल ही में सुनीता ने अपने 11वें बच्चे को जन्म दिया, जिसकी डिलीवरी पूरी तरह से नॉर्मल हुई. इससे पहले उन्होंने जिन 10 बेटियों को जन्म दिया था, वे भी नॉर्मल डिलीवरी से ही हुई थीं. जब सुनीता के पति संजय से एक महिला पत्रकार ने उनकी बेटियों के नाम पूछे, तो संजय अपनी ही बेटियों के नाम नहीं बता पाए. उन्होंने कहा कि वे खुशी के कारण नाम भूल रहे हैं. उन्होंने आगे बताया कि डिलीवरी घर से करीब 50 किलोमीटर दूर एक निजी अस्पताल में हुई थी. जन्म के समय बच्चे के शरीर में खून की काफी कमी थी, जिसके कारण डॉक्टरों को उसे तुरंत खून चढ़ाना पड़ा. हालांकि, अब बच्चे और मां दोनों पूरी तरह से सुरक्षित हैं.
बेटे के जन्म से परिवार में खुशी का माहौल
19 वर्षों के बाद जब संजय के घर बेटे का आगमन हुआ, तब उनकी मां माया देवी की खुशी का ठिकाना नहीं रहा. उन्हें लगा जैसे ईश्वर ने उनकी बरसों पुरानी प्रार्थना स्वीकार कर ली हो. वहीं पिता कपूर सिंह जो लोक निर्माण विभाग (PWD) में बेलदार थे, उनके निधन के बाद से परिवार की पूरी जिम्मेदारी संजय के कंधों पर आ गई थी.
एक बेटी को रिश्तेदार ने लिया गोद
संजय अपनी 10 बेटियों के पिता हैं, जिनमें से एक को उनके अपने ही रिश्तेदार ने गोद लिया है, जबकि अन्य 9 बेटियों का पालन-पोषण वे स्वयं पूरी जिम्मेदारी के साथ कर रहे हैं. उनका मानना है कि बेटियां किसी भी मामले में बेटों से कम नहीं होतीं. संजय का लक्ष्य अपनी सभी बेटियों को अच्छी शिक्षा दिलाकर उन्हें सशक्त और आत्मनिर्भर बनाना है.
दम्पत्ति को किया जाएगा सम्मानित
19 वर्षों तक बेटियों की परवरिश करने के बाद संजय और सुनीता के घर बेटे का जन्म पूरे परिवार के लिए खुशियां और नई उम्मीदें लेकर आया है. ढाणी भोजराज गांव में यह कहानी चर्चा का विषय बनी हुई है. वहीं गांव की सरपंच ज्योति देवी ने दंपति को सम्मानित करने का फैसला लिया है. उनका कहना है कि संजय और सुनीता का जीवन उन लोगों के लिए एक बड़ी प्रेरणा है जो बेटियों को बोझ समझते हैं.