बोर्ड परीक्षा देकर लौटे छात्रों से कभी न पूछें ये 5 सवाल, मानसिक सेहत पर पड़ेगा बुरा असर
बोर्ड परीक्षा के बाद छात्रों से सवाल न पूछें
Exam Stress In Students: देश के कई राज्यों में बोर्ड परीक्षाएं शुरू हो चुकी हैं और 10वीं-12वीं के छात्र पूरी मेहनत और लगन के साथ पेपर दे रहे हैं. बोर्ड परीक्षाएं छात्रों के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण होती हैं. जब तक परीक्षाएं चलती हैं तब तक छात्रों के मन में डर, चिंता और एंग्जायटी बनी रहती है. इसी बीच अक्सर देखा गया है कि जब भी छात्र पेपर देकर घर वापस आते हैं, तो इंडियन पेरेंट्स उनसे कुछ ऐसे सवाल पूछने लगते हैं, जिनसे छात्र एंग्जायटी, चिड़चिड़ापन और तनाव का शिकार होने लगते हैं. ऐसे में अगर आपका बच्चा भी बोर्ड परीक्षा दे रहा है, तो उसके घर आने के बाद उससे ये पांच सवाल कभी न पूछें.
क्या बच्चों से मार्क्स के बारे में पूछना चाहिए?
पेपर खत्म होते ही बच्चों से मार्क्स के बारे में पूछना या ‘पास तो हो जाओगे ना’ जैसे सवाल करना उन्हें भारी तनाव में डाल सकता है. इससे बच्चा अपने बीते हुए पेपर की कमियों के बारे में सोचकर घबराने लगता है और अगले पेपर की तैयारी पर ध्यान नहीं दे पाता. इसके बजाय उनसे बस इतना पूछें कि पेपर कैसा रहा और अगले एग्जाम की तैयारी के लिए उनका उत्साह बढ़ाएं.
गलतियों के बारे में न पूछे
एग्जाम के प्रेशर में अक्सर बच्चों से छोटी-मोटी गलतियां हो जाती हैं. घर आते ही गलतियों के बारे में पूछने से बच्चा स्ट्रेस में आ जाता है. अगर उसे अपनी गलती का एहसास है, तो उसे डांटने के बजाय समझाएं कि जो हो गया उसे बदला नहीं जा सकता, लेकिन अगले पेपर में वह और भी सावधानी बरत सकता है.
बच्चों को अच्छे प्रतिशत के लिए फोर्स न करें
- पेरेंट्स अक्सर हर पेपर के बाद परसेंटेज का टारगेट सेट करने लगते हैं.
- बार-बार अच्छे नंबरों या अच्छे प्रतिशत का दबाव बच्चों को मानसिक रूप से थका देता है.
- बच्चे से कहें कि रिजल्ट की चिंता छोड़कर केवल अपनी मेहनत और ईमानदारी पर भरोसा रखे.
क्या अपने बच्चे की तुलना दूसरे से करना चाहिए?
- बोर्ड परीक्षा के समय अपने बच्चे की तुलना पड़ोसियों या रिश्तेदारों के बच्चों से करना सबसे बड़ी गलती है.
- हर बच्चे की अपनी क्षमता होती है. तुलना करने से वह बेहतर करने के बजाय तनाव में आकर और भी खराब प्रदर्शन कर सकता है.
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रिश्तेदारों की चिंता का दबाव छात्रों पर न डालें
कई बार माता-पिता अपनी इज्जत का डर बच्चों पर डाल देते हैं. जैसे-रिश्तेदार क्या कहेंगे या हमारी नाक मत कटवाना. यह कहकर बच्चे के दिमाग में डर और चिंता डाल देते हैं. इसके कारण वह पढ़ाई से ज्यादा लोगों की बातों के बारे में सोचने लगता है. उसे भरोसा दिलाएं कि समाज से ज्यादा आपके लिए उसकी मेहनत और मानसिक शांति मायने रखती है.