हमेशा एक ही करवट पर क्यों आती है चैन की नींद? जानिए इसके पीछे का मनोवैज्ञानिक कारण
Sleeping Position: दाईं ओर करवट करके सोने में सबसे अच्छी नींद आती है. शरीर के अंगों और नसों पर कम दबाव पड़ता है. वहीं बाईं तरफ करवट करके सोना एसिडिटी या पेट की जलन वाले लोगों के लिए अच्छा माना जाता है.
किस साइड सोना सही है
Sleeping Position: बहुत से लोग बिस्तर पर लेटते ही हमेशा एक ही करवट सोना पसंद करते हैं. चाहे कमरा कितना भी आरामदायक क्यों न हो, मन अपने-आप उसी साइड की ओर चला जाता है जहां नींद अच्छी आती है. कुछ लोग बाईं करवट सोना पसंद करते हैं, तो कुछ लोग दाईं करवट. इसके पीछे केवल आदत ही नहीं, बल्कि शरीर और दिमाग से जुड़ी कुछ वजहें भी होती हैं. आइए जानते हैं इसके पीछे छिपे मनोविज्ञान के बारे में.
क्या है सोने का सही तरीका ?
- दाईं ओर करवट करके सोने में सबसे अच्छी नींद आती है.
- शरीर के अंगों और नसों पर कम दबाव पड़ता है.
- वहीं बाईं तरफ करवट करके सोना एसिडिटी या पेट की जलन वाले लोगों के लिए अच्छा माना जाता है.
- बाईं तरफ करवट करके सोना गर्भवती महिलाओं के लिए सुरक्षित है.
- पेट और खाना सही जगह रहता है.
- पीठ के बल सोने से नींद बार-बार टूट सकती है.
- इसके अलावा, खर्राटे या स्लीप एपनिया का खतरा ज्यादा बढ़ सकता है.
क्या है सुरक्षा और दिमाग का खेल ?
- बिस्तर की साइड चुनने में सिर्फ आराम ही नहीं, बल्कि सुरक्षा की भावना भी होती है.
- हमारा अचेतन मन सुरक्षा तलाशता है.
- मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, दीवार की तरफ सोने वाले लोग खुद को सुरक्षित महसूस करते हैं.
- वहीं दरवाजे के पास सोने वाले लोग अपने आप को ‘रक्षक’ की तरह मानते हैं.
- ये लोग खतरे के समय जल्दी भागने का रास्ता पास रखना चाहते हैं.
- हमारी दिमाग पुरानी और परिचित जगह को ‘कंफर्ट’ मानता है, जैसे क्लास या ऑफिस में वही सीट चुनना.
क्या है पर्सनैलिटी का कनेक्शन ?
- आपकी सोने की साइड आपकी पर्सनालिटी के बारे में भी कुछ बता सकती है.
- बाईं ओर करवट करके सोने वाले लोगों के जीवन में ज्यादा खुश और आशावादी होते हैं.
- दाईं करवट सोने: वाले थोड़े गंभीर और रूटीन फॉलो करने वाले होते हैं.
- करवट लेकर सोना दिमाग के लिए अच्छा होता है.
- जानवरों पर स्टडी में दिखा कि करवट लेकर सोने से दिमाग के टॉक्सिन्स आसानी से बाहर निकलते हैं.
- इससे भविष्य में अल्जाइमर जैसी भूलने की बीमारी का खतरा कम हो सकता है.
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हम साइड क्यों नहीं बदल पाते?
- एक बार जब फेवरेट साइड तय हो जाती है, तो उसे बदलना मुश्किल होता है.
- इसका कारण मसल्स मेमोरी और मनोवैज्ञानिक आदत होती है.
- हमारा दिमाग उस खास साइड को नींद और सुरक्षा से जोड़ लेता है.
- इसी वजह से होटल या नए घर में साइड बदलने पर बेचैनी महसूस होती है.
- दिमाग को पुरानी और जानी-पहचानी जगह में ही ज्यादा आराम मिलता है.