क्या है वृंदावन वाले प्रेमानंद महाराज का असली नाम? 13 साल की उम्र में छोड़ दिया था घर, कैसे शुरू हुई आध्यात्मिक यात्रा?

Premanand Maharaj: क्या आप वृंदावन वाले प्रेमानंद महाराज का असली नाम जानते हैं. उन्होंने 13 साल की उम्र में दीक्षा ग्रहण कर ली थी. जानिए उनकी आध्यात्मिक यात्रा के बारे में-
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प्रेमानंद महाराज

Premanand Maharaj: वृंदावन के मशहूर प्रमेनांद महाराज के पास बड़ी संख्या में लोग अपने-अपने सवाल लेकर पहुंचते हैं. उनकी कथा, प्रवचन और सुझाव अक्सर चर्चाओं में रहते हैं, लेकिन क्या आप उनका असली नाम जानते हैं. क्या आप जानते हैं कि उन्होंने 13 साल की उम्र में ही दीक्षा ग्रहण कर ली थी. जानें उनके बारे में-

प्रेमानंद महाराज का असली नाम क्या है?

प्रेमानंद महाराज का असली नाम अनिरुद्ध कुमार पांडे है. उनका जन्म कानपुर में हुआ है. प्रेमानंद महाराज को बचपन से ही भक्ति और आध्यात्म में गहरी रुचि थी. उन्होंने सिर्फ 13 साल की उम्र में ही दीक्षा ग्रहण कर के अपनी आध्यात्मिक यात्रा शुरू कर दी थी.

कैसे मिला प्रेमानंद महाराज नाम?

अपनी आध्यात्मिक यात्रा शुरू करने के बाद प्रेमानंद महाराज राधा वल्लभ संप्रदाय से जुड़े. इसके बाद उनका अनिरुद्ध पांडे से आनंद स्वरूप ब्रह्मचारी हो गया. बाद में वह मथुरा-वृंदावन आ गए. उन्होंने राधा-कृष्ण की भक्ति में अपना जीवन लगाने का फैसला किया.

उन्होंने मथुरा के बांके बिहारी मंदिर में सेवा की. इसके बाद वृंदावन का राधावल्लभ मंदिर प्रेमानंद महाराज की तपोस्थली बन गया. यहां 10 साल तक उन्होंने गौरांगी शरण महाराज की संगत की और यहां ही श्री राधा राधावल्लभी संप्रदाय में दीक्षा भी ग्रहण की, जिसके बाद उनका नाम प्रेमानंद गोविंद शरण यानी प्रेमानंद महाराज हो गया.

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प्रेमानंद महाराज की तबीयत खराब

बता दें कि हाल ही में प्रेमानंद महाराज की तबीयत ज्यादा खराब हो गई थी. जानकारी के मुताबिक प्रेमानंद जी महाराज की दोनों किडनियां बीते कई सालों से खराब है. इसके बावजूद वह हमेशा ध्यान, प्रवचन और सत्संग करते रहते हैं. कहा जाता है कि प्रेमानंद महाराज ने अपनी दोनों किडनियों का नाम भी राधा और कृष्ण रखा है.

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