कभी ‘बंदूक के साए’ में होता था तेंदूपत्ता व्यापार, बालाघाट में नक्सलमुक्त होने के बाद 45 करोड़ के कारोबार का अनुमान

बालाघाट नक्सल सेल के एएसपी ने जानकारी देते हुए बताया कि नक्सलवाद खत्म होने के बाद भी पूरी सावधानी के साथ काम किया जा रहा है. जिस तरह से पहले सतर्कता बरतते थे, उतनी ही एहतियात अभी भी बरती जा रही है.
After becoming counterfeit-free, the trade of tendu leaves in Balaghat is estimated to be more than Rs 45 crore.

नक्लमुक्त होने के बाद बालाघाट में तेंदूपत्ते का व्यापार 45 करोड़ से ज्यादा होने का अनुमान है.

Input- राहुल टेम्भरे

MP News: मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के वनांचलों में इस बार तेंदूपत्ता संग्रहण का कार्य एक नई सुबह लेकर आया है. दिसंबर 2025 में बालाघाट के पूर्णतः नक्सल मुक्त घोषित होने के बाद, यह पहला मौका है जब ग्रामीण, मजदूर, ठेकेदार और फड़मुंशी बिना किसी खौफ के जंगलों में कदम रख रहे हैं. कभी बंदूकों के साए में होने वाला यह काम अब पूरी तरह निडर होकर किया जा रहा है, जिससे स्थानीय ग्रामीणों में भारी उत्साह और खुशी का माहौल है.

45 करोड़ से ज्यादा का कोरोबार

डर का काला अध्याय खत्म होने से इस बार जिले में रिकॉर्ड संग्रहण की उम्मीद है. अनुमान है कि इस सीजन में जिले भर में 45 करोड़ रुपये से अधिक का तेंदूपत्ता का कारोबार होगा. खास बात यह है कि इस बार पेसा एक्ट के तहत 30 ग्राम पंचायतों के 51 तेंदूपत्ता फड़ों में सीधे खरीदी की जा रही है, जिससे सीधा लाभ जनजातीय समाज को मिलेगा.

सर्च ऑपरेशन पर ‘हॉकफोर्स’ की 20 पार्टियां

भले ही बालाघाट जिला नक्सलमुक्त हो चुका है, लेकिन पुलिस और प्रशासन कोई कसर नहीं छोड़ना चाहता. सुरक्षा के लिहाज से ‘हॉकफोर्स’ की 15 से 20 पार्टियां जंगलों में लगातार सर्चिंग कर रही हैं. अतीत की बात करें, तो कई मर्तबा नक्सलियों ने तेंदूपत्ता फड़ों को आग के हवाले कर दिया था. ऐसी वारदातों को रोकने और ग्रामीणों को सुरक्षा का अहसास कराने के लिए बल आज भी पूरी तरह सजग है.

बालाघाट नक्सल सेल के एएसपी राकेश पंन्द्रो ने जानकारी देते हुए बताया कि ठेकेदारों, समितियों फड़ प्रभारियों की मीटिंग की गई थी. नॉर्थ साउथ में 60 समितियां हैं. इनके पास 750 फड़ हैं. नक्सलवाद खत्म होने के बाद भी पूरी सावधानी के साथ काम किया जा रहा है. जिस तरह से पहले सतर्कता बरतते थे, उतनी ही एहतियात अभी भी बरती जा रही है.

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