FIR सही, लेकिन पुलिस कस्टडी गलत…; आंबेडकर पोस्टर विवाद मामले में वकील अनिल मिश्रा को हाई कोर्ट से मिली जमानत
वकील अनिल मिश्रा
Bhimrao Ambedkar Poster Controversy: मध्य प्रदेश के ग्वालियर में डॉ. भीमराव आंबेडकर का पोस्टर जलाने वाले हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष वकील अनिल मिश्रा को मामले में जमानत मिल गई है. हाई कोर्ट की डबल बेंच ने एक लाख रुपये के बांड के बाद जमानत दे दी है. कोर्ट ने इस मामले में हुई एफआईआर को सही माना है, लेकिन कोर्ट ने पुलिस कस्टडी को गलत बताया है. वहीं हाई कोर्ट की प्रोसिडिंग वायरल करने के मामले में रजिस्टर से भी शिकायत की गई है.
पुलिस ने रोकने का प्रयास क्यों नहीं किया – हाई कोर्ट
पोस्टर विवाद वाले मामले की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट की डबल बेंच ने कहा कि एफआईआर लिखने के बाद आरोपी को नोटिस देकर छोड़ा जा सकता था. कोर्ट ने कहा कि जिस समय डॉ. भीमराव आंबेडकर का पोस्टर जलाया जा रहा था, उस समय एसपी ऑफिस और आईजी ऑफिस दोनों ही सामने थे, फिर भी पुलिस ने उन्हें क्यों रोकने का प्रयास नहीं किया.
पुलिस ने नहीं किया विधि प्रक्रिया का पालन
हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष अनिल मिश्रा ने कोर्ट में कहा कि पुलिस ने विधि प्रक्रिया का पालन नहीं किया है. उन्होंने कहा कि पहले गिरफ्तारी की गई और बाद में एफआईआर दर्ज की गई है. अनिल मिश्रा ने कहा कि परिवार को गिरफ्तार कने की भी सूचना दी गई. उन्होंने आगे कहा कि एससी-एसटी एक्ट में शिकायत के बाद नोटिस देकर छोड़ने का प्रावधान दिया गया है, लेकिन ग्वालियर पुलिस ने इस प्रावधान का पालन नहीं किया.
अनिल मिश्रा को 14 जनवरी को भेजा जेल
बता दें कि मामले में जेएमएफसी मधुलिका खत्री की कोर्ट ने अनिल मिश्रा और अन्य तीन लोगों को 14 जनवरी तक के लिए जेल भेजा था. अनिल मिश्रा समेत सात लोगों पर डॉ. भीमराव आंबेडकर के पोस्टर को जलाने और अपमानजनक नारे लगाने के आरोप लगा है. कोर्ट के फैसले के बाद सभी चार दिन से जेल में बंद थे.
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