Bhopal News: MP में खाली क्लासरूम और करोड़ों के निर्माण, सदन में उच्च शिक्षा पर सरकार दो मोर्चों पर घिरी
Madhya Pradesh Assembly
Bhopal News: मध्यप्रदेश विधानसभा में उच्च शिक्षा को लेकर सरकार को एक साथ दो अलग-अलग लेकिन गंभीर मुद्दों पर जवाब देना पड़ा. एक ओर खरगोन स्थित क्रांतिसूर्य टंट्या भील विश्वविद्यालय में स्वीकृत 140 के 140 शैक्षणिक पद खाली होने का मामला उठा, तो दूसरी ओर छतरपुर के महाराजा छत्रसाल बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में 27.50 करोड़ रुपये के निर्माण भुगतान को लेकर सवाल खड़े किए गए.
140 पद स्वीकृत, एक भी भरा नहीं
कांग्रेस विधायक डॉ. झूमा सोलंकी ने सदन में प्रश्न उठाते हुए पूछा कि विश्वविद्यालय में वर्तमान में कितने पदों पर पदपूर्ति है और रिक्त पद कब तक भरे जाएंगे. उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने जवाब में बताया कि विश्वविद्यालय में सहायक प्राध्यापक के 80, सह प्राध्यापक के 40 और प्राध्यापक के 20 पद स्वीकृत हैं—कुल 140 शैक्षणिक पद. वर्तमान स्थिति यह है कि सभी पद रिक्त हैं.
इस खुलासे के बाद विपक्ष ने सवाल उठाया-
मंत्री ने कहा कि स्नातक स्तर पर कृषि, कला, वाणिज्य (कम्प्यूटर), विज्ञान (कम्प्यूटर) और स्नातकोत्तर स्तर पर अर्थशास्त्र पाठ्यक्रम संचालित हैं. नियमित नियुक्तियों के अभाव में कुछ शिक्षकों को प्रतिनियुक्ति पर भेजकर काम चलाया जा रहा है. हालांकि, रिक्त पदों की पूर्ति की कोई समय-सीमा बताना संभव नहीं है.
इस खुलासे के बाद विपक्ष ने सवाल उठाया कि जब विश्वविद्यालय में एक भी नियमित शिक्षक नहीं है, तो शैक्षणिक गुणवत्ता कैसे सुनिश्चित की जाएगी.
27.50 करोड़ के भुगतान पर बहस
इसी सत्र में बीजेपी विधायक ललिता यादव ने महाराजा छत्रसाल बुंदेलखंड विश्वविद्यालय, छतरपुर में निर्माण कार्यों के लिए किए गए 27 करोड़ 50 लाख रुपये के भुगतान का मुद्दा उठाया. उन्होंने कुलपति निवास, प्रशासनिक भवन और बाउंड्री वॉल निर्माण के लिए कुलसचिव द्वारा किए गए भुगतान की वैधता पर सवाल किया.
मंत्री इंदर सिंह परमार ने बताया कि कुलपति निवास और प्रशासनिक भवन के लिए 17 करोड़ रुपये तथा बाउंड्री वॉल, गेट और गार्ड रूम के लिए 10 करोड़ 50 लाख रुपये का भुगतान किया गया है. यह पूरी राशि लोक निर्माण विभाग (पीआईयू), जिला छतरपुर को हस्तांतरित की गई है.
मंत्री ने स्पष्ट किया कि अकादमिक भवन निर्माण के लिए कोई भुगतान नहीं हुआ है. उन्होंने कहा कि कुलसचिव ने अपने अधिकारों के अंतर्गत ही भुगतान किया है और किसी प्रक्रिया का उल्लंघन नहीं हुआ. कार्य परिषद को केवल प्रस्ताव पारित कर अनुमोदन देने का अधिकार है, वित्तीय हस्ताक्षर का नहीं.
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ललिता यादव ने मामले की जांच की मांग की, जिस पर मंत्री ने कहा कि अभी तक कोई अनियमितता सामने नहीं आई है, लेकिन आवश्यकता होने पर जांच कराई जा सकती है.