Bhopal: खाली पड़े निगम मंडलों में जल्द हो सकती है नेताओं की एंट्री, CM Mohan yadav हाई कमान से करेंगे मुलाकात
CM Mohan yadav
Bhopal: मध्यप्रदेश की राजनीति में इन दिनों सत्ता और संगठन दोनों स्तर पर हलचल तेज है. भारतीय जनता पार्टी में लंबे समय से लंबित निगम–मंडल नियुक्तियों को लेकर अब अंतिम दौर की चर्चा चल रही है. सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री स्तर पर लगातार बैठकों का दौर जारी है, वहीं पार्टी दफ्तर में भी संगठन पदाधिकारियों के साथ नामों पर मंथन किया गया है.
पार्टी हाईकमान से अंतिम चर्चा करेंगे मुख्यमंत्री
माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष दिल्ली जाकर पार्टी हाईकमान से अंतिम चर्चा करेंगे. इसके बाद ही आधिकारिक सूची जारी हो सकती है. पिछले कई महीनों से प्रदेश के कई नेता राजनीतिक नियुक्तियों का इंतजार कर रहे हैं. ऐसे में अब संकेत मिल रहे हैं कि यह इंतजार जल्द खत्म हो सकता है.
कुछ नामों पर सहमति बन चुकी है
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि कई वरिष्ठ और संगठन के प्रति लंबे समय से सक्रिय कार्यकर्ताओं को निगम–मंडलों में समायोजित किया जाएगा. कुछ नामों पर सहमति बन चुकी है, जबकि कुछ पदों को लेकर अब भी अंतिम सहमति बनना बाकी है. पार्टी की रणनीति संतुलन साधने की बताई जा रही है—क्षेत्रीय, सामाजिक और संगठनात्मक समीकरणों को ध्यान में रखकर नियुक्तियां की जाएंगी.
राष्ट्रीय स्तर तक विचार-विमर्श हो चुका है
सूत्र बताते हैं कि छोटी टोली से लेकर प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर तक विचार-विमर्श हो चुका है. अब अंतिम फैसला केंद्रीय नेतृत्व की सहमति के बाद ही होगा. कई दावेदार इन दिनों अपने वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात कर समर्थन जुटाने में लगे हैं. खासतौर पर वे नेता, जिन्हें पिछली बार मौका नहीं मिल पाया था, इस बार अपनी दावेदारी मजबूत करने में जुटे हैं.
पार्टी नेतृत्व कोई जल्दबाजी नहीं करना चाहता
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि निगम–मंडल नियुक्तियां सिर्फ प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं होतीं, बल्कि संगठनात्मक संतुलन और आगामी चुनावी रणनीति से भी जुड़ी होती हैं. ऐसे में पार्टी नेतृत्व कोई जल्दबाजी नहीं करना चाहता.
अब सबकी नजर दिल्ली में होने वाली बैठक पर
अब सबकी नजर दिल्ली में होने वाली संभावित बैठक पर टिकी है. संभावना जताई जा रही है कि हाईकमान की अंतिम मुहर के बाद मध्यप्रदेश में खाली पड़े निगम–मंडलों में नियुक्तियों की घोषणा जल्द ही कर दी जाएगी. यह देखना दिलचस्प होगा कि किन नेताओं को जिम्मेदारी मिलती है और किसे अभी और इंतजार करना पड़ता है.
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